Pakistan: बलूचिस्तान में 74 लोगों की पहचान पूछकर हत्या, पंजाबियों से इतनी नफरत क्यों करते हैं बलूच?

Balochistan attacks: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से यात्रा कर रहे करीब दो दर्जन नागरिकों को उनके वाहनों से खींचकर हथियारबंद बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी, और इसके अलावा पाकिस्तान के इस दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में रविवार रात और सोमवार सुबह तक 6 घातक हमले हुए हैं।

इन हमलों में कम से कम 74 लोग मारे गए हैं, जिसने पाकिस्तान में दहशत भर दी है। बलूचिस्तान एक ऐसा क्षेत्र है, जहां दशकों से सशस्त्र अलगाववादी आंदोलन चल रहा है, जिसका मतलब है लड़ाकों और सुरक्षा बलों के बीच अक्सर झड़पें होती रहती हैं।

Balochistan attacks

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली जिम्मेदारी

अलगाववादी समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), जिसने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उसने एक बयान में कहा है, कि उसने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया और पूरे प्रांत में हाईवे पर नियंत्रण कर लिया है। बीएलए का दावा है, कि उसने 102 लोगों को मारा है और मारे गये सभी लोग पाकिस्तानी सेना के जवान हैं।

सबसे घातक हमला मुसाखेल जिले के राराशम इलाके में हुआ, जो बलूचिस्तान और पंजाब की सीमा के पास स्थित है। पुलिस के मुताबिक, कम से कम 23 लोगों को उनकी गाड़ियों से बाहर निकाला गया और उनके पहचान पूछे गये, जिन लोगों ने खुद को पंजाबी बताया, उन्हें गोली मार दी गई। मारे जाने वाले सभी लोग पंजाबी प्रवासी श्रमिक थे।

बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से 140 किमी दक्षिण में कलात जिले में, सशस्त्र लड़ाकों ने पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए। जबकि, क्वेटा के दक्षिण-पूर्व में बोलन जिले में, रात भर में छह लोग मारे गए, जिनमें पंजाब के चार लोग शामिल थे। पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में कहा है, कि हमलों के दौरान अन्य पांच सुरक्षाकर्मी, कुल मिलाकर 14 लोग मारे गये।

पाकिस्तानी सेना ने कहा है, कि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में "21 आतंकवादियों" को मार गिराया है।

इस साल बलूचिस्तान में पहले भी कई हमले हो चुके हैं, जिनमें नागरिकों, कानून प्रवर्तन कर्मियों और राज्य के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। फिर भी, विश्लेषकों ने कहा कि हालिया हमले अपने पैमाने, दुस्साहस और प्रकृति में अलगाववादियों की बदलती रणनीति को दर्शाती है। सुरक्षा विश्लेषक और पाक इंस्टीट्यूट ऑफ पीस स्टडीज (PIPS) के निदेशक मुहम्मद आमिर राणा ने अल जजीरा की एक रिपोर्ट में बताया, कि "पिछले साल मई में सुरक्षा बलों पर एक बड़ा हमला हुआ था, लेकिन आज की घटनाएं महत्वपूर्ण हैं। राजमार्गों को ब्लॉक कर दिया गया, रेलवे पटरियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया और ये सब पंजाब के पास हुआ।"

उन्होंने कहा, कि "उनके ऑपरेशन का विस्तार अद्वितीय है, क्योंकि अब वो अपने संघर्ष को पंजाब तक या उसके पास तक फैलाने की अपनी ताकत को दिखा रहे हैं।"

विशेषज्ञों का कहना है, पाकिस्तान के सबसे बड़े, सबसे समृद्ध और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली प्रांत पंजाब के श्रमिकों पर निशाना बनाकर होने वाले हमले भी बदलते पैटर्न में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि प्रांत में चीनी नागरिकों और परियोजनाओं पर पिछले कई हमलों की तरह, अलगाववादी आंदोलन यह संदेश देना चाहता है, कि बलूचिस्तान में बाहरी लोग सुरक्षित नहीं हैं।

वाशिंगटन डीसी में स्थित बलूचिस्तान विशेषज्ञ मलिक सिराज अकबर ने कहा, "चीनी लोगों के अलावा, बलूच राष्ट्रवादी सुरक्षा बलों, पंजाबी मजदूरों और विकास परियोजनाओं में शामिल श्रमिकों जैसे विशिष्ट समूहों को भी निशाना बनाते हैं। उनका उद्देश्य इन समूहों को इन प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए बलूचिस्तान आने से लोगों को रोकना है।"

बलूच विद्रोहियों का संदेश

यह हमला पूर्व बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाब अकबर बुगती की 18वीं पुण्यतिथि के मौके पर हुआ है।

बलूचिस्तान के पूर्व गवर्नर और मुख्यमंत्री बुगती 2005 में अलगाववादी आंदोलन में शामिल हुए थे और अगस्त 2006 में अपने गृहनगर डेरा बुगती के पास पाकिस्तानी सेना ने उन्हें मार दिया था।

बुगती की वर्षगांठ पर हमेशा हिंसा होती है, लेकिन बलूचिस्तान में हाल ही में हुए हमलों से एक स्पष्ट संदेश गया है, कि "सशस्त्र समूहों का प्रभाव पूरे प्रांत में फैला हुआ है, जो सरकार के अधिकार को चुनौती दे रहा है।"

2023 की जनगणना के मुताबिक, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान, जो देश के 24 करोड़ नागरिकों में से लगभग 1.5 करोड़ लोगों का घर है।

तेल, कोयला, सोना, तांबा और गैस के विशाल भंडार सहित प्राकृतिक संसाधनों की अपनी संपदा के बावजूद, यह प्रांत देश का सबसे गरीब क्षेत्र बना हुआ है।

बलूचों का कहना है, कि इस प्रांत के संसाधनों का दोहन करके पंजाबियों को फायदा पहुंचाया जाता है।

इस प्रांत में मौजूद संसाधन संघीय सरकार को भारी राजस्व देते हैं, जबकि प्रांत खुद आर्थिक संकट में फंसा रहता है और यहां के लोग गरीबी में जीवन जीने को मजबूर होते हैं।

बलूचिस्तान में पाकिस्तान का एकमात्र गहरे समुद्र का बंदरगाह, ग्वादर भी है, जो 60 बिलियन डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना का केंद्रबिंदु है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पश्चिमी चीन और अरब सागर के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार लिंक स्थापित करना है।

हालांकि, प्रांत में कई लोग पाकिस्तानी सरकार पर व्यवस्थित रूप से उनकी जरूरतों की उपेक्षा करने और उनके संसाधनों का दोहन करने का आरोप लगाते हैं, जिससे विश्वासघात की भावना बढ़ती है और अलगाववाद के लिए समर्थन बढ़ता है।

अकबर ने कहा, "राष्ट्रवादी बलूच सोने, खनिजों और कोयले की खोज का कड़ा विरोध करते हैं, इन गतिविधियों को बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन मानते हैं।"

उन्होंने कहा, कि "वे अक्सर स्थानीय आबादी को लाभ पहुंचाए बिना संसाधनों को निकाले जाने के सबूत के रूप में प्रांत से कोयला ट्रकों की तस्वीरें दिखाते हैं। यह कहानी उनके मकसद के लिए जनता के समर्थन को बढ़ाने में मदद करती है।"

करीब दो दशकों से, बलूच सशस्त्र समूहों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ एक लंबा संघर्ष छेड़ रखा है।

जवाब में, सरकार ने दमनात्मक कार्रवाई शुरू की है, जिसके परिणामस्वरूप हज़ारों जातीय बलूच मारे गए और लापता हो गए।

Balochistan attacks

सेना की क्रूर कार्रवाई ने बढ़ाया गुस्सा

पाकिस्तानी सेना ने हजारों बलूच युवाओं को मारा है और उन्हें गायब करवाया है।

बलूच यकजेहती समिति (BYC), जिसका नेतृत्व 31 वर्षीय महरंग बलूच कर रही हैं, इस संगठन के सैकड़ों युवा सालों से अपने घर नहीं लौटे हैं। BYC ने इस साल जनवरी में इस्लामाबाद में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया और इस महीने की शुरुआत में क्वेटा से लगभग 1,000 किमी दक्षिण में ग्वादर शहर में धरना दिया, जो 10 दिनों से ज्यादा समय तक चला।

हालांकि, सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान BYC पर "पाकिस्तान के दुश्मनों" की तरफ से वित्तपोषित होने का आरोप लगाते हैं और इसे अलगाववादी समूहों का प्रतिनिधि बताते हैं।

अकबर ने तर्क दिया कि सरकार की ये सोच एक बड़ी गलती है।

उन्होंने कहा, कि "BYC के साथ जुड़ना बलूचों को बातचीत में शामिल करने और उग्रवादी समूहों को हाशिए पर धकेलने का एक मूल्यवान मौका हो सकता है।" अकबर ने कहा, कि "हालांकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने से इनकार करके सरकार सिर्फ बलूच सशस्त्र समूहों के संकल्प को मजबूत कर रही है और उन्हें अपनी गतिविधियां जारी रखने का मकसद प्रदान कर रही है।"

खून से लथपथ बलूचिस्तान

अगस्त 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से, पाकिस्तान में हिंसक हमलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में, जो दोनों अफगानिस्तान की सीमा पर हैं।

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) के मुताबिक, सिर्फ 2023 में 650 से ज्यादा हमले हुए हैं, जिनमें से 23 प्रतिशत बलूचिस्तान में हुए, जिसके परिणामस्वरूप 286 मौतें हुईं।

क्वेटा स्थित एक्सपर्ट मुहम्मद आरिफ के मुताबिक, इस क्षेत्र में लगातार होने वाली हिंसा की कामयाबी इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की वजह से भी है और सुरक्षाबलों के लिए इसे काउंटर करना काफी मुश्किल हो जाता है।

आरिफ ने कहा, कि "बलूचिस्तान एक बड़ा क्षेत्र है, जिसमें बिखरी हुई आबादी है, जो सरकार और राष्ट्रवादी समूहों दोनों के लिए एक आशीर्वाद और एक नुकसान दोनों है। सरकार पूरी तरह से सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती है, जबकि राष्ट्रवादी समूह बड़े क्षेत्रों पर प्रभावी रूप से नियंत्रण का दावा नहीं कर सकते हैं।"

अकबर ने कहा, कि सरकार अपने हितों और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा करने में नाकाम रही है, जिससे स्थानीय समुदायों में और भी ज्यादा आक्रोश पैदा हो सकता है।

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे ये हमले बढ़ेंगे और सरकार उन्हें रोकने के लिए संघर्ष करेगी, डर के कारण स्थानीय आबादी सशस्त्र समूहों का समर्थन करने लगेगी, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने के सरकार की कोशिशों और ज्यादा मुश्किल होती जाएंगी।"

हालांकि, बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षाविद आरिफ ने कहा कि सरकार को कठोर प्रतिक्रिया से बचने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "मेरे विचार से, बलूचिस्तान में आग लग गई है।"

उन्होंने कहा, कि "नेतृत्व को बहुत देर होने से पहले समझदारी और व्यावहारिक नीतियां अपनानी चाहिए। यह रक्तपात यहां के लोगों को निगल जाएगा। उन्हें यह समझना चाहिए कि आखिरकार, युद्ध से किसी का भला नहीं होता।"

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+