ब्रिटेन का ये कैसा चेहरा? पूर्व अधिकारी को कुत्ते-बिल्लियों के साथ काबुल से निकाला, अफगान कर्मियों को छोड़ा
पूर्व मरीने ने कुत्ते बिल्लियों के साथ काबुल से बाहर निकलने का अभियान छेड़ रखा था। उन्होंने अपने पालतू जानवरों के बगैर काबुल छोड़ने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद ब्रिटेन में इस मुद्दे पर काफी बहस हो रही थी।
काबुल, अगस्त 30: अफगानिस्तान से अपने लोगों को बाहर निकालने के लिए दुनियाभर के कई देश रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। ब्रिटेन ने भी एक दिन पहले तक अफगानिस्तान में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था। लेकिन, एक ऑपरेशन के लिए ब्रिटेन की दुनियाभर में आलोचना की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने अपने पूर्व नौसेना अधिकारी को तो कुत्ते-बिल्लियों के साथ काबुल से बाहर निकाल लिया, लेकिन अफगानी कर्मचारियों को वहीं छोड़ दिया।

कुत्ते-बिल्लियों के साथ निकाला
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने पूर्व रॉयल मरीन को उनके करीब 200 से ज्यादा कुत्ते बिल्लियों के साथ अफगानिस्तान से बाहर निकाल लिया, लेकिन उनकी संस्था के सभी कर्मचारियों को काबुल में ही छोड़ दिया गया। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक पूर्व ब्रिटिश रॉयल मरीन का नाम पॉल पेन फारथिंग है और उन्होंने काबुल से अपने कुत्ते-बिल्लियों को बाहर निकालने के लिए एक तरह का अभियान चलाया हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, पॉल काबुल में एक निजी संस्था चला रहे थे और काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद युद्धग्रस्त इस देश से बाहर निकलना चाहते थे। पॉल ने काबुल से बाहर निकलने के लिए अपने 200 से ज्यादा जानवरों के साथ शनिवार देर शाम उड़ान भरी, लेकिन अपने तमाम कर्मचारियों को काबुल में ही छोड़ दिया।

15 साल से कर रहे थे काबुल में काम
15 साल पहले अफगानिस्तान में ब्रिटिश सेना के साथ काम करने के बाद पूर्व मरीन ने काबुल में ही चैरिटी का काम शुरू क दिया और उन्होंने काबुल में ही 'नाउजाड' चैरिटी शुरू कर दिया। लेकिन, अब जब अफगानिस्तान तालिबान के हाथों में चला गया है, तो वो किसी भी हाल में अफगानिस्तान से बाहर निकलना चाहते थे। सबसे दिलचस्प बात ये थी कि पूर्व ब्रिटिश सैन्य अधिकारी के यहां जो भी अफगानिस्तान के स्थानीय सदस्य काम कर रहे थे, वो भी देश से बाहर निकलने के लिए पात्रता रखते थे, लेकिन उन अफगानों को एयरलिफ्ट नहीं किया गया। वहीं, पॉल ने जानवरों के बिना काबुल छोड़ने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें 200 से ज्यादा कुत्ते-बिल्लियों के साथ देश से बाहर निकाला गया।

काबुल से निकलने के लिए छेड़ी थी मुहिम
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व ब्रिटिश मरीन ने काबुल से बाहर निकलने के लिए मुहिम छेड़ दी थी। वो सोशल मीडिया के अलावा मीडिया में अपनी पहचान का इस्तेमाल कर लगातार मीडिया के द्वारा ब्रिटिश सरकार पर प्रेशर बनाए हुए थे। इसके अलावा सेना में अपनी पहुंच का काफी इस्तेमाल कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में चल रहे ब्रिटिश अभियान, जिसका नाम 'ऑपरेशन आर्क' था, उसपर भी पॉल ने असर डाला था। रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन आर्क में शामिल ब्रिटिश अधिकारियों के साथ पॉल के काफी अच्छे संबंध थे और उन अधिकारियों ने ब्रिटिश सरकार में पॉल के पक्ष में खुलकर पैरवी की थी। जिसके बाद पॉल को उनके कुत्ते- बिल्लियों के साथ युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से बाहर निकाला गया।

ब्रिटेन में हॉट टॉपिक बने थे पॉल
रिपोर्ट के मुताबिक, पॉल को लेकर ब्रिटिश मीडिया में कई न्यूज आ रही थी और एक तरह से ब्रिटेन में पॉल को उनके जानवरों के साथ बाहर निकाला जाए या नहीं, इसको लेकर बहस शुरू हो गई थी। पॉल ने बगैर अपने पालतू जानवरों के काबुल छोड़ने से मना कर दिया था। कई लोग पॉल के पक्ष में थे तो कई लोग पॉल के खिलाफ। लेकिन, अंत में पॉल को उनके पालतू जानवरों के साथ बाहर निकाला गया। वहीं, कई ब्रिटिश सांसदों ने पॉल को उनके कुत्ते-बिल्लियों के साथ बाहर निकालने और स्थानीय कर्मचारियों को वहीं छोड़ देने की निंदा की है। कई ब्रिटिश सांसदों ने कहा कि 'इंसानों को युद्धग्रस्त देश से बाहर निकालने को प्राथमिकता देनी चाहिए'। वहीं, अब ब्रिटिश रक्षा मंत्री बेन वालेस ने भी अब कहा है कि सेना को पशुओं को बजाए, इंसानों को बाहर निकालने पर प्राथमिकता देनी चाहिए।

ब्रिटिश मिशन खत्म
आपको बता दें कि ब्रिटिश रेस्क्यू ऑपरेशन तो अफगानिस्तान में खत्म हो चुका है, लेकिन ब्रिटिश रेस्क्यू मिशन की पिछले दिनों काफी चर्चा की गई है। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद जब लोग अलग अलग फ्लाइट पर लटककर देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे, उस समय इसी पेन फारथिंग की पत्नी एडा को सी-130 परिवहन विमान में अकेले बिठाकर काबुल से बाहर निकाला गया था और उन्हें नॉर्वे छोड़ा गया था। खाली जा रही उस फ्लाइट की तस्वीर काफी वायरल हुई थी और बताया जाता है कि किसी भी अफगान को उस फ्लाइट में बैठने की इजाजत नहीं दी गई थी। आपको बता दें कि ब्रिटेन ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान से करीब 15 हजार ब्रिटिश नागरिकों और क्रिटिकल अफगानों को बाहर निकाला है। लेकिन, अधिकारियों ने कहा है कि सैकड़ों अफगानों को ब्रिटेन ने काबुल में ही छोड़ दिया।












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