भूकंप की हो सकती है भविष्यवाणी, दो घंटे पहले GPS data दे सकता है चेतावनी- study
भूकंप की अभी कोई भविष्यवाणी नहीं होती। इसका ठीक से किसी तरह से कोई पूर्वानुमान भी नहीं लग पाता है। इसके लिए वैज्ञानिक दुनिया भर में तरह-तरह के शोध में लगे हुए हैं। ऐसे में फ्रांस के वैज्ञानिकों को कुछ ऐसी जानकारियां हाथ लगी हैं, जिससे भूकंप का भी संकेत मिल सकता है और वह भी होने से कई घंटे पहले।
अभी जो भूकंप का वार्निंग सिस्टम है, उसमें कुछ ही ऐसा है, जिससे इसके होने से दो मिनट से भी पहले इसका संकेत मिल सकता है। ज्यादातर मामलों में तो भूकंप के बारे में इसके शुरू हो जाने के तीन से पांच सेकंड बाद चेजावनी मिल पाती है।

भूकंप से दो घंटे पहले लग सकता है पता- रिसर्च
अब भूकंप का पहले से पता लगाने के लिए फ्रांस के वैज्ञानिकों ने जो रिसर्च किया है, उसके नतीजे बड़े ही सकारात्मक हैं। फ्रांस के डी अजूर यूनिवर्सिटी के क्वेंटिन ब्लेटेरी और पेरिस स्थित इंस्टिट्यूट डी फिजिक डू प्लानेटे के जीन-मैथ्यू नॉक्वेट ने अपनी रिसर्च में पाया है कि भूकंप का पता उसके होने से दो घंटे पहले लगाया जा सकता है।
अभी भूकंप से संभलने का बहुत ज्यादा वक्त नहीं मिल पाता
अभी भूकंप की भविष्यवाणी नहीं होती, सिर्फ इलाके में पहले हो चुके भूकंप और क्षेत्र में चल रही भूकंपीय गतिविधियों के आधार पर इसका पूर्वानुमान लगाया जाता है। इन सारी गतिविधियों के विश्लेषण के आधार पर भविष्य के भूकंप संभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया जाता है। अभी भूकंप शुरू होने के बाद जमीन के अंदर की गतिविधि के आधार पर चेतावनी अलर्ट जारी होती है। लेकिन, इसमें लोगों के लिए संभलने का बहुत अधिक वक्त नहीं मिल पाता।
भूकंप से दो घंटे पहले 'प्रिकर्सरी फॉल्ट फेज स्लिप' का पता चलता है-शोध
फ्रांस के दोनों वैज्ञानिकों ने 'प्रिकर्सरी फॉल्ट फेज स्लिप' का पता लगाया है, जो भूकंप होने से करीब 2 घंटे पहले शुरू हो जाता है। ब्लेटेरी और नॉक्वेट का मानना है कि इसका भविष्य में भूकंप की भविष्यवाणी और पूर्व चेतावनी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस खोज के लिए दोनों वैज्ञानिकों ने पिछले दो दशकों में हुए 7 से अधिक तीव्रता वाले 90 से ज्यादा भूकंप का डेटा जुटाया है और उन प्रत्येक के होने से पहले के 48 घंटों के जीपीएस डेटा का विश्लेषण किया है।
नॉक्वेट के मुताबिक, ' प्रिकर्सर फेज वह समय अंतराल है, जब टेक्टोनिक ब्लॉक एक-दूसरे की ओर बढ़ना शुरू करते हैं, पहले धीरे से और फिर गति को बढ़ाते हुए आखिर में बहुत तेजी से फिसलने वाले वेग तक पहुंच जाता है। तेजी से खिसकने के चलते भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं, जो बड़े भूकंपों के दौरान होने वाले नुकसान का कारण बनती हैं।'
48 घंटे पहले ही शुरू हो जाती है भूकंप की गतिविधि-शोध
वैज्ञानिकों ने नोटिस किया है कि पहले 48 घंटों में कोई महत्वपूर्ण गतिविधि नजर नहीं आई, लेकिन भूकंप के ठीक 2 घंटे पहले फॉल्ट जोन में गतिविधियों में तेजी के लक्षण दिखाई पड़े। ब्लेटेरी का कहना है यह भूकंप आने से लगभग 2 घंटे पहले शुरू होने वाली टेक्टोनिक प्लेटों के बीच एक क्रमिक और अनजान फिसलन का संकेत मिला है। यह भूकंप का संकेत देने में सक्षम है, लेकिन इसकी एक सीमा है।
भविष्य में भूकंप की भविष्यवाणी का बन सकता है आधार
ब्लेटेरी ने न्यू साइंटिस्ट को बताया है कि 'हम भूकंप की श्रेणी का पता नहीं लगा सकते, इसलिए हम भविष्यवाणी नहीं कर सकते।' वो बोले कि 'लेकिन, यह हमें बताता है कि कुछ चल रहा है और अगर हम इसे मापने में महत्वपूर्ण प्रगति कर लेते हैं, चाहे सेंसर के जरिए या इसकी संवेदनशीलता बढ़ाकर या इसका और विस्तार से अध्ययन करके तो हम इन चीजों को समझने और भविष्यवाणी करने में सक्षम हो सकते हैं।'
अभी दिक्कत ये है कि मौजूदा जीपीएस सिस्टम भूकंप की भविष्यवाणी के लिए आवश्यक संवेदनशीलता के मुताबिक उन्नत नहीं है। ब्लेटेरी के अनुसार इसके लिए ऐसे जीपीएस सेंसर की जरूरत है, जो 0.1 मिलीमीटर के मूवमेंट को भी पकड़ ले। लेकिन, दिक्कत ये है कि अभी कई भूकंप संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त टेक्नोलॉजी की भी काफी कमी है।












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