पाकिस्तान में भगवान कृष्ण के मंदिर निर्माण के खिलाफ जारी हुआ फतवा
नई दिल्ली। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय को कितनी स्वतंत्रता है और इन्हें समाज में क्या अधिकार प्राप्त है इसका अंदाजा इस खबर से आपको हो जाएगी। 2018 में जब इमरान खान चुनाव जीतकर आए थे तो उन्होंने कहा था कि वह देश में अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता देंगे। पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं। चुनाव जीतने के एक वर्ष पहले इमरान खान ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर इस्लामाबाद में बनाने की इजाजत दी थी। इसके लिए स्थानीय हिंदू समुदाय को जमीन भी दी गई थी। लेकिन अब पाकिस्तान अहम इस्लामिक संस्था ने मंदिर के खिलाफ एक फतवा जारी कर दिया है। फतवे में कहा गया है कि इस्लाम धर्म किसी नए मंदिर निर्माण की इजाजत नहीं देता है।

अभी तक पैसे नहीं मिले
बता दें कि मंदिर के निर्माण के पहले चरण के लिए 10 करोड़ रुपए की राशि का आवंटन किया गया था। इस मंदिर को 20 हजार स्क्वॉयर फीट के इलाके में बनाया जाना था। 23 जून को संसद की मानवाधिकार आयोग के संसदीय सचिव लाल चंद ने यहां भूमि पूजन किया था और उन्हें इस मंदिर निर्माण की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। लाल चंद का कहना है कि इस्लामाबाद में भगवान कृष्ण का अपने आप में पहला ऐसा मंदिर होगा। मंदिर के निर्माण का काम लोगों के चंदे से हो रहा है क्योंकि इमरान खान ने जिस पैसे की घोषणा की थी वो अभी तक दिया नहीं गया है।
अहम इस्लामिक संस्था है जामिया अशर्फिया
लालचंद ने बताया कि 1947 से पहले यहां कई मंदिर थे। लेकिन अब यहां अधिकतर मंदिरों में या तो पूजा नहीं होती है या फिर उन्हें कोई पूछता नहीं है। लेकिन अब मंदिर निर्माण में एक बार फिर से बाधा खड़ी हो गई है क्योंकि लाहोर की इस्लामिक संस्था जामिया अशर्फिया ने इसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया है। फतवे में कहा गया है कि इस्लाम में नया हिंदू मंदिर बनाने की इजाजत नहीं है। इस फतवे को कई मुफ्ती, धर्मगुरुओं का समर्थन मिला है।
फतवे का किया बचाव
बता दें कि जामिया अशर्फिया पाकिस्तान में काफी अहम इस्लामिक संस्था है और इसका काफी प्रभाव है, यहां कई देशों के लिए पढ़ने आते हैं। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय ही यह संस्था अपने अस्तित्व में आई थी। वहीं इस फतवे के बारे में जामिया के नेताओं को कहना है कि इस फतवे का मकसद किसी धर्म को दबाना नहीं बल्कि लोगों के भीतर जो संशय हैं उसे दूर करना है।












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