पाकिस्तान में सिखों पर जुल्म की इंतहा, पेशावर से 30,000 लोगों का पलायन

नई दिल्ली। पाकिस्तान में सिख अल्पसंख्यक लगातार कट्टरपंथियों का शिकार हो रहे हैं। पाकिस्तान के पेशावर से हजारों की संख्या में सिख समुदाय के लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। टीआरटी वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेशावर से 30,000 से ज्यादा सिखों ने पाकिस्तान छोड़कर भारत समेत अन्य देशों में शरण ली है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतें लगातार सिखों पर अटैक कर रही है और इसी डर की वजह से हजारों लोग भागने को मजबूर हो रहे हैं।

पाकिस्तान: पेशावर से 30,000 सिखों का पलायन

पिछले माह पाकिस्तान में एक सोशल एक्टिविस्ट चरणजीत सिंह को गोली मारकर हत्या कर दी थी। पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय के लोगों का आरोप है कि सरकार उनकी सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं कर पा रही है। वहीं, आगामी आम चुनाव को देखते हुए राजनीतिक पार्टियों ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी साध रखी है।

सिख समुदाय के स्पोक्सपर्सन बाबा गुरपाल सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान में सिखों के खिलाफ नरसंहार चल रहा है। वहीं, पाकिस्तान सिख कम्युनिटी काउंसिल (PCS) के मेंबर कहते हैं कि उनके समुदाय को मिटा दिया जा रहा है कि क्योंकि हम औरों से अलग दिखते हैं। पीसीएस के मेंबर बलबीर सिंह ने कहा कि उनकी पगड़ी देखकर कट्टरपंथी लोग निशाना बनाते हैं।

कई सिख समुदाय के लोगों का कहना है कि तालिबान भी अल्पसंख्यकों पर अटैक कर रहे हैं। पिछले 4 साल में 60 प्रतिशत से ज्यादा सिखों ने पेशावर छोड़ किसी अन्य देश में शरण ले ली है। पाकिस्तान में सोशल वर्कर रादेश सिंह बताते हैं कि पेशावर में अब 8,000 से भी कम सिख बचे हैं। रादेश सिंह कहते हैं कि जो भी सिख पाकिस्तान छोड़ने रहे हैं, वे अपना घर और दुकानों को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

पाकिस्तान में लाहौर वह स्थान है, जहां सिख धर्म गुरु श्री गुरु नानक साहब का जन्म हुआ था। आज हजारों की संख्या में हर साल दुनियाभर से सिख मत्था टेकने के लिए पाकिस्तान के लाहौर के गुरुद्वारे में सिख आते हैं। पेशावर में पिछले 250 सालों से शांति से सिख और मुसलमान एक साथ रह रहे हैं, लेकिन पिछले 4 सालों में जो इस क्षेत्र की तस्वीर बदली है, वो बहुत ही भयानक है।

पाकिस्तान में सिखों के खिलाफ अत्याचार की सीमा उस हद तक पहुंच गई है कि लोगों को अपने सिर के बाल कटवाकर अपनी पहचान तक छुपानी पड़ रही है। यहां तक कि पेशावर में जिन सिखों की मौत हो रही है, उनको शमशान भी नसीब नहीं हो रहा है। पाकिस्तान की लोकल मीडिया के मुताबिक, यहां की सरकार सिखों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं है।

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