इंसानों को विलुप्त होने से बचाने की कोशिश, Elon Musk की कंपनी ने एलियंस के नाम भेजा DNA
एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी ने लोगों के लिए 'पृथ्वी से जीवन' के समय कैप्सूल में अपना डीएनए भेजने के लिए ऑफर निकाला है, जिससे चंद्रमा पर आपको डीएनए पहुंचा दिया जाएगा। इसके लिए आपको मामूली भुगतान करना होगा।
वॉशिंगटन, अप्रैल 30: दुनिया के सबसे अमीर और क्रिएटिव कारोबारी, जो बार बार इंसानों को दूसरे ग्रहों पर बसाने और मानवता की रक्षा की बात करते हैं, उन्होंने इंसानों का डीएनए एलियंस को भेजा है, ताकि एलियंस इंसानों के डीएनए का क्लोन बना सके और मानव जाति को विलुप्त होने से बचाया जा सके।

स्पेस में भेजा गया इंसानों का डीएनए
एलन मस्क की कंपनी एस्पेसएक्स, जो अंतरिक्ष की दुनिया में नये नये खोज करत है, वो इंसानों के डीएनए से भरा एक बॉक्स लेकर अंतरिक्ष की तरफ बढ़ रहा है, ताकि अगर धरती पर इंसानो की आबादी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाए, तो भविष्य में एलियंस इंसानों को विलुप्त होने से बचा सके और इंसानों को वापस धरती पर ला सके। ट्वीटर खरीदकर तहलका मचा देने वाले एलन मस्क की इस कोशिश ने भी वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है और लोगों के मन में ही एक ही सवाल है, कि क्या एलियंस मौजूद हैं और एलन मस्क ने जो डीएनएन का बॉक्स भेजा है, वो भला एलियंस को कैसे मिलेगा?

500 प्रजातियों का डीएनए भेजा
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इसी हफ्ते धरती पर मौजूद 500 से ज्यादा प्रजातियों के डीएनए से भरा एक 'टाइम कैप्सूल' लेकर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा है। क्रू-4 मिशन के तथाकथित 'बायोबैंक' में 2,000 से अधिक अलग अलग तरह के इंसानों के नमूने भरे हुए हैं और इसका उद्देश्य चंद्रमा पर डीएनए नमूनों का एक ऑफ-वर्ल्ड रिजर्व शुरू करने में मदद करना है। अपनी इस कोशिश के जरिए एलन मस्क की कंपनी भविष्य में इंसानों की जीवन को सुरक्षित रखने की कोशिश, पृथ्वी पर इंसानों की प्रजातियो के आनुवंशिक ब्लूप्रिंट को संरक्षित करना चाहती है और इसे पृथ्वी के बाहर भेजकर सुरक्षित रखना चाहती है।
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चंद्रमा पर डीएनए भेजने का लक्ष्य
लाइफशिप का कहना है कि, इस वक्त इंसानों के डीएनएन को इंटरनेशनल अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भेजा गया है, लेकिन उसका मिशन एक 'प्रदर्शन मिशन' है, जिसमें कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य 2023 में चंद्रमा पर मानव डीएनए भेजना है। अपनी वेबसाइट पर, स्पेसएक्स कंपनी की तरफ से कहा गया है कि, उसे नहीं पता कि बायोबैंक का क्या होगा। कंपनी की तरफ से यह समझाते हुए कहा गया है कि, "क्योंकि आनुवंशिक टाइम कैप्सूल दूर के भविष्य के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इस वक्त धरती पर मौजूद लोग यकीनन नहीं जान पाएंगे, कि इस डीएनएन का क्या हुआ है और क्या इस्तेमाल किया जाएगा'। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि, ‘शायद एक भविष्य की सभ्यता द्वारा इसे खोजा जाएगा और हमारे ग्रह को फिर से बनाने और इसपर इंसानों को फिर से बसाने के लिए इसरा इस्तेमाल किया जाएगा, जैसा कि आज है।

पृथ्वी पर जीवन बचाने की कोशिश
कंपनी की तरफ से बयान में कहा गया है कि, भविष्य में हमारे बाद आने वाली पीढ़ियां एक नई दुनिया की बीज को शायद सितारों तक ले जा सकते हैं। कंपनी ने कहा कि, हालांकि, ये बातें फिलहाल सिर्फ सैद्धांतिक हैं और हम मानते हैं कि, यह पीढ़ियों के लिए पृथ्वी पर जीवन के हमारे आनुवंशिक ब्लूप्रिंट को बचाने के लायक है।"

आप भी भेज सकते हैं डीएनए
आपको बता दें कि, एलन मस्क की कंपनी जनता को मून बैंक में अपना डीएनए भेजने के लिए आमंत्रित कर रही है। आप चंद्रमा पर अपना नाम मुफ्त में भेज सकते हैं या अपना डीएनए चंद्रमा की सतह पर भेजने के लिए 100 पाउंड का भुगतान कर सकते हैं। लाइफशिप प्रोजेक्ट, ग्लोबल सीड वॉल्ट प्रोजेक्ट से काफी मिलता-जुलता है, जिसके तहत भविष्य में पौधों को विलुप्त होने की स्थिति में, पौधों को धरती पर फिर से उगाने के लिए, उन्हें धरती पर फिर से विकसित करने के लिए एक स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत स्पेशल तिजोरी में करीब 45 लाख अलग अलग पौधों की बीज को संरक्षित करके रखा गया है। जिसका उद्येश्य यह है, कि अगर भविष्य में पर्यावरण असंतुलन या किसी और वजह से पौधे विलुप्त होने लगे, तो उन्हें धरती पर फिर से उगाया जा सके।

मार्स पर जीवन बसाना चाहते हैं मस्क
आपको बता दें कि, एलन मस्क मंगल ग्रह पर भी जीवन बसाना चाहते हैं और उन्होंने अपने मंगल ग्रह के प्लान के बारे में काफी पहले खुलासा कर दिया है, जिसमें एलन मस्क ने यह भी बताया था कि, मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती कैसी होगी और किस तरह से मंगल ग्रह पर इंसान अपनी नई जिंदगी की शुरूआ करेंगे। लेकिन, मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन बसाना इतना आसान नहीं हो और अभी तक मंगल ग्रह को लेकर जो भी वैज्ञानिक रिसर्च किए गये हैं, उसमें यही पाया गया है कि, मंगल पर ऐसा वातावरण नहीं है, कि वहां पर इंसानों को बसाया जा सके। लेकिन, एलन मस्क का कहना है कि, वो मंगल ग्रह पर इस तरह की परिस्थितियों का निर्माण करेंगे, जिससे मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन बसाया जा सके।

कैसे बदला जाएगा मार्स का वातावरण?
एलन मस्क की योजना साल 2050 तक मंगल पर पहली बस्ती बसाने की है। एलन मस्क ने बताया था कि, वह तापमान बढ़ाने के लिए मंगल के एक हिस्से पर भारी ताकत के कई परमाणु विस्फोट करेंगे। विस्फोट से कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलेगी, जिसके चलते मंगल ग्रह के तापमान में बढ़ोतरी होगी। ऐसा होने से ग्रीन हाउस गैसों को प्रभाव बढ़ेगा और धीरे-धीरे इंसानों के रहने लायक एक कृत्रिम वातावरण तैयार हो जाएगा। हालांकि ये करना इतना आसान भी नहीं होगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल के तापमान में परिवर्तन के लिए वहां पर 10 हजार परमाणु बम गिराने होंगे, जिन्हें वहां तक पहुंचाने के लिए आधुनिकतम मिसाइलों की जरूरत होगी। इसके साथ ही परमाणु बम के बाद वहां विकिरण का खतरा भी बना रहेगा।












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