पाकिस्तानी अदालत का बेशर्म हिन्दू-मुस्लिम वाला फैसला, जानिए हिन्दू नाबालिग से कैसे किया खौफनाक भेदभाव
14 साल की मुस्लिम दुआ जेहरा के मामले में पाकिस्तानी अदालत नाबालिग बच्ची के माता-पिता के साथ नजर आती है वहीं 15 साल की हिन्दू चंदा महराज के मामले में कोर्ट अपराधी का पक्ष लेती दिखाई देती है।

Image: Twitter
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यकों द्वारा अत्याचार की खबर कोई नई नहीं है। लेकिन अब पाकिस्तान में अदालतें भी अल्पसंख्यकों के साथ अन्यायपूर्ण फैसला सुनाने लगी हैं। पाकिस्तान के न्यायधीश भी अब धर्म देखकर फैसला सुनाने लगे हैं। इसकी बानगी हाल ही तब दिखी जब अदालत ने अलग-अलग धर्मों की पीड़ितों के लिए अलग-अलग फैसला सुनाया। एक मामले में पाकिस्तानी कोर्ट ने जहां मुस्लिम पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया वहीं दूसरे मामले में कोर्ट हिन्दू पीड़िता के साथ न्याय करने के बजाय बेशर्मी से पाकिस्तानी अपराधियों के साथ खड़ी नजर आई।

पाकिस्तानी अदालत ने किया भेदभाव
पाकिस्तानी कोर्ट ने बहुचर्चित हिंदू नाबालिग लड़की चंदा मेहराज और दुआ जेहरा काजमी के अपहरण मामले में अलग-अलग फैसला सुनाया है जिसकी निंदा करने के बजाए पूरी दुनिया ने चुप्पी साधी हुई है। ये मामला क्या है ये हमको बताते हैं। पहले हम बात करेंगे दुआ जेहरा काजमी की। 14 साल की दुआ जेहरा 16 अप्रैल, 2022 को कराची स्थित अपने घर से भाग गई और अपने 21 साल के जहीर अहमद के साथ निकाह कर लिया। दुआ के अब्बू मेहदी काजमी और अम्मी साइमा काजमी इसके खिलाफ थे। उन्होंने पुलिस में FIR दर्ज करा दिया।
अपनी मर्जी से भागी थी दुआ
बाद में दुआ का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने अपनी जान को खतरा बताया था। दुआ ने कहा कि वह खुद अपनी मर्जी से घर से भागी है। उसके घरवाले कहीं और उसकी शादी करना चाहते हैं जिससे वह राजी नहीं है। वह घर से एक रुपया लेकर नहीं भागी है। उसने अपनी मर्जी से जहीर नाम के लड़के के साथ निकाह किया है। उन दोनों को परेशान न किया जाए। यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा था। इस दौरान दुआ के पिता ने सिर पर कुरान रखकर कसम खाई थी कि वो अपनी बेटी को घर वापस लाकर रहेंगे।
माता-पिता को सौंपी गई दुआ
5 जून को दुआ को बहावलनगर से बरामद कर लिया गया। इससे पहले दुआ के अब्बू मेहदी काजमी ने मीडिया के सामने डाक्यूमेंट्स दिखाते हुए बेटी की उम्र 13 साल बताई थी। लेकिन दुआ ने मीडिया को सफाई दी थी कि उसके पिता झूठ बोल रहे हैं। उसकी उम्र 18 साल है और उसका कोई किडनैप नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दुआ का मेडिकल कराया गया था। उसमें दुआ की उम्र 15-16 साल के बीच निकली थी। इसके बाद दुआ को शेल्टर होम भेज दिया गया था लेकिन नए साल में सिंध हाईकोर्ट ने दुआ को उनके माता-पिता को सौंप दिया है।

हिन्दू लड़की के खिलाफ दिया फैसला
लेकिन एक दूसरे मामले में अदालत ने उलटा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने बीते साल एक हिंदू नाबालिग लड़की चंदा महराज को उसके ही किडनैपर को सौंपने का फैसला सुना दिया। दरअसल चंदा महराज का 13 अक्टूबर, 2022 को को सिंध के हैदराबाद शहर से शमन मैगसी बलूच नाम के एक शख्स ने अपहरण कर लिया था। बाद में चंदा मेहराज को कराची पुलिस ने कराची शहर में किराए के एक घर से बरामद कर लिया। अदालत में चंदा ने कहा कि अपहरण के बाद उसे कराची ले जाया गया। वहां जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया। पुलिस द्वारा उसे छुड़ाए जाने से पहले एक सप्ताह तक उसका बार-बार यौन शोषण किया गया।
बच्ची को किडनैपर के पास भेजा
20 अक्टूबर को एक अदालत ने फैसला सुनाया कि उसका धर्म परिवर्तन और विवाह वैध था, और उसे उसके अपहरणकर्ता शमन मैगसी के पास वापस भेज दिया। चंदा के माता-पिता ने इस तथ्य के आधार पर एक और शिकायत दर्ज की कि इस्लाम में उसके धर्मांतरण की वैधता के बावजूद, 2019 के पाकिस्तानी कानून ने शादी के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष कर दी थी, और चंदा 15 वर्ष की है। उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, लेकिन न्यायाधीशों ने आपत्ति जताई कि पाकिस्तान में ये प्रमाणपत्र विश्वसनीय नहीं हैं। अदालत ने डॉक्टरों की एक टीम को चंदा की जैविक उम्र का पता लगाने के लिए कहा। 29 अक्टूबर को, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वह 16 वर्ष की है।
कोर्ट में ही मां से लिपट पड़ी चंदा
अब जब यह पता चल चुका था कि लड़की सच में नाबिलिग की है तो पाकिस्तानी अदालत ने बेशर्मी दिखाते हुए चंदा मेहराज को कराची स्थित गर्ल्स शेल्टर होम भेज दिया, लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि अदालत ने चंदा को माता-पिता के साथ जाने की इजाजत तक नहीं दी। जब कोर्ट ने चंदा को माता-पिता के साथ नहीं जाने दिया, तो वो कोर्ट परिसर में ही उनसे लिपटकर रो पड़ी थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

धर्म की वजह से हो रहा अन्याय
हालांकि बाद में कोर्ट ने अपने फैसले में थोड़ा बदलाव किया और भारी फजीहत के बाद चंदा को एक सुरक्षित घर में जाने और मेडिकल रिपोर्ट करने का आदेश दिया था। फिलहाल हिन्दू चंदा जिसका अपहरण कर लिया गया था, शेल्टर होम में रह रही है और अपनी मर्जी से घर से भागकर निकाह करने वाली दुआ आज अपने माता-पिता के साथ है। चंदा की चीख किसी को सुनाई नहीं दे रही है क्योंकि वह हिन्दू है और पाकिस्तान में रह रही है और सभी जानते हैं कि चीखने-चिल्लाने का कोई मतलब ही नहीं है।












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