NASA को मंगल पर दिखी बत्तख जैसी चीज, क्या ये है एलियंस सभ्यता का सबूत?

वैज्ञानिकों को पृथ्वी के बाद मंगल पर ही जीवन की उम्मीद है। कुछ वक्त पहले नासा ने वहां पर अपना क्यूरोसिटी रोवर भेजा था, जो लगातार मंगल की तस्वीरें मुहैया करवा रहा है। साथ ही वो वहां पर जीवन से जुड़े सबूतों की खोज कर रहा। इस बीच उसे लाल ग्रह पर कुछ ऐसा मिला है, जिसको देखकर शोधकर्ता भी हैरान हैं।

क्या एलियंस ने ऐसा किया?

क्या एलियंस ने ऐसा किया?

सोशल मीडिया पर इन दिनों मंगल की सतह की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक बत्तख के आकार की चट्टान दिखाई दे रही। जिसको लेकर लोग तरह-तरह की बातें कर रहें। कुछ का कहना है कि वहां पहले जीवन था या फिर एलियंस की वजह से ये हुआ होगा। हो सकता है कि उन्होंने चट्टान को उस आकार में तराशा हो, जैसे पृथ्वी की पुरानी सभ्यताओं में लोग करते थे।

मिट्टी की वजह से बना?

मिट्टी की वजह से बना?

हालांकि इस पर वैज्ञानिकों के मत अलग हैं। फोटो देखने पर लगता है कि वो कोई चट्टान है, जो मौसमी हलचल की वजह से इस आकार में बन गई। मंगल पर तेज हवाएं चलती हैं, जिस वजह से मिट्टी का क्षरण होता है। उनकी वजह से चट्टानों का निर्माण होता रहता है। ये इमेज माउंट शार्प के आसपास की है, जहां पर कई चट्टानें हैं।

जीवन से जुड़े अहम सबूत के करीब

जीवन से जुड़े अहम सबूत के करीब

नासा मंगल मिशन पर वहां की सतह की खुदाई कर रहा है। कुछ दिनों पहले उसकी ओर से बताया गया था कि अभी तक उसने दो इंच खुदाई कर ली है। अगर वो 6.5 या 7 फीट खुदाई कर लेगा तो वो एलिंयस की जानकारी आसानी से पा सकता है। नासा के मुताबिक मंगल की सतह में अमीनो एसिड होगा, जिसको नष्ट होने में 20 मिलियन साल लगते हैं। अगर उससे जुड़े सैंपल हाथ लग गए, तो ये पता चल जाएगा कि वहां पर जीवन था या नहीं।

4 अरब साल पहले पानी था?

4 अरब साल पहले पानी था?

वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह पर पहले पानी हुआ करता था, जिस वजह से वहां पर जीवन की संभावनाएं भी थीं। इसके अलावा वो पृथ्वी की तरह नीले रंग का दिखता था। इसके बाद कोई घटना हुई, जिससे पानी सूख गया और वो धीरे-धीरे लाल ग्रह बन गया। अभी तक की रिसर्च से लगता है कि वहां पर पानी को सूखे हुए 4 अरब साल बीत गए हैं।

कार्बन सिग्नेचर भी हाथ लगे

कार्बन सिग्नेचर भी हाथ लगे

इसी साल की शुरुआत में क्यूरोसिटी रोवर को मंगल ग्रह पर कार्बन सिग्नेचर मिले थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक रोवर फाउडर रॉक के सैंपल इकट्ठा कर रहा था। तभी उनको कई सैंपल्स में अच्छा खासा कार्बन मिला। पृथ्वी पर तो कार्बन के जरिए जीवन से जुड़ी कई जानकारियां मिली हैं, लेकिन मंगल को लेकर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

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