Republic Day 2023: गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे मिस्र के राष्ट्रपति, भारत ने दिया न्यौता

भारत ने गणतंत्र दिवस 2023 के मौके पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी को बुलाने का फैसला किया।

भारत ने 2023 में गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि के रूप में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को आमंत्रित किया है। भारत का यह कदम मिस्र के साथ राजनीतिक और सैन्य संबंधों को मजबूती प्रदान करने में मददगार साबित होगा। इसके साथ ही भारत की इस प्रमुख अफ्रीकी देश तक पहुंच और मजबूत होगी। दो साल बाद किसी विदेशी देश के मुख्य अतिथि इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। कोरोना के कारण यह परंपरा दो सालों तक बंद थी। इससे पहले आखिरी बार ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियस बोलसोनारो साल 2020 में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर भारत आए थे।

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Image: Twitter

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 16 अक्टूबर को मिस्र की आधिकारिक यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर पहुंचे थे। संभवतः इसी वक्त मिस्र के राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि बनने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया था। जानकारों की मानें तो राष्ट्रपति सिसी को गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल कारपेट बिछाने का मतलब है, आने वाले समय में दिल्ली-काहिरा संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बता दें कि इस साल भारत-मिस्र देशों ने राजनयिक संबंधों की अपनी 75वीं वर्षगांठ भी मनाई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस साल मिस्र का दौरा कर चुके हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस साल सितंबर में मिस्र का दौरा किया था। इस दौरान सैन्य क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच भागीदारी और साझेदारी को लेकर करार हुए थे।

मिस्र भारत का आठवां बड़ा भागीदार

मिस्र भारत के लिए अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बीच एक कड़ी के रूप में एक रणनीतिक स्थिति रखता है। मिस्र परंपरागत रूप से अफ्रीका में भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों में से भी एक रहा है। साल 2020-21 में मिस्र, भारत का आठवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। रक्षा और सुरक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में भारत और मिस्र संबंधों के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक मिस्र भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के करीब 70 जेट लड़ाकू विमान हासिल करने में दिलचस्पी दिखा रहा है। अक्टूबर 2021 में दोनों देशों के बीच पहला वायुसेना अभ्यास हुआ था। बता दें कि 1960 के दशक में दोनों देश मिलकर लड़ाकू विमानों का उत्पादन कर चुके हैं। 1960 के दशक से लेकर 1984 तक भारतीय वायुसेना के पायलट मिस्र के पायलटों को ट्रेनिंग भी दे चुके हैं।

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