मिलिए कराची में जाकर कश्मीर पर पाक का पक्ष लेने वाले सुधींद्र कुलकर्णी से
कराची। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी अपनी किताब 'नाइदर ए हॉक नॉर ए डव,' की लांचिंग के लिए भारत की फाइनेंशियल कैपिटल मुंबई आए थे। उस समय उन्हें बीजेपी के पूर्व नेता और ऑब्जरवर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष सुधींद्र कुलकर्णी ने इनवाइट किया था।

अब कुलकर्णी पाकिस्तान के फाइनेंशियल कैपिटल कराची में हैं। जब कुलकर्णी पर विरोध स्वरूप स्याही फेंकी गई थी तो देश में उनके लिए एक सहानुभूति का वातावरण तैयार हो गया था। अब कुलकर्णी ने कुछ ऐसी बात कर दी है कि यह वातावरण बदल सकता है।
बातचीत की प्रक्रिया की वकालत
कुलकर्णी ने कराची में किताब की लॉचिंग के भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की प्रक्रिया की वकालत की है। कुलकर्णी ने एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में कश्मीर के मूल मुद्दे को सम्मानजनक ढंग से संबोधित किया जाना चाहिए।
मणिशंकर अय्यर से लेते हैं प्रेरणा
विमोचन के मौके पर सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि वह मणिशंकर अय्यर से प्रेरणा पाते हैं। कुलकर्णी के मुताबिक वह भारत-पाक की दोस्ती के लिए बीते तीन दशकों से प्रयासरत हैं।
खुर्शीद ने कहा मुझे मणिशंकर अय्यर से हमेशा प्रेरणा मिली है और मिलती है, जो तीन दशकों से भारत-पाकिस्तान की दोस्ती के लिए लड़ रहे हैं।
उन्होंने भारत में एक मुहावरा प्रचलित किया है, जिसे मैं पूरी तरह मानता हूं। वह कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत निर्बाध और अबाधित रूप से चलनी चाहिए।
कुलकर्णी के मुताबिक दोनों देशों के लोगों को खुले दिमाग के साथ विभाजन के जटिल इतिहास और अतीत को जानने और उसमें हुई गलतियों से सीखने की जरूरत है।












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