टेस्ला फैक्ट्री स्थापित करने के लिए एलन मस्क को 3 वर्षों से मना रहा ये मुस्लिम देश, चीन से क्या है कनेक्शन?
हाल में ही ऐसी रिपोर्टें आई थीं जिसमें कहा गया था कि दुनिया के सबसे बड़े धन्नासेठ एलन मस्क अपनी कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मलेशिया में ले जा रहे हैं, इंडोनेशिया के समुद्री मामलों और निवेश समन्वय मंत्री लुहुत पंजैतन ने दावा किया इसे लेकर वो अभी भी आशावादी बने हुए हैं।
पंजैतन को उम्मीद है कि टेस्ला इंडोनेशिया ही आएगी। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है, मस्क और इंडोनेशियाई अधिकारियों ने 3 अगस्त को सैन फ्रांसिस्को में एक शांत, 2.5 घंटे लंबी बैठक की।

अपने तय समय से दोगुने वक्त तक चली इस बैठक के बाद कहा जा रहा है कि एलन मस्क साल के अंत तक इंडोनेशिया स्थित टेस्ला संयंत्र के बारे में अंतिम निर्णय लेने के लिए सहमत हो सकते हैं।
हालांकि इस बार हुई बैठक के बारे में पंजैतन और उनकी टीम ने कुछ भी खुलासा करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले इंडोनेशियाई अधिकारियों ने कथित तौर पर देश के लिए टेस्ला की योजनाओं के बारे में समय से पहले बयान दे दिया था जिससे एलन मस्क बुरी तरह नाराज हो गए थे।
सूत्र ने यह भी दावा किया है कि टेस्ला और इंडोनेशियाई अधिकारियों ने अपनी बैठक के दौरान कम से कम 1 बिलियन डॉलर के ईवी उत्पादन-संबंधित निवेश पर चर्चा की है। हालांकि, निवेश इस बात पर निर्भर हो सकता है कि इंडोनेशिया टेस्ला को कुछ रियायतें दे सकता है या नहीं।
सूत्र ने मस्क का जिक्र करते हुए एशिया टाइम्स को बताया, "समस्या हमारे न्यायालय में है क्योंकि हमने उन्हें वह करने की अनुमति नहीं दी है जो वह चाहते है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर किसी को पता होना चाहिए कि उसे इस डील से क्या मिलेगा।"
सूत्र ने कहा कि टेस्ला को मिलने वाली किसी भी रियायत के लिए राष्ट्रपति की सहमति लेनी होगी। यह पहली बार नहीं होगा जब इंडोनेशिया में ऐसी स्थिति बनेगी। तीन दशक पहले खनन दिग्गज फ्रीपोर्ट मैकमोरन कॉपर एंड गोल्ड के अभूतपूर्व अनुबंध के दौरान ऐसा हुआ था।
मस्क को इतनी रियायत क्यों?
इंडोनेशिया पूरी दुनिया में निकेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जो बैटरी में इस्तेमाल होने वाली सबसे प्रमुख मेटल होता है। दिलचस्प बात ये है कि इंडोनेशिया में मिलने वाले निकेल पर चीनी इंडस्ट्री का कब्जा है।
इंडोनेशिया सरकार इस वर्चस्व को तोड़ना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि इंडोनेशिया न सिर्फ एक विश्वसनीय ईवी अग्रणी के रूप में, बल्कि चीन से दूर निवेश को संतुलित करने के लिए भी मस्क को अपने यहां लाना चाहता है।
यही वजह है कि इंडोनेशिया पिछले तीन सालों से एलन मस्क को लुभाने की कोशिश कर रहा है। ऐसा माना जाता है कि एलन मस्क बहुत पहले ही इंडोनेशिया का रुख कर सकते थे लेकिन वहां इस इस्लामिक देश की कई अराजक नियमों की वजह से अतिरिक्त सतर्क हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले भारत सरकार के आमंत्रण के बाद एलन मस्क भारत में अपना प्लांट लगाने पर विचार कर रहे थे लेकिन सरकार ने टेस्ला को साफतौर पर कहा था कि सबसे पहले वो देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की पहले मैन्युफैकचरिंग शुरू करे फिर सरकार टैक्स घटाने के बारे में विचार करेगी। आपको बता दें इंपोर्टेड इलेक्ट्रिक व्हीकल पर 100 फीसदी तक टैक्स देना होता है जिसे टेस्ला सरकार से घटाने की मांग कर रही थी।












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