चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा नया डेटा किया जारी, 2019 से पहले की भी है जानकारी
चुनाव आयोग ने चुनावी बांड पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से डिजीटल रूप में प्राप्त डेटा को आज अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। नए डेटा में फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के बॉन्ड्स की जानकारी भी शामिल है।
12 अप्रैल 2019 की तारीख के बाद के चुनावी बांड विवरण पिछले सप्ताह चुनाव पैनल द्वारा सार्वजनिक किए गए थे। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल, 2019 के अंतरिम आदेश के निर्देशानुसार, सीलबंद कवर में चुनावी बांड का डेटा दाखिल किया था।

चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा, "राजनीतिक दलों से प्राप्त डेटा सीलबंद लिफाफे को खोले बिना सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया था। 15 मार्च, 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सीलबंद कवर में एक पेन ड्राइव में डिजिटल रिकॉर्ड के साथ physical copies वापस कर दी।'
सुप्रीम कोर्ट के 15 मार्च, 2024 के आदेश के अनुसार, वो सीलबंद डाटा भी सार्वजनिक करना था। पीठ ने रजिस्ट्री से उस डाटा की स्कैन नकल सुरक्षित रख मूल आंकड़े की प्रति आयोग को लौटा देने का आदेश दिया। चुनाव आयोग ने चुनावी बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से डिजीटल रूप में प्राप्त डेटा को आज अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इसे इस यूआरएल https://www.eci.gov.in/candidate-politicparty पर एक्सेस किया जा सकता है।
इससे पहले आयोग ने 14 मार्च को अपनी वेबसाइट पर 763 पेज की दो लिस्ट अपलोड की थी। इसमें अप्रैल 2019 के बाद खरीदी या कैश की गई बॉन्ड की जानकारी थी। एक लिस्ट में बॉन्ड खरीदने वालों की जानकारी, जबकि दूसरी में राजनीतिक दलों को मिले बॉन्ड की डिटेल है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 14 मार्च को ही चुनाव आयोग को बॉन्ड से जुड़ी जानकारी दी थी। इसमें यूनीक अल्फा न्यूमेरिक नंबर्स का खुलासा नहीं था। इससे यह पता नहीं चल सका कि किसने किसे कितना चंदा दिया है। इसे लेकर कोर्ट ने 15 मार्च को SBI को नोटिस जारी किया और 18 मार्च तक जवाब मांगा।












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