एक ऐसा जासूस जो 17 गर्ल फ्रैंड्स के जरिये करता था जासूसी, नाखून उखाड़कर दे दी गई थी फांसी
नई दिल्ली। इजरायल में पांच महीने के अंदर दो बार चुनाव हुए लेकिन इसके बाद भी किसी दल को बहुमत नहीं मिला। एक बार फिर मिलीजुली सरकार की परिस्थितियां तैयार हो रही हैं। इजरायल में संविद सरकारों का चलन रहा है। इजरायल में भले मिलीजुली सरकारें बनती हैं लेकिन देश की सैन्य ताकत और सुरक्षा में रत्ती भर भी फर्क नहीं आता। दक्षिणपंथी दल हों या मध्यमार्गी दल, सबके लिए देश का वजूद ही उनका बेसिक एजेंडा है। इजरायल की ताकत का आधार हैं उसके जांबाज जासूस और मल्टी टैलैंटेड वैज्ञानिक। पोलिटिशियन जरूर देश चलाते हैं लेकिन इजरायल को इंटरनेशनल पावर बनाने का श्रेय उसके दिलेर जासूसों को हैं। इजरायल की जासूसी संस्था मोसाद को दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता है। अरब देश उसकी कारगुजारियों से बहुत खौफ खाते हैं। एली कोहेन को इजरायल का जेम्स बॉन्ड माना जाता है। कोहेन की वजह से ही इजरायल ने 1967 के युद्ध में पांच अरब देशों को केवल छह दिन में हरा दिया था। नेटफ्लिक्स के एक वेबसीरीज- द स्पाई की वजह से कोहेन का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है।

कौन हैं एली कोहेन ?
इजरायल दुनिया का एकमात्र यहूदी राष्ट्र है। 1948 में यह अस्तित्व में आया। 16 से अधिक अरब देशों के बीच यह एकलौता यहूदी देश है। इस्लामिक देशों के बीच इजरायल इस तरह बसा है जैसे 32 दांतों के बीच जीभ। देश की सुरक्षा ही उसका सबसे बड़ा मुद्दा है। अरब देश इजरायल को देखना नहीं चाहते। कई बार हमला भी कर चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी है। इजरायल को विजेता बनाने में मोसाद की बड़ी भूमिका रही है। इजरायल की आबादी करीब 90 लाख है। यानी यह देश दिल्ली शहर से भी छोटा है। कहें तो इजरायल की आबादी करीब उतनी ही है जितनी कि बंगलुरू की। लेकिन ताकत के मामले में इजरायल का कोई जवाब नहीं। मोसाद के जासूसों ने ऐसे ऐसे कारनामों को अंजाम दिया है जिसे नामुमकिन माना जाता रहा था। मोसाद का खौफ न केवल अरब देशों में बल्कि पूरी दुनिया में है।एली कोहेन इजरायल के सबसे खतरनाक जासूस थे। उनका जन्म मिस्र के एक यहूदी परिवार में हुआ था। कई कठिन परीक्षाओं से गुजरने के बाद मोसाद में उनकी भर्ती हुई। फिर तेलअबीब में कड़ी निगरानी के बीच उनको ट्रेनिंग दी गयी। ट्रेनिंग के बाद कोहेन को एक इंश्योरेंस कंपनी में क्लर्क के रूप में तैनात कर दिया गया ताकि उनकी पहचान छिपी रहे। उन्होंने कुछ दिनों तक क्लर्क के रूप में काम किया ताकि किसी को उनके जासूस होने की भनक न लगे। फिर उन्हें सीरिया के अहम मिशन के लिए तैयार किया गया। इजरायल को पड़ेसी देश सीरिया से खतरे का अंदेशा था।

1961 में सीरिया गये कोहेन
एली कोहेन 1961 में सीरिया पहुंचे। वहां खुद को एक सफल कारोबारी के रूप में स्थापित किया गया। कोहेन सीरिया में कामेल अमीन थाबेट के नाम से रहने लगे। सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचने के लिए कोहेन ने अर्जेंटिना की राजधानी ब्यूनस आर्यस को अपना अड्डा बनाया था। वहां रहने के लिए फ्लैट लिया था। सीरिया के राजदूत से वहीं मेलजोल बढ़ाया। फिर वे दमिश्क में रहने के लिए अपने सम्पर्क सूत्रों की खोजने लगे । आखिरकार वे सीरिया में एक व्यवसायी के रूप में स्थापित हुए। उन्होंने खुद को रक्षा मंत्रालय के लिए फर्नीचरों का खरीदार बताया। कोहेन जब दमिश्क में रहने लगे तो लोग उन्हें अर्जेंटिना से आया हुआ व्यापारी समझते थे। वे लोगों से घुलने मिलने के लिए दमिश्क के एक कैफे में बैठने लगे। वे स्थानीय लोगों पर दिल खोल कर पैसा करते ताकि लोग उन्हें धनी कारोबारी समझें। यहीं कोहेन की कई सैन्य अधिकारियों से जान पहचान हुई।

कोहेन की 17 गर्ल फ्रैंड
कोहेन के बारे में मशहूर था कि उनकी 17 गर्ल फ्रैंड उन जान छिड़कती थीं। कोहेन सीरिया के सैन्य अधिकारियों के लिए शराब और शबाब की खर्चीली पार्टियां आयोजित करते थे। जो अधिकारी प्रलोभन से नहीं मानता था उसे हनी ट्रैप से काबू में किया जाता था। कोहेन की 17 सुंदरियां सीरिया के सैन्य अधिकारियों को शिकार बना कर गुप्त सूचनाएं हासिल कर लेती थीं। कोहेन की छवि इंग्लैंड के जासूस जेम्स बॉन्ड की तरह थी। वह औरतों से घिरा रहने वाला जासूस था। जेम्स बॉन्ड तो इयान फ्लेमिंग के उपन्यास का काल्पनिक पात्र है लेकिन कोहेन वास्तविक जीवन में डैसिंग डिटेक्टिव थे। एक-दो साल में कोहेन ने सीरिया के कई सैन्य अधिकारियों को करीबी दोस्त बना लिया था। इन सैन्य अधिकारियों को कोहेन ने समझाया कि अगर गोलान हाइट्स के आर्मी बेस के पास यूकेलिप्टस के पेड़ लगा दिया जाएं तो उनका सबसे बड़ा सैन्य अड्डा सुरक्षित हो जाएगा। गोलान हाइट्स की पहाडियों पर इजरायल और सीरिया की सीमा मिलती है। सीरिया के सैन्य अधिकारी कोहेन की बातों में आ गये। पेड़ लगाने के लिए कोहेन ने पैसा दिया। इस दौरान कोहेन को सीरिया के सबसे बड़े सैनिक अड्डे को नजदीक से समझने का मौका मिला। फिर तो कोहेन ने सीरिया और अरब देशों से जुड़ी कई सेक्रेट फाइलें हासिल कर इजरायल तक पहुंचायी। कोहेन ने इन पेड़ों को इस तरह लगवाया था ताकि भविष्य में इजरायली सेना यहां से सीरिया के अंडरग्राउंड आर्मी कैंप पर आसानी से हमला कर सकें।

कोहेन की वजह से 1967 में जीता था इजरायल
कोहेन ने चार साल तक सीरिया में बेधड़क जासूसी की। सीरिया के सैन्य अधिकारी कोहेन पर इतना भरोसा करने लगे थे कि उन्हें रक्षा मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी देने की पेशकश कर दी थी। लेकिन एली कोहेन ने इंकार कर दिया था। चार साल के दौरान कोहेन ने सीरियाई डिफेंस से जुड़ी इतनी अहम सूचनाएं दी थी कि इजरायल सामरिक रूप से मजबूत होता गया। 1967 में जब मिस्र, सीरिया, जोर्डन समेत पांच अरब देशों ने इजरायल पर हमला किया तो कोहेन की दी हुई सूचनाएं काम आयीं। मिस्र और सीरिया से समर्थन में इराक, कुवैत और यमन भी कूद पड़े थे। लेकिन इजरायल ने सभी अरब देशों के दांत खट्टे कर दिये। इजरायल ने सीरिया के गोलान हाइट्स इलाके में बड़े भूभाग को जीत लिया था। कोहेन ने यूकेलिप्टस के जो पेड़ लगाये थे वो इजरायली के सैनिकों के बहुत मददगार साबित हुए थे। मिस्र के भी बहुत बड़े भाग पर इजरायल का कब्जा हो गया था। छह दिन में ही इजरायल ने अरबों के खिलाफ यह युद्ध जीत लिया था। इस जीत के बाद इजरायल की गिनती दुनिया के ताकतवर देशों में होने लगी थी।

कोहेन को फांसी
1965 में सीरिया के इंटेलिजेंस एजेंसियों को महसूस होने लगा कि कोई भेदिया उनके देश की गुप्त सुचनाएं चुरा रहा है। सीरिया ने इस भेदिये को पकड़ने के लिए तत्कालीन सोवियत संघ (अब रूस) की जासूसी संस्था केजीबी से मदद मांगी। केजीबी ने सीरिया और मध्य पूर्व के देशों के रेडियो सिग्नल को पकड़ने के लिए एक विशेष उपकरण लगाया। सीरिया से बाहर जाने वाली सभी बातचीत पर नजर रखी जाने लगी। एक दिन सूचना मिली की कोहेन के घर से सामरिक महत्व का जानकारी इजरायल भेजी जा रही है। कोहेन को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। उनके घर से सेक्रेट ट्रांसमिशन के उपकरण पकड़े गये। कोहेन को बहुत यातना दी गयी। उनके नाखून उखाड़ लिये गये। फिर 18 मई 1965 को दमिश्क के चौराहे पर उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। फांसी देते वक्त उनके शरीर को यहूदी विरोधी नारों से भर दिया गया था। अब यही एली कोहेन इजरायल के नेशनल हीरो हैं।
फोटो साभार:elicohen.org
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