वीडियो में पहली बार देखिए कृत्रिम गर्भ में कैसे पल रहा है मेमने का भ्रूण, बिना मां अब होगा बच्चे का जन्म!
बायोबैग यानि कृत्रिम गर्भ, वास्तविक गर्भ जैसा नहीं दिखता है, लेकिन यह उसी की तरह काम करता है। प्लास्टिक की थैली गर्भाशय के रूप में काम करती है और भ्रूण को बाहरी वातावरण से रक्षा करती है।
LAMB FETUS GROWN IN AN ARTIFICIAL WOMB: विज्ञान का लगातार विकास हो रहा है और धीरे धीरे वैज्ञानिक इंसानों की उम्र बढ़ाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तो कृत्रिम गर्भ से अब बच्चों का जन्म करवाने की दिशा में भी विज्ञान का लगातार विकास हो रहा है। इंटरनेट पर इन दिनों एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें एक भेड़ के मेमने को कृत्रिम गर्भ में देखा जा रहा है। ऐसे में आइये जानते हैं, कि क्या वायरल वीडियो सच है या फिर साइंस फिक्शन?
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वीडियो का सच क्या है?
कृत्रिम गर्भ में विकसित होते मेमने के भ्रूण को दिखाने वाले एक वायरल वीडियो ने इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया है और कई इंटरनेट यूजर्स वीडियो की सत्यता पर सवाल भी उठा रहे हैं। कई यूजर्स को लगता है, कि ये वीडियो ऑरिजनल नहीं है, लिहाजा हमने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि करने के लिए रिसर्च किया है और हमारी रिसर्च में पता चला है, कि ये वीडियो पूरी तरह से प्रामाणिक है और सत्य है। वास्तव में एक मेमने के भ्रूण का विकास कृत्रिम गर्भ में हो रहा है। ये वीडियो वास्तव में एक वैज्ञानिक प्रयोग है, लेकिन अंतर बस इतना है, कि ये वीडियो आज-कल का नहीं, बल्कि कुछ साल पहले का है। कुछ साल पहले वैज्ञानिकों ने कामयाबी के साथ मेमने के भ्रूण का विकास कृत्रिम गर्भ में किया और उस मेमने का जन्म भी हुआ और वही वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

ट्विटर पर वीडियो वायरल
ट्विटर पर इस वीडियो के वायरल होने के साथ ही लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और खासकर इस वक्त, जब इंटरनेट पर भेड़ों का एक गोलाकार में लगातार कई दिनों से चक्कर लगाने का मामला सामने आया है, तो लोग इस वीडियो को लेकर भी काफी उत्साहित हैं। हालांकि मेमने और एक कृत्रिम गर्भ के इर्द-गिर्द घूमने वाला ये प्रयोग करीब आधा दशक पहले किया गया था, लेकिन इसने लोगों की दिलचस्पी एक बार फिर बढ़ा दी है।

साल 2017 में किया गया था प्रयोग
यह प्रयोग मूल रूप से साल 2017 में फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था। वीडियो को टेक इनसाइडर ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया था। हॉस्पिटल के रिसर्चर्स ने समय से पहले मेमने के भ्रूण को चार हफ्ते के लिए कृत्रिम रूप से बनाए गए गर्भ में रखा और इस दौरान यह देखने की कोशिश की गई, कि क्या मेमने का ये भ्रूण जिंदा रहता है, या फिर इसकी मौत हो जाती है। लेकिन, रिसर्चर्स उस वक्त हैरान रह गये, जब ये भ्रूण ना सिर्फ जिंदा रहा, बल्कि इसका लगातार विकास भी होता रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, ये भ्रूण बड़ा हुआ और इसका वजन भी सामान्य स्तर तक बढ़ता रहा और फिर इस भ्रूण ने अपनी आंखें भी खोली। रिपोर्ट के मुताबिक, इस भ्रूण के जिंदा रहने के बाद वैज्ञानिकों ने आठ और मेमनों पर इस तरह का प्रयोग किया और सभी प्रयोग कामयाब रहे। इस प्रयोग का मकसद कृत्रिम गर्भ को लेकर रिसर्च करना था, ताकि भविष्य में कृत्रिम गर्भ के जरिए मानवों का भी विकास किया जा सके।
कृत्रिम गर्भ में कैसे विकसित हुआ जीवन?
आइए हम आपको कृत्रिम गर्भ के बारे में थोड़ी और जानकारी देते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि, आखिर कृत्रिम गर्भ में जीवन का विकास कैसे किया गया। हालांकि ये बायोबैग यानि कृत्रिम गर्भ, वास्तविक गर्भ जैसा नहीं दिखता है, लेकिन यह उसी की तरह काम करता है। प्लास्टिक की थैली गर्भाशय के रूप में काम करती है और भ्रूण को बाहरी वातावरण से रक्षा करती है। इस कृत्रिम भ्रूण को स्पेशल वैज्ञानिक पद्धति से बनाया गया है। इस बायोबैग में एक इलेक्ट्रोलाइट फैसिलिटी होता है, जो रक्त को प्रसारित करने और ऑक्सीजन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान करने के लिए गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव के समान कार्य करता है। हालांकि, मेमने और मनुष्य समान नहीं हैं, इसलिए वैज्ञानिकों ने उस समय स्वीकार किया था, कि मानव शिशुओं पर इसका परीक्षण करने से पहले इसमें और अधिक रिसर्च की आवश्यकता है।












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