PM Modi in Egypt: मिस्र में शहीद हुए थे हरियाणा के बदलू सिंह, मोदी हेलियोपोलिस जा कर करेंगे नमन
भारत के महान सपूतों ने मानवता की सुरक्षा और सेवा के लिए दुनियाभर में बलिदान दिये हैं। आज अपने पूर्वजों पर गर्व होता है कि उन्होंने मिस्र और फिलिस्तीन की रक्षा के लिए भी अपने प्राणों की आहूति दी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए मिस्र के हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक जाएंगे। इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त करने वाले एक प्रमुख सैनिक थे बदलू सिंह। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें वीरता के लिए विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया था। वे हरियाणा के झज्जर जिले के ढाकला गांव के रहने वाले थे।
मिस्र कैसे पहुंचे भारत के जवान ?
प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की (ऑटोमन साम्राज्य) ने ब्रिटेन और उसके मित्र देशों के खिलाफ युद्ध लड़ा था। ब्रिटेन ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण तुर्की के गैलीपोली जलसंधि पर कब्जा करने की योजना बनायी। ब्रिटिश इंडियन आर्मी इस योजना में सफल रही। गैलीपोली पर कब्जा कायम रखने के लिए ब्रिटेन ने मिस्र में करीब 50 हजार सैनिक तैनात रखे थे। उसे डर था कि तुर्की स्वेज नहर से लेकर फिलिस्तीन तक आक्रमण कर सकता है। ये डर सच साबित हुआ। 1915 में जर्मनी के नेतृत्व में तुर्की सेना ने मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप पर हमला कर दिया। सिनाई प्रायद्वीप उस समय ब्रिटेन के अधिकार में था। मिस्र में पहले से ब्रिटिश इंडियन आर्मी तैनात थी।

मिस्र में शहीद हुए थे भारत के 1700 जवान
सिनाई और फिलिस्तीन अभियान के दौरान दोनों पक्षों में भयंकर युद्ध हुआ। ब्रिटिश इंडियन आर्मी के करीब 1700 हजार जवान मारे गये थे। इन शहीद सैनिकों की स्मृति में मिस्र के तौफीक बंदरगाह (स्वेज बंदरगाह) पर एक युद्ध स्मारक बनाया गया था। 1926 में इसका अनावरण किया गया था। लेकिन 1967 के इजरायल-मिस्र युद्ध में यह स्मारक पूरी तरह से बर्बाद हो गया । तब मिस्र की राजधानी काहिरा के हेलियोपोलिस जिले में इसे पुनर्स्थापित किया गया। हेलियोपोलिस में नया युद्धस्मारक चार हजार शहीदों की स्मृति में बना है। यहां उन 1700 शहीद सैनिकों को भी याद किया गया है जो जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में अपनी कुर्बानी दी। इन चार हजार सैनिकों में से 3727 सैनिक भारतीय हैं।
अमर शहीद बदलू सिंह
प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान मिस्र और जॉर्डन की सीमा पर ब्रिटिश इंडियन आर्मी के जवान तैनात थे। हरियाणा के झज्जर के रहने वाले बदलू सिंह ब्रिटिश सेना की 14वीं मुरे जाट लांसर्स में रिसालदार थे। (रिसालदार का अर्थ है- घुड़सवार सैनियों का नायक) यह एक घुड़सवार टुकड़ी थी। पहले महायुद्ध के दौरान वे भी मिस्र-जॉर्डन की सीमा पर तैनात थे। जर्मनी के सहयोग से तुर्की की सेना लगातार हमले कर रही थी। लड़ाई जॉर्डन नदी के पश्चिमी तट तक पहुंच गयी थी। बदलू सिंह की पलटन के कई सैनिक मारे जा चुके थे। 23 सितम्बर 1918 की सुबह बदलू सिंह ने देखा कि एक छोटी पहाड़ी की बाएं छोर पर तुर्की के करीब 200 सैनिक ने कब्जा जमा लिया है और मशीनगन से गोलियां बरसा रहे हैं।
तलवार लेकर भिड़ गये मशीनगन वाले सैनिक से
बदलू सिंह ने छह सहयोगियों को साथ लिया और जान की परवाह किये बिना पहाड़ी पर हमला बोल दिया। वे और उनके साथी सिर्फ तलवार से लैस थे। तुर्की के सैनिक ऊंचाई पर थे इसलिए उन्हें किसी हमले की उम्मीद नहीं थी। बदलू सिंह के अचानक आक्रमण
से तुर्की के सैनिकों की स्थिति कमजोर हो गयी। बदलू सिंह अकेले पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गये और वहां जो सैनिक मशीनगन से गोलियां चला रहा था उसे भी दबोच लिया। मशीनगन की छीनाझपटी में वे गंभीर रूप से घायल हो गये। घायल हो कर भी उन्होंने अपनी सैन्य टुकड़ी के जवानों की जान बचा ली क्यों कि मशीनगन कब्जे में आ चुका था। पहाड़ी पर तुर्की का प्रभाव खत्म हो गया और गोलीबारी रुक गयी।
प्राण की आहूति देकर दिलायी जीत
गंभीर रूप से घायल बदलू सिंह ज्यादा देर जीवित नहीं रहे। वहीं वीरगति को प्राप्त हुए। लेकिन उन्होंने जान देकर भी अपनी पलटन को जीत दिला दी। तुर्की की सेना ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सामने सरेंडर कर दिया और अपने हथियार सौंप दिये। बदलू सिंह की इस वीरता से ब्रिटिश सरकार बहुत प्रभावित हुई थी और उन्हें विक्टोरिया क्रॉस ( ब्रिटेन का सर्वोच्च सैन्य सम्मान) से सम्मानित किया गया। उनकी वीरता की गाथा 1918 के लंदन गजट में दर्ज है। उन्होंने तलवार के बल पर ही मशीनगन वाले सैनिक पर काबू पा लिया था। यह अदम्य साहस का प्रमाण था। बाद में बदलू सिंह के परिवार ने विक्टोरिया क्रॉस सरकार को सौंप दिया था जो अब लालकिला के म्यूजियम में है। मिस्र के हेलियोपोलिस में जो युद्ध स्मारक बना है उसमें बदलू सिंह की स्मृति भी समाहित है।
मिस्र से हरियाणा लायी गयी शहीद स्मारक की मिट्टी
ओमप्रकाश धनखड़ जब हरियाणा के कृषि मंत्री थे तब 2019 में वे मिस्र के हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक गये थे। वहां शहीद बदलू सिंह को श्रद्धांजलि देकर स्मारक की मिट्टी भी लाये थे। इसके बाद उनके पैतृक गांव ढाकला में समाधि बनायी गयी थी। चूंकि बदलू सिंह 23 सितम्बर 1918 को शहीद हुए थे इसलिए उनकी स्मृति में 23 सितम्बर को हरियाणा में शहीदी दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर राज्य के तमाम शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मिस्र यात्रा के दौरान हेलियोपोलिस जा कर भारत के अमर शहीदों को नमन करेंगे।












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