EU Election: यूरोपीय संसद चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टियों की लहर, फ्रांस, इटली, जर्मनी में प्रचंड जीत, कैसे?
EU Election 2024: यूरोपीय संघ के संसदीय चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टियों की लहर देखने को मिली है और कई ऐसे यूरोपीय देश हैं, जहां दक्षिणपंथी पार्टियों ने जीत हासिल की है, और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ऑस्ट्रियाई चांसलर कार्ल नेहमर को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ रहा है।
रविवार देर शाम यूरोपीय संसद की 705 सीटों पर चुनाव खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल में 27 सदस्य देशों वाले इस ब्लॉक में दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाला दिखाई दे रहा है, जिसका सबसे बड़ा संकेत ये है, कि फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देशों की मौजूदा सरकार पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं और सत्ता परिवर्तन प्रबल हो गया है।

यूरोपीय संसद के चुनावी नतीजों से सबसे बड़ा संकेत ये है, कि यूरोपी में सत्ता विरोधी लहर काफी तेज हो गई है। एग्जिट पोल से पता चलता है, कि 150 से ज्यादा सीटों पर दक्षिणपंथी पार्टियों का कब्जा होने वाला है, जिससे मुख्यधारा की पार्टियों के लिए बहुमत हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों ने किया संसदीय चुनाव का ऐलान
फ्रांस में, धूर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की 'नेशनल रैली' पार्टी ने राष्ट्रपति मैक्रों की ध्यमार्गी पार्टी रेनेसॉ पार्टी को शिकस्त दे रही हैं, जिसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने अचानक देश में संसदीय चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसे जोखिम भरा कदम माना जा रहा है। ऐसे अनुमान हैं, कि 'नेशनल रैली' पार्टी देश में प्रचंड जीत हासिल कर सकती है और मैक्रों की पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है, जिसका असर उनके राष्ट्रपति कार्यकाल पर पड़ेगा, जो अभी 3 साल बाकी है।
एग्जिट पोल में यूरोपीय संसदीय चुानव में 'नेशनल रैली' को लगभग 33 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है और आने वाली यूरोपीय संसद में उसके 31 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि मैक्रों की पार्टी को सिर्फ 15 प्रतिशत वोट ही मिलने का अनुमान है।

वहीं, फ्रांस में संसदीय चुनाव होने के बाद मरीन ले पेन ने कहा है, कि "हम देश को बदलने के लिए तैयार हैं, फ्रांस के हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं, मास इमिग्रेशन को खत्म करने के लिए तैयार हैं।"
वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने मैक्रों ने हार की गंभीरता को स्वीकार किया है।
उन्होंने एक टेलीविजन संबोधन में कहा है, कि "मैंने आपका संदेश, आपकी चिंताएं सुनी हैं और मैं उन्हें टाल नहीं सकता। फ्रांस को शांति और सद्भाव से काम करने के लिए स्पष्ट बहुमत की जरूरत है।" मैक्रों ने कहा, "अचानक चुनाव बुलाना लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"

जर्मनी में भी दक्षिणपंथी पार्टी का तेज उदय
वहीं, जर्मनी में, दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AFD) पार्टी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो अगले साल होने वाले संघीय चुनाव से पहले पार्टी की मजबूती को दर्शाता है। यूरोसेप्टिक पार्टी को 16 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान है, जो उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हो सकता है और जर्मन चांसलर स्कोल्ज़ के गठबंधन में शामिल तीनों पार्टियों की तुलना में उसके वोट प्रतिशत का हिस्सा ज्यादा है।
वहीं, संघीय स्तर पर विपक्ष में रहने वाले क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन और क्रिश्चियन सोशल यूनियन के कंजर्वेटिव गठबंधन ने लगभग 30 प्रतिशत वोट के साथ एग्जिट पोल में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
रविवार को खत्म हुए यूरोपीय संसद चुनाव में जर्मनी की ग्रीन पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और उसे 8.5 प्रतिशत वोट गंवाने पड़े हैं और सिर्फ 12 प्रतिशत वोटों के साथ उसे संतुष्ट करना पड़ रहा है। माना जा रहा है, कि जर्मनी में अवैध प्रवासी, यूक्रेन को लगातार फंडिंग और कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन कम करने नाकामी को लेकर लोगों में भारी रोष है।
चांसलर शोल्ज़ की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) और गठबंधन के तीसरे सहयोगी, प्रो-बिजनेस फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी (एफडीपी) को क्रमशः 14 प्रतिशत और 5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जो पिछले चुनाव में 15.8 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत से कम है। एएफडी का मजबूत प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है, जब जर्मनी में राजनीतिक पार्टियों के बीच उथल-पुथस मचा हुआ है, जिसमें नई लोकलुभावन पार्टियां, मुख्यधारा की पार्टियों के पतन के बाद छोड़े गए खाली स्थान को भरने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
जर्मन पॉलिटिकल कमेंटेटर्स का कहना है, कि इस बदलाव से स्थापित पार्टियों के लिए व्यवहार्य गठबंधन बनाना बहुत मुश्किल हो गया है और इससे राजनीतिक माहौल खराब हो गया है। इस अभियान पर राजनेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा में इजाफे का असर पड़ा है।
AfD की नेता एलिस वीडेल ने रविवार को कहा, कि "हमने अच्छा प्रदर्शन किया है, क्योंकि लोग ज्यादा यूरोपीय विरोधी हो गए हैं।" उन्होंने कहा, "लोग ब्रुसेल्स की नौकरशाही से परेशान हैं।"
ऑस्ट्रिया में दक्षिणपंथी पार्टी का जलवा
ऑस्ट्रिया में, हार्डकोर दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी को करीब 26 प्रतिशत वोट मिले हैं, और वो पहली बार किसी राष्ट्रव्यापी मतदान में सर्वोच्च स्थान पर रही। सत्तारूढ़ रूढ़िवादी पीपुल्स पार्टी (OeVP) को 24.7 प्रतिशत वोट मिले हैं और उसके बाद सोशल डेमोक्रेट्स को 23.2 प्रतिशत और ग्रीन्स को 10.7 प्रतिशत वोट मिले हैं।
चांसलर नेहमर ने चुनावी नतीजों को देखने के बाद शरद ऋतु में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले मतदाताओं की चिंताओं को दूर करने का वादा किया हैं, जिसमें अवैध आव्रजन पर नकेल कसना भी शामिल है। ऑस्ट्रिया भी अवैध अप्रवासियों से परेशान है और देश में लगातार मांग की जा रही है, कि जो लोग अवैध तरीके से देश में घुसे हैं, उन्हें बाहर निकाला जाए।

इटली में जॉर्जिया मेलोनी और मजबूत
इस बीच, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की स्थिति और भी ज्यादा मजबूत हो गई है और उनकी दक्षिणपंथी लोकलुभावन पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' ने संसद में अपनी सीटों को दोगुना से ज्यादा कर लिया है।
वहीं, नीदरलैंड में भी हार्डकोर दक्षिणपंथी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया, जहां गीर्ट वाइल्डर्स की आव्रजन विरोधी पार्टी फॉर फ्रीडम को छह सीटें मिलने का अनुमान है, जो केंद्र-वाम और ग्रीन पार्टियों की तरफ से हासिल किए गये सीटों से सिर्फ 2 सीटें कम हैं। नीदरलैंड में पिछले कुछ सालों से एंटी-मुस्लिम रवैया काफी बढ़ा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह आतंकी गतिविधियां हैं। देश से घुसपैठियों को निकालने की मांग की जा रही है।
हंगरी में प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की राष्ट्रवादी पार्टी फाइड्ज ने सबसे ज्यादा मत हासिल किए हैं। लेकिन 2019 के चुनावों के मुकाबले उनकी पार्टी की जनता पर पकड़ थोड़ी कमजोर हुई है। फाइड्ज़ को 44 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि लगभग 90 प्रतिशत वोटों की गिनती की गई। पिछली बार उसे 52 प्रतिशत वोट मिले थे। फिर भी, रविवार रात पार्टी के एक कार्यक्रम में समर्थकों को संबोधित करते हुए ओरबान ने जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा, "आज हमने पुराने विपक्ष और नए विपक्ष को हराया है, और अगली बार विपक्ष को चाहे जो भी नाम दिया जाए, हम उन्हें बार-बार हराएंगे।" ओरबान के मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पीटर मग्यार की टिस्ज़ा पार्टी को लगभग 30 प्रतिशत वोट मिले हैं।

यूरोपीय संसद में दक्षिणपंथी पार्टियों की पकड़ मजबूत
कुल मिलाकर, मुख्यधारा और यूरोप समर्थक समूह प्रमुख ताकत तो अभी भी बने हुए हैं, लेकिन सेंटर-दक्षिणपंथी पार्टियों की पकड़ और मजबूत हुई है, जो साफ तौर पर संकेत देता है, कि अगर घुसपैठियों के लेकर कदम नहीं उठाए गये, तो अगले कुछ सालों में पूरे यूरोप में सिर्फ दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाला है। चुनावी नतीजे बताते हैं, कि अवैध प्रवासियों की वजह से जनता में भारी नाराजगी है और वो अब असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
फिलहाल, यूरोपीय संसद में यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (ईपीपी) 189 सांसदों के साथ सबसे बड़ा समूह बनने की राह पर है और इसे स्पेन और पोलैंड में केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टियों की जीत से फायदा हुआ है।
वहीं, लेफ्ट प्रोग्रेसिव अलायंस ऑफ सोशलिस्ट्स एंड डेमोक्रेट्स और लिबरल रिन्यू यूरोप को क्रमशः 135 और 83 सीटें मिलने का अनुमान है। यूरोपियन कंजर्वेटिव्स एंड रिफॉर्मिस्ट्स ग्रुप, जिसमें ब्रदर्स ऑफ इटली शामिल है, उसे 72 सीटें मिलने का अनुमान है, उसके बाद दक्षिणपंथी पार्टी आइडेंटिटी एंड डेमोक्रेसी को 58 सीटें मिलने का अनुमान है।
यूरोपीय आयोग की ईपीपी अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है, कि नतीजों से पता चलता है कि "सेंटर पार्टियों की स्थिति मजबूत है।"
आपको बता दें, कि यूरोपीय संसद में 27 देश शामिल हैं और कल इसके मतदान खत्म होने के बाद अब वोटों की गिनती होगी। वहीं, मतदान खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल के नतीजों की बड़ी बातें ये हैं, कि यूरोपीय संसद में अभी भी सबसे बड़ा ग्रुप केन्द्रीय विचारधारा वाली पार्टियां ही बनाएंगी, लेकिन दक्षिणपंथी पार्टियां रिकॉर्ड नंबर में सीटें हासिल करने जा रही हैं, लिहाजा यूरोपीय संसद को आने वाले समय में मुस्लिम शरणार्थियों को लेकर कड़े कदम उठाने होंगे।
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