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ड्रैगन हड़प रहा है जमीन, दोस्ती के नाम पर दगाबाजी! नेपाल में चीन के खिलाफ हल्ला बोल

काठमांडू, 20 जुलाई: चीन की जमीन हड़पने की नीति के खिलाफ अब नेपाल की जनता लामबंद होनी शुरू हो गई है। यहां एक सिविल ग्रुप ने नेपाल की मौजूदा सरकार से मांग की है कि चीन ने जितनी भी नेपाली जमीन पर अवैध कब्जा किया है, उसे वापस लिया जाए। हालांकि, संगठन को नेपाल की मौजूदा सरकार पर पूरा भरोसा है, लेकिन अब वह चीन के खिलाफ थोड़ा सख्त रुख अपनाने की मांग करने लगा है। संगठन ने अपनी सरकार को जानकारी दी है कि ड्रैगन लगातार उसकी जमीन निगलने की कोशिश में जुटा हुआ है और अंतराराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा रहा है। लेकिन, अब उसपर लगाम लगाने का समय आ चुका है।

चीन के कब्जे वाली नेपाली जमीन पर दावा जताने की मांग

चीन के कब्जे वाली नेपाली जमीन पर दावा जताने की मांग

पिछले कुछ वर्षों से नेपाल की जमीन पर चीनी कब्जे की जो खबरें आती रही हैं, उसके खिलाफ अब हिमालय की गोद में बसे इस देश के लोगों ने आवाजें उठानी शुरू कर दी हैं। नेपाल के एक नागरिक समूह ने वहां के भूमि प्रबंधन मंत्री शशि श्रेष्ठा को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें चीन की ओर से हड़पी गई नेपाली जमीन पर दावा जताने की मांग की गई है। मंगलवार को काठमांडू में राष्ट्रीय एकता अभियान के अध्यक्ष बिनय यादव की अगुवाई में संगठन ने वहां के मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन दिया है।

'नेपाल की संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती'

'नेपाल की संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती'

ज्ञापन में सबसे अहम चीज ये है कि संगठन की ओर से नेपाल सरकार का चीन की ओर से की गई ताजा अतिक्रमण की ओर भी ध्यान खींचा गया है। इसके मुताबिक चीन ने गोरखा के चुमानुबरी ग्रामीण नगर पालिका-1 की रुइला सीमा पर एक नई बाड़ लगा दी है। ज्ञापन में कहा गया है, 'रुइला समेत नेपाल-चीन सीमा के कई इलाकों में अंतरराष्ट्रीय कानून और मूल्यों का उल्लंघन न सिर्फ दोनों देशों की दोस्ती का अपमान है, बल्कि नेपाल की संप्रभुता के लिए भी सीधी चुनौती है।' बिनय यादव ने कहा है कि नेपाल की ओर से निंदा के बावजूद चीन ने अपने अवैध इरादों पर लगाम नहीं लगाया है और नेपाल की क्षेत्रीय अखंडता पर बार-बार हमला कर रहा है।

चीन के खिलाफ निर्णायक और सख्त कार्रवाई की मांग

चीन के खिलाफ निर्णायक और सख्त कार्रवाई की मांग

हालांकि, उन्होंने नेपाल की मौजूदा सरकार की ओर से नेपाल-चीन सीमा पर अतिक्रमण के खिलाफ उठाए गए कदमों की सराहना की है, लेकिन कहा है कि 'सरकार की ओर से कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, सीमा का अतिक्रमण जारी है।' ज्ञापन में बताया गया है, 'हम सीमा के अतिक्रमण के खिलाफ इस सरकार से निर्णायक और सख्त कार्रवाई की उम्मीद करते हैं, एकता अभियान सरकार के हर कदम का पूरी तरह समर्थन और सहयोग करता रहेगा।'

अब नेपाल के गोरखा इलाके पर ड्रैगन ने डाली है बुरी नजर

अब नेपाल के गोरखा इलाके पर ड्रैगन ने डाली है बुरी नजर

इससे पहले जून में एक नेपाली मीडिया ने उत्तरी गोरखा के नो-मैंस लैंड के बगल में चीन के द्वारा बाड़ लगाकर नेपाली जमीन के अतिक्रमण किए जाने की खबर दी थी। स्थानीय लोगों की ओर से बताया गया है कि सीमा पर बाड़ की संरचना बिना तय मानदंडों का पालन किए निर्मित की गई है। रुइला बॉर्डर पर चीन के अवैध कब्जे के बारे में न तो नेपाली विदेश मंत्रालय को और न ही गोरखा के जिला प्रशासन को कुछ भी पता है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी शंकर हरि आचार्य ने सीमा पर बाड़ लगाने की जानकारी न होने की बात बताई। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नो मैंस लैंड पर कोई भी ढांचा या बाड़ का निर्माण नहीं किया जा सकता। इस तरह के काम के लिए द्विपक्षीय सहमति जरूरी है।

नेपाली जनता चीन की हरकत से परेशान हो रही है

नेपाली जनता चीन की हरकत से परेशान हो रही है

जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि चीन ने रुइला बॉर्डर पर नो-मैंस लैंड क्षेत्र के भीतर बिना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन किए हुए बाड़ लगाया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक चीन की गैर-कानूनी हरकतों की वजह से उनकी सीमा पार आवाजाही ठप हो गई। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें दैनिक जरूरत की चीजें लाने में भी दिक्कतें हो रही हैं।

चीन ने अतिक्रमण भी किया और सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए

चीन ने अतिक्रमण भी किया और सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए

स्थानीय लोगों का कहना है कि चीन की दादागिरी ऐसी है कि उसने इलाके में सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए हैं और सीमा की हालातों की निगरानी कर रहा है। इससे पहले चीन ने चुमानुबरी ग्रामीण नगरपालिक-7 के छोकंगपारो स्थित न्गुइला सीमा पर पर भी ऐसा ही बाड़ लगा दिया था, लेकिन बाद में उसे हटा लिया था। गौरतलब है कि चीन की ओर से कई नेपाली गांवों पर कब्जे की खबरें 2020 से ही आ रही हैं और इसको लेकर वहां बीच-बीच में बवाल भी हो चुका है। (इनपुट- एएनआई। तस्वीरें- सांकेतिक )

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