फेसबुक से भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दिया इस्तीफा, बताया-नफरत से मुनाफा कमाने वाली कंपनी

कैलिफोर्निया। फेसबुक के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इंजीनियर ने फेसबुक पर "नफरत फैलाने" का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से आलोचना की। फेसबुक के कर्मचारी अशोक चंदवानी ने फेसबुक को लिखे अपने इस्तीफे में कहा कि, इस प्लेफॉर्म को नफरत का मंच बनते देखकर बेचैनी हो रही है। मंगलवार को इसके खिलाफ स्टैंड लेने का समय आ गया।

अशोक ने मंगलवार को दिया इस्तीफा

अशोक ने मंगलवार को दिया इस्तीफा

फेसबुक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अशोक चंदवानी ने फेसबुक के इंटरनल नेटवर्क पर पोस्ट किए अपने 1300 शब्दों के लेटर में लिखा कि, मैं इसलिए छोड़ रहा हूं क्योंकि मैं अब ऐसे संगठन में योगदान नहीं कर सकता जो अमेरिका में और वैश्विक स्तर पर घृणा को बढ़ावा दे रहा है। पैसिफिक टाइम सुबह आठ बजे दिए अपने इस्तीफे में अशोक ने कई लिंक साझा कर अपने दावों को मजबूती के साथ कंपनी के सामने पेश किया। चंदवानी ने कहा कि कंपनी ने नस्लवाद, विघटन और हिंसा के लिए उकसाने के मंच पर मुकाबला करने के लिए बहुत कम काम किया है। उन्होंने विशेष रूप से म्यांमार में हुए नरसंहार को रोकने में कंपनी की भूमिका का हवाला दिया है।

फेसबुक ने इस्तीफे पर दी सफाई

फेसबुक के प्रवक्ता लिज बुर्जुआ ने इस इस्तीफे पर कंपनी का पक्ष रखते हुए कहा कि, हम नफरत से लाभ नहीं कामते हैं। हम अपने समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक वर्ष अरबों डॉलर का निवेश करते हैं और अपनी नीतियों की समीक्षा और अद्यतन करने के लिए बाहरी विशेषज्ञों के साथ गहन साझेदारी में हैं। इस गर्मी में हमने उद्योग की अग्रणी नीति शुरू की, हमारे फैक्ट चेक कार्यक्रम को बढ़ाया, और नफरत फैलाने वाले संगठनों से जुड़े लाखों पोस्ट हटाए। जिसमें से 96% से वे थे जिसके बारे में हमे किसी ने सूचित नहीं किया था।

कंपनी की पॉलिसी को लेकर कर्मचारियों में असंतोष

कंपनी की पॉलिसी को लेकर कर्मचारियों में असंतोष

मंगलवार को चंदवेनी के इस्तीफे ने एक कंपनी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच कंपनी छोड़ने वाले नए कर्मचारी बन गए हैं। कुछ साल पहले एक आदर्श नियोक्ता के रूप में देखी जाने वाली फेसबुक पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। दुनिया को एक साथ जोड़ने का उदार मिशन की वकालत करने वाले फेसबक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को लेकर कर्मचारियों में असंतोष देखने को मिल रहा है। नफरत और नस्लवादी भाषण पर फेसबुक की नीतियों से कार्यकर्ता हताश हो गए हैं, क्योंकि नस्लीय अन्याय के खिलाफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हजारों कर्मचारियों की मांग है कि फेसबुक के अधिकांश वोटिंग शेयरों को नियंत्रित करने वाले जुकरबर्ग अपने रुख में बदलाव करें।

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