खतरे में अमेरिका, जापान, न्यूजीलैंड समेत आधी दुनिया, ज्वालामुखी में महाविस्फोट के बाद जागा 'हंगा काल्डेरा'
टोंगा के समुद्र में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद आधी दुनिया पर खतरा मंडरा रहा है और अमेरिका, जापान, न्यूजीलैंड समेत प्रशांत महासागर के किनारे बसे सभी देशों के लिए अलर्ट जारी किया गया है।
टोंगा, जनवरी 16: टोंगा साम्राज्य अकसर दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचता रहता है, लेकिन इस बार द्वीपों का ये देश बहुत बड़ी मुसीबत में फंसा हुआ है और पूरी दुनिया टोंगा साम्नाज्य के साथ साथ आधी धरती के लिए दुआएं कर रहा है। 15 जनवरी को समुद्र के नीचे विशालकाय ज्वालामुखी विस्फोट के बाद पूरी दुनिया अलर्ट पर है और जापान में पानी की ऊंची ऊंची लहरें टकरा रही हैं, जबकि अमेरिका में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, न्यूजीलैंड के लिए भी खतरे का अलर्ट जारी किया गया है।

कहां हुआ है ज्वालामुखी विस्फोट?
न्यूजीलैंड के पास स्थिति द्वीप टोंगा के पास समुद्र के अंदर ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ है और ये ज्वालामुखी विस्फोट इतना तगड़ा है, कि समुद्र से करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक धुआं उठ रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि, ज्वालामुखी विस्फोट के बाद धुएं का गुबार किस हद तक आसमान में उठ रहा है। ये ऐसा दिख रहा है, मानो परमाणु बम में विस्फोट हुआ है। इस ज्वालामुखी विस्फोट में कम से कम 2 दर्जन से ज्यादा हुंगा-हापाई और हुंगा-टोंगा द्वीप चपेट में आए हैं और इन द्वीपों के ऊपर कई घंटे तक राख और पत्थरों की बारिश होती रही। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ज्वालामुखी का आकार करीब 20 किलोमीटर चौड़ा है।

एक्टिव है हुंगा-टोंगा-हंगा-हापाई ज्वालामुखी
टोंगा में फटे इस ज्वालामुखी का नाम हुंगा-टोंगा-हंगा-हापाई ज्वालामुखी है और पिछले कुछ दशकों से ये ज्वालामुखी लगातार एक्टिव है और कई बार इसमें विस्फोट हो चुका है, लेकिन अब तक जितने भी विस्फोट हुए हैं, वो काफी छोटे विस्फोट थे। इससे पहले साल 2009 और 2014-15 में भी इस ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था और समुद्र में काफी गर्म लहरें फैल गई थीं, लेकिन इस बार ज्वालामुखी विस्फोट का जो आकार है, वो काफी विशालकाय है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार ज्वालामुखी में जो विस्फोट हुआ है, वैसा विस्फोट कम से कम 2 हजार सालों पर होता है।

ज्वालामुखी विस्फोट इतना खतरनाक कैसे?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि ज्वालामुखी में उठा मैग्मा 1200 डिग्री के तापमान पर समुद्र के पानी में धीरे धीरे निकलता रहता है, तो फिर पानी के अंदर भाप की एक पतली रेखा बनकी रहती है और मैग्मा की बाहरी सतह लगातार ठंडा होती रहती है। लेकिन, लेकिन यह प्रक्रिया तब काम नहीं करती जब ज्वालामुखी गैस से भरी जमीन से मैग्मा का विस्फोट हो जाता है। जब मैग्मा तेजी से पानी में बाहर निकलता है, तो भाव की परत टूट जाती है, जिससे जिससे गर्म मैग्मा ठंडे पानी के सीधे संपर्क में आ जाता है। ज्वालामुखी पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि, ''ये प्रक्रिया ईंधन-शीतलक संपर्क'' कहलाता है, जो एक कैमिकल विस्फोट के समान होता है और ये काफी ज्यादा शक्तिशाली हो जाता है और फिर सुपरसोनिक रफ्तार से ज्वालामुखी में विस्फोट हो जाता है, यानि इसकी रफ्तार आवाज की रफ्तार से भी ज्यादा होती है।

इस बार कितना खतरनाक है ज्वालामुखी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अभी तक इस विस्फोट को लेकर कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं, क्योंकि पूरा का पूरा द्वीप राख के बादलों से ढंका हुआ है। इससे पहले 20 दिसंबर 2021 और 13 जनवरी 2022 को भी दो मध्यम आकार के विस्फोट हुए थे, जिनसे आकाश में करीब 17 किलोमीटर तक राखों का बादल छा गया था। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इस बार का विस्फोट काफी ज्यादा हिंसक है और राख का ढेर पहले से ही लगभग 20 किलोमीटर से ऊंचा जा चुका है। सबसे उल्लेखनीय रूप से, यह ज्वालामुखी से लगभग 130 किमी की दूरी पर लगभग केंद्रित रूप से फैल गया है, हवा के संपर्क में आने के बाद इसका व्यास 260 किलोमीटर के दायरे में फैल गया है।
हजारों किलोमीटर तक असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, समुद्र में इस ज्वालामुखी विस्फोट का असर हजारों किलोमीटर तक होगा और विस्फोट के फौरन बाद इसका असर टोंगा और पड़ोसी फिजी और समोआ में भी देखने को मिला है, जहां सुनामी आ चुका है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, ये महाविस्फोट चूंकी समुद्र के अंदर हुआ है, लिहाजा विस्फोट स्थल से 2 हजार किलोमीटर की दूरी पर स्थिति न्यूजीलैंड में इसका असर फौरन दर्ज किया गया है और विस्फोट शुरू होने के तुरंत बाद टोंगटापु के आकाश राख से भर गया और हर तरफ राख की बारिश होने लगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इन सभी संकेतों से पता चलता है कि बड़ा हंगा काल्डेरा जाग गया है। वहीं, सुनामी एक विस्फोट के दौरान युग्मित वायुमंडलीय और महासागरीय सदमे तरंगों द्वारा उत्पन्न होती है, लेकिन वे आसानी से पनडुब्बी भूस्खलन और काल्डेरा ढहने के कारण
भी होती हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में भयानक मंजर
वहीं, माटांगी टोंगा न्यूजपेपर की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वालामुखी विस्फोट के बाद आसमान में जोर जोर से बिजली गिर रही थी और धरती कांप रही थी। न्यूजपेपर की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि, राख, भाप और गैस पांच किलोमीटर की चौड़ाई के साथ 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठ रहा था। वहीं, न्यूजीलैंड आर्मी ने कहा है कि, वो लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद के लिए तैयार है।

टोंगा रिपब्लिक को जानिए
आपको बता दें कि, टोंगा साम्राज्य 170 से ज्यादा दक्षिण प्रशांत द्वीपों का एक पोलिनेशियन साम्राज्य है, जहां दर्जनों निर्जन द्वीप भी हैं, जहां कोई नहीं रहता है। वहीं, ज्यादातर द्वीप सफेद समुद्र तटों से घिरे हुए हैं और उष्णकटिबंधीय वर्षावन से घिरे हुए हैं। यहां के मुख्य द्वीपों के नाम टोंगटापु, लैगून हैं, जहां चूना पत्थर की चट्टाने हैं। आधिकारिक तौर पर उसे किंगडम ऑफ टोंगा कहा जाता है और टोंगा में संवैधानिक राजतंत्र है, जैसा ब्रिटेन में है और यहां के सम्राट के खिलाफ कुछ भी बोलना संवैधानिक शिष्टाचार के खिलाफ माना जाता है। टोंगा साम्राज्य दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थिति है और 170 द्वीपों में सिर्फ 36 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं, जहां सिर्फ एक लाख की आबादी ही रहती है।

अमेरिका-कनाडा पर भी मंडरा रहा है खतरा
टोंगा महासागर में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद अमेरिका के नेशनल वेदर सर्विस ने अमेरिका के लिए भी भयानक सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है और कैलिफोर्निया, ओरेगन, वॉशिंगटन, दक्षिणी अलास्का समेत कनाडा के ऊपर भी खतरा मंडरा रहा है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया और अलेउतियन द्वीप समूहों के लिए भी गंभीर चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन को राहत और बचाव कार्य के लिए लगातार अलर्ट पर रखा गया है।
जापान में भी सुनामी अलर्ट
इसके साथ ही जापान में भी सुनामी को लेकर अलर्ट जारी किया गया है और जापानी मीडिया एमएचके ने जापानी मौसम विभाग के हवाले से कहा है कि, देश के दक्षिणी अमामी द्वीप और कागोशिमा प्रांत में स्थिति टोकारा द्वीप समूह के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। जापान के अलावा वो सभी देश, जो प्रशांत महासागर के किनारे स्थित हैं, उन देशों को सावधान रहने के लिए कहा गया है और ज्यादातर देशों पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि, सुनामी के दौरान समुद्र में कम से कम 3 मीटर से ज्यादा ऊंचाई तक पानी की लहरे उठ सकती हैं।












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