Explainer: बांग्लादेश में निशाने पर रहे हिंदू! इस्कॉन मंदिर पर 18 साल में 5 हमले, 4 साल में 3 बार फैली दहशत
Attack on ISKCON Temple: हाल ही में बांग्लादेश की सरकार में हुए तख्तापलट के बाद देश सुर्खियों में छाया है। इस दौरान हुई हिंसा और आगजनी के बीच अल्पसंख्यक हिंदुओं की जान आफत में फंस गई है। हिंसा ने हिंदुओं के मंदिरों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। यह कोई पहली बार नहीं था, जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले हुए हों।
पिछले कुछ दशकों में बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आईं हैं। इस्लामिक बहुलता वाले देश में हिंदू समुदाय एक अल्पसंख्यक है और उन्हें अक्सर धार्मिक असहिष्णुता, सांप्रदायिक हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इन घटनाओं ने न केवल बांग्लादेश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों और अल्पसंख्यक अधिकारों पर गहरी चिंता पैदा की है। आइए आपको रूबरू कराते हैं हिंंदू की स्थिति से....

बांग्लादेश में इस्कॉन (अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) मंदिरों पर कई बार हमले हुए हैं, जो धार्मिक असहिष्णुता और सांप्रदायिक हिंसा के मामलों को उजागर करते हैं।
- पहला हमला- ब्राह्मणबाड़िया (2006)
घटना: इस्कॉन मंदिर पर हमला किया गया था, जिसमें कई भक्त घायल हुए थे। यह हमला सांप्रदायिक तनाव का परिणाम था। - दूसरा हमला- नौगांव (29 सितंबर 2013)
घटना: दुर्गा पूजा के दौरान इस्कॉन मंदिर पर हमला किया गया। इस हमले में मंदिर को काफी नुकसान हुआ और कई मूर्तियों को तोड़ा गया। - तीसरा हमला- नोआखली (15 अक्टूबर 2021)
घटना: दुर्गा पूजा के दौरान कोमिल्ला जिले में कुरान की बेअदबी के एक झूठे आरोप के बाद कई मंदिरों और पंडालों पर हमले हुए। नोआखली में इस्कॉन मंदिर पर भी हमला हुआ, जिसमें कई भक्त घायल हुए और दो भक्तों की मृत्यु हो गई। यह घटना बांग्लादेश में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का हिस्सा थी, जिसमें कई हिंदू मंदिरों और घरों पर हमले किए गए थे। - चौथा हमला- ढाका (17 मार्च 2022)
घटना: ढाका में इस्कॉन मंदिर पर हमला हुआ, जिसमें हिंसक भीड़ ने मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की और भक्तों पर हमला किया। इस घटना में कई लोग घायल हो गए। - पांचवा हमला- अगस्त 2024
घटना: देश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट होते ही, उपद्रवियों ने हिंदू के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया। बांग्लादेश के मेहरपुर इस्कॉन मंदिर को दंगाइयों ने आग के हवाले कर दिया। मंदिर में रखा सामान भी लूटकर ले गए।
हिंदू समुदाय की जनसंख्या में आई भारी कमी
बांग्लादेश के गठन के समय (1971) हिंदू समुदाय देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा था। परंतु, पिछले कुछ दशकों में लगातार हो रहे सांप्रदायिक हमलों, धार्मिक असहिष्णुता, और सरकारी संरक्षण की कमी के कारण हिंदू समुदाय की जनसंख्या में भारी कमी आई है। भूमि अधिग्रहण, धार्मिक उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव के चलते कई हिंदू परिवार देश छोड़ने पर मजबूर हुए।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के मुताबिक, 1964 से 2013 के बीच धार्मिक उत्पीड़न के कारण 11 मिलियन से ज्यादा हिंदू बांग्लादेश छोड चुके हें। प्रत्येक साल 2 लाख से ज्यादा हिंदू देश छोड़ रहे हैं। आबादी की बात की जाए तो, करीब 15 करोड़ मुस्लिम और दो करोड से भी कम हिंदू आबादी है। वहीं, 10 लाख बौद्ध, 4.95 लाख ईसाई और डेढ़ लाख के आसपास अन्य धर्मों को मानने वाले लोग हैं।
कब-कब हिंदुओं ने झेला दंश!
- 1990 और 2000 के दशक: 1990 के दशक में और 2000 के शुरुआती वर्षों में, कई हिंदू मंदिरों पर हमले हुए और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। धर्मांतरण, जमीन हड़पने और धार्मिक असहिष्णुता के कई मामले सामने आए। 2001 में, चुनावों के बाद हिंसा की लहर आई, जिसमें हिंदू समुदाय पर बड़े पैमाने पर हमले हुए।
- 2013 और 2014 की घटनाएं: शाहबाग आंदोलन के दौरान और इसके बाद हिंदू मंदिरों और घरों पर कई हमले हुए। इन घटनाओं में धार्मिक कट्टरपंथियों ने हिंदू समुदाय को निशाना बनाया, जिसमें कई लोग मारे गए और मंदिरों को क्षति पहुंचाई गई।
- अक्टूबर 2021 की घटना: कोमिल्ला जिले में कुरान की बेअदबी के एक झूठे आरोप के बाद पूरे देश में हिंसा भड़क उठी। दुर्गा पूजा के दौरान कई हिंदू मंदिरों, पंडालों, और घरों पर हमले किए गए। विशेष रूप से, नोआखली में इस्कॉन मंदिर पर हमला हुआ, जिसमें दो भक्तों की हत्या कर दी गई। इस घटना ने देशभर में सांप्रदायिक तनाव को और बढ़ा दिया।
- मार्च 2022 की घटना: ढाका में इस्कॉन मंदिर पर हमला हुआ, जिसमें कई भक्त घायल हुए। यह हमला सांप्रदायिक हिंसा का हिस्सा था, जो अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को डराने और धमकाने के उद्देश्य से किया गया था।












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