Ebola Outbreak: 80 मौतें-246 संदिग्ध केस, COVID के बाद नया संकट? खतरे में भारत? कौन से देश चपेट में?

Ebola Outbreak: मध्य अफ्रीका के लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में एक नया और दुर्लभ ईबोला प्रकोप तेजी से फैल रहा है। अब तक 80 मौतें हो चुकी हैं और 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई 2026 को इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित कर दिया है। यह COVID-19 महामारी के बाद WHO की एक और बड़ी ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी है।

यह प्रकोप बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन का है, जिसके लिए कोई स्वीकृत टीका या स्पेसिफिक दवा उपलब्ध नहीं है। कांगो में यह 17वां ईबोला प्रकोप है, लेकिन इस स्ट्रेन का तीसरा बड़ा आउटब्रेक। WHO ने स्पष्ट किया कि यह अभी पैंडेमिक स्तर पर नहीं पहुंचा है, लेकिन पड़ोसी देशों में फैलने का खतरा उच्च है। आइए जानते हैं इस वायरस के फैलने के कारण क्या-क्या हैं?

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प्रकोप की शुरुआत और वर्तमान स्थिति

कांगो के पूर्वी इतुरी प्रांत में अप्रैल 2026 के अंत में यह प्रकोप शुरू हुआ। पहला संदिग्ध मामला एक नर्स का था, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हो गई। शुरुआती लक्षण बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी, उल्टी और कुछ मामलों में खून निकलना थे।

मुख्य आंकड़े (16 मई 2026 तक):

  • 8 लैब-पुष्ट मामले (Bundibugyo स्ट्रेन)।
  • 246 संदिग्ध मामले।
  • 80 संदिग्ध मौतें
  • पुष्ट मौतों में स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल।

प्रकोप मुख्य रूप से मोंगवालू (Mongwalu), रवामपारा (Rwampara) और बुनिया (Bunia) स्वास्थ्य क्षेत्रों में केंद्रित है। कुछ मामले उत्तरी किवु प्रांत और राजधानी किंशासा (इतुरी से लगभग 1000 किमी दूर) तक पहुंच चुके हैं। यह फैलाव चिंताजनक है।

युगांडा में दो मामले रिपोर्ट हुए हैं, दोनों कांगो से आए यात्रियों में। एक व्यक्ति की कंपाला (कंपाला) में मौत हो गई। दक्षिण सूडान जैसे पड़ोसी देश भी अलर्ट पर हैं।

WHO की PHEIC घोषणा: क्यों और क्या मतलब?

17 मई 2026 को WHO डायरेक्टर-जनरल टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया। इसका मकसद:

  • अंतरराष्ट्रीय समन्वय बढ़ाना।
  • फंडिंग, विशेषज्ञ और संसाधन जुटाना।
  • पड़ोसी देशों में निगरानी मजबूत करना।

WHO ने सीमा बंद करने की सलाह नहीं दी, बल्कि स्क्रीनिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और सुरक्षित दफन पर जोर दिया। यह महामारी की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन क्षेत्रीय फैलाव का जोखिम अधिक है।

बुंडीबुग्यो स्ट्रेन: क्यों ज्यादा चिंताजनक?

कांगो में पहले ज्यादातर जायरे (Zaire) स्ट्रेन के मामले थे, जिनके लिए टीके (Ervebo) और इलाज उपलब्ध हैं। बुंडीबुग्यो दुर्लभ है:

  • 2007-08 में युगांडा में पहला आउटब्रेक (149 मामले, 37 मौतें)।
  • 2012 में कांगो में दूसरा (57 मामले, 29 मौतें)।
  • मृत्यु दर लगभग 25-50% (Zaire में 50-90%)।

इस स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन या स्पेसिफिक ट्रीटमेंट नहीं है, जिससे नियंत्रण मुश्किल हो गया है।

What Is Ebola Virus: ईबोला वायरस क्या है? कैसे फैलता है और कितना खतरनाक?

ईबोला एक वायरल हेमोरेजिक फीवर है जो फिलोवायरस परिवार से संबंधित है। यह जानवरों (फल चमगादड़) से इंसानों में आया।

संक्रमण के तरीके:-

  • संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, मल, पेशाब, लार, पसीने या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों से सीधा संपर्क।
  • संक्रमित कपड़े, बिस्तर या मेडिकल उपकरण छूने से।
  • संक्रमित शव का अंतिम संस्कार करते समय।
  • जंगली जानवरों (बुशमीट) के संपर्क से।
  • नहीं फैलता: हवा, पानी या रोजमर्रा के स्पर्श से (जैसे COVID)।

Ebola Virus Symptoms: लक्षण (2-21 दिनों में):

  • तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशी दर्द।
  • उल्टी, दस्त, पेट दर्द।
  • गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव, अंग फेल।

Ebola Virus Death Rate (मृत्यु दर): 25-90% (स्ट्रेन और इलाज पर निर्भर)। जल्दी सपोर्टिव केयर (तरल पदार्थ, ऑक्सीजन) से बचाव संभव।

नोट: ईबोला से बचे व्यक्ति भी कुछ समय तक वायरस फैला सकते हैं (वीर्य आदि में)।

Ebola Virus Affected Countries and Regions: प्रभावित देश और क्षेत्र

मुख्य चपेट में:

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC): इतुरी प्रांत (मोंगवालू, रवामपारा, बुनिया), उत्तरी किवु, किंशासा।
  • युगांडा: कंपाला सहित (2 आयातित मामले)।
  • उच्च जोखिम: दक्षिण सूडान, रवांडा, बुरुंडी, तंजानिया (सीमा क्षेत्र)।

इतुरी सोने की खदानों वाला क्षेत्र है, जहां मजदूरों का लगातार आना-जाना होता है। यह प्रकोप को तेजी से फैलाने वाला कारक है।

पिछले प्रकोपों से सीख और वर्तमान प्रयास

कांगो ने 2014-16 (पश्चिम अफ्रीका) और 2018-20 (कांगो) जैसे बड़े प्रकोपों का सामना किया है। सफल रणनीतियां:

  • रिंग वैक्सीनेशन (Zaire स्ट्रेन के लिए)।
  • कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग।
  • सुरक्षित दफन।
  • कम्युनिटी एंगेजमेंट।

वर्तमान में WHO, Africa CDC, MSF आदि संगठन सक्रिय हैं। लेकिन बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए नए टूल्स विकसित करने होंगे।

भारत को कितना खतरा?

भारत में सीधा खतरा कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा, व्यापार और अफ्रीकी छात्रों/कार्यकर्ताओं के कारण सतर्कता जरूरी। हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग बढ़ाई जा सकती है।

  • COVID-19 सबक: जल्दी पता लगाना, पारदर्शिता और वैश्विक सहयोग महत्वपूर्ण।

सतर्कता और एकजुटता की जरूरत

यह ईबोला प्रकोप न सिर्फ कांगो और युगांडा की समस्या है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की परीक्षा है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की अनोखी चुनौती के बीच WHO की PHEIC घोषणा समय पर है। COVID-19 ने सिखाया कि वायरस सीमाओं का सम्मान नहीं करते। अगर दुनिया एकजुट होकर काम करे, बेहतर निगरानी, रिसर्च, समुदाय भागीदारी और संसाधन वितरण तो इस प्रकोप को रोका जा सकता है। फिलहाल इतुरी के गांवों में दफन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन उम्मीद भी है कि अंतरराष्ट्रीय प्रयास जल्द फल देंगे।

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