मिस्र में योनि-झिल्ली की सर्जरी पर नए फतवे से छिड़ा विवाद

काहिरा, 13 सितंबर। हाल ही में अरबी में हुए एक लाइव फेसबुक ब्रॉडकास्ट में मिस्र की सर्वोच्च धार्मिक संस्था दर अल-इफ्ता में शरिया शोध विभाग के निदेशक डॉ. अहमद ममदोह ने कहा, "कुछ मामलों में, बलात्कार या धोखे का शिकार हुई ऐसी लड़की के लिए पैबंद लगाने की जरूरत होती है और जायज है जो पश्चाताप करना चाहती है और नया पन्ना पलटना चाहती है."

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यह नया फतवा 30 अगस्त को जारी किया गया था. इस फतवे में डॉ. ममदोह ने अपने 2015 के एक अध्ययन से दूर हटकर बात की है, जिसमें उन्होंने असंयमी महिलाओं की योनि-झिल्ली को फिर से जोड़ने का विरोध किया था. उनका वह रुख 2007 में शेख अली गोमा द्वारा दिए गए एक फतवे पर आधारित था.

यूं तो ममदोह ने अपने आदेश में विस्तार से नहीं बताया कि किसे इजाजत होगी और क्या क्या अपवाद होंगे, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि कुछ मामले हैं जिनमें शरिया योनि-झिल्ली की दुरुस्ती को हराम कहता है.

क्यों पड़ी फतवे की जरूरत?

दरअसल एक प्रसूति-विज्ञानी ने सवाल किया था कि इस्लाम में योनि की झिल्ली को रीपेयर करना जायज है या नहीं. उस सवाल के जवाब में ही डॉ. ममदोह ने यह फतवा सुनाया है.

फेसबुक पर लाइव सुनाए गए इसे फतवे के वीडियो के नीचे ही लोगों ने टिप्पणियां करनी शुरू कर दी थीं. उनमें बहुत से लोगों ने इस फैसले की आलोचना की थी. कुछ लोगों का तर्क था कि योनि-झिल्ली की सर्जरी जिसे हाइमन रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी या हाइमनोप्लास्टी भी कहे हैं, शादी के बाहर यौन संबंध बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है क्योकि महिलाओं को शादी से पहले बदलाव करने का विकल्प मिल जाएगा.

मिस्र में लैंगिक और यौन हिंसा कि विशेषज्ञ और तहरीर इंस्टिट्यूट फॉर मिडल ईस्ट पॉलिसी में फेलो हबीबा अब्देलाल ने डॉयचे वेले को बताया, "कुछ लोगों ने इस फतवे का समर्थन किया लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो इसे विवाह के पूर्ण हो जाने की विश्वसनीयता की शर्त पर ही सवाल मानते हैं."

मिस्र के कानून के मुताबिक योनि झिल्ली की सर्जरी अवैध नहीं है. इस तरह के ऑपरेशन का खर्च निजी अस्पतालों में एक हजार डॉलर (करीब 70 हजार रुपये) आता है. लेकिन आज भी देश में योनि-झिल्ली को पवित्रता और शु्द्धता से जोड़कर देखा जाता है.

अब्देलाल कहती हैं, "मिस्र में परिवारों का सम्मान महिलाओं के कौमार्य से जोड़ा जाता है. मांएं बहुत सी ऊर्जा अपनी बेटियों को यह सिखाने में लगाती हैं कि वे अपनी झिल्ली को बचाकर रखें और हस्तमैथुन जैसी गतिविधियों से दूर रहें."

'दूसरा मौका देती है सर्जरी'

काहिरा की अल-अजहर यूनिवर्सिटी दर अल-इफ्ता से संबद्ध है. इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वालीं प्रोफेसर आम्ना नोसेल फतवे का स्वागत करती हैं. उन्होंने ऑनलाइन पत्रिका अल-मॉनिटर को बताया, "बलात्कार का शिकार हुईं या शादी से पहले यौन संबंधों में लुभा ली गईं लड़कियों के नाम पर स्कैंडल बनाना या उनके नाम को सार्वजनिक करना उन लड़कियों के लिए कोई उम्मीद नहीं छोड़ता. जब उनके परिवार और समाज द्वारा उनसे नाता तोड़ लिया जाता है तो वे एकदम बेसहारा हो जाती हैं और उनके पास सम्मानजनक जीवन जीने का कोई मौका नहीं बचता. सर्जी उन्हें दूसरा मौका देती है और वे पत्नियां और मांएं बनने के लिए जीवन में आगे बढ़ सकती हैं."

इस फतवे की एक और वजह उफरी यानी ऐसी शादियों में हो रही बढ़ोतरी है जिनका पंजीकरण नहीं कराया जाता. ऐसी शादियों से तलाकशुदा औरतों को भत्ते आदि का अधिकार नहीं मिलता. नतीजतन वे योनि-झिल्ली की सर्जरी कराती हैं ताकि अपने परिवार की बदनामी के बिना वे दोबारा शादी कर सकें.

वैसे मिस्र में धर्मगुरुओं के बीच अब भी इस बात पर एकराय नहीं है कि अगर महिलाएं ऐसी सर्जरी कराती हैं तो उन्हें अपने संभावित पतियों को बताने के लिए नैतिक रूप से बाध्य हैं या नहीं. अल-मॉनिटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक दर-अल-इफ्ता ने कहा है कि लड़कियों को अपने भविष्य के पतियों को सर्जरी के बारे में बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे उनकी शादी पर खतरा हो सकता है. लेकिन ऐसे धर्मगुरू भी हैं जो इस बात से असहमत हैं और मानते हैं कि सच्चाई और ईमानदारी ही सफल वैवाहिक जीवन का आधार है.

रिपोर्टः जेनिफर होलीस

Source: DW

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