Diplomacy: ट्रंप या बाइडेन: भारत किसे देखना चाहेगा US का राष्ट्रपति, पुतिन को गले लगाकर मोदी दे चुके संकेत!

Diplomacy: जब भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी मेल ग्लोबल लीडर से मिलते हैं, तो मुलाकात में गर्मजेशी दिखाने के लिए वो अकसर उन्हें गले से लगा लेते हैं, लेकिन पिछले हफ्ते मॉस्को में जब उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गले लगाया, तो वाशिंगटन और कीव दोनों ही जगहों से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई।

अमेरिका ने अगले कई दिनों तक बयान जारी कर प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा की आलोचना की और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने तो पीएम मोदी की रूस यात्रा को 'निराशाजनक' और 'यूक्रेन युद्ध के लिए विनाशक' तक करार दे दिया।

india-us-russia-relations-global-diplomacy

फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ 'सैन्य अभियान' शुरू किया था और उसके बाद ये प्रधानमंत्री मोदी की पहली रूस यात्रा थी। जिसपर अमेरिकी अधिकारियों ने रूस के साथ भारत के संबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी, कि रूस के साथ मजबूत संबंध "बुरा दांव" है।

ऐतिहासिक संबंध और जियो-पॉलिटिकल रणनीति

भारत और रूस के बीच घनिष्ठ संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें रूस, भारत को हथियारों और रक्षा उपकरणों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इसके अलावा, यूक्रेन में रूस के युद्ध की शुरुआत के बाद से भारत ने रूसी कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीददारी की है। भारत का तर्क है, कि रूसी तेल खरीदने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलती है।

हालांकि, चीनी खतरे का मुकाबला करने के लिए भारत, पश्चिम, खास तौर पर अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भू-राजनीतिक प्रतिक्रिया के बावजूद रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने के भारत के फैसले को, ऐतिहासिक संबंधों और जटिल रिश्तों को संभालने में भारत के आत्मविश्वास को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का यह भी मानना ​​है, कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वापस लौट सकते हैं और रूस के खिलाफ वाशिंगटन के रुख को नरम कर सकते हैं। राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रम्प ने रूस के बजाय चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता को प्राथमिकता दी थी, जो बीजिंग के बारे में भारत की चिंताओं के मुताबिक ही था।

india-us-russia-relations-global-diplomacy

डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की तरफ से कई ऐसे संकेत आ चुके हैं, जिनसे पता चलता है, कि दोनों नेता अमेरिका और रूस के संबंधों में आई तल्खी को कम करना चाहते हैं। ट्रंप कह चुके हैं, कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं, तो एक दिन में यूक्रेन युद्ध खत्म कर देंगे, जिसपर पुतिन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, कि 'मिस्टर ट्रंप के पास क्या पॉलिसी है, फिलहाल उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है, लेकिन अगर वो ऐसा कह रहे हैं, तो उनके पास ऐसा कुछ जरूर होगा।'

अगर अमेरिका और रूस के संबंधों में नरमी आती है, तो निश्चित तौर पर ये भारत के लिए अच्छा होगा।

अमेरिका के साथ संबंधों में संतुलन

मोदी की रूस यात्रा, भारत और अमेरिका के बीच तनाव के अन्य स्रोतों के साथ मेल खाती है। अमेरिका ने पिछले साल एक भारतीय एजेंट और एक भारतीय अधिकारी पर न्यूयॉर्क में अमेरिकी नागरिकता वाले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था और इस आरोप में अमेरिका के कहने पर चेक रिपब्लिक में निखिल गुप्ता नाम के एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया था, जिसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा चुका है।

बाइडेन प्रशासन लगातार भारत पर उस 'अधिकारी' पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बना रहे हैं और उसने काफी हद तक खालिस्तानी आंच पर भारत-अमेरिका रिश्तों को चढ़ा दिया है।

लेकिन, इन चुनौतियों के बावजूद, विश्लेषकों का मानना ​​है, कि भारत और मोदी के पास अमेरिका के साथ संबंधों को संभालने के लिए पर्याप्त ताकत है। भारत-अमेरिका संबंधों का रणनीतिक आधार मजबूत माना जाता है, और मोदी की रूस यात्रा, उस नींव को कमजोर नहीं करती है।

अमेरिका ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की आलोचना की है, खास तौर पर यूक्रेन में संघर्ष के दौरान। लेकिन, भारत और अमेरिका दोनों ही अपनी साझेदारी के महत्व को समझते हैं और किसी एक घटना के कारण दोनों अपने रिश्ते को पटरी से उतरने नहीं देंगे।

india-us-russia-relations-global-diplomacy

भारत के अगले डिप्लोमेटिक कार्यक्रम

अगला QUAD शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत को करना है, जो एशिया प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों का एक समूह है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं। भारत, रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी भाग लेगा। भारत इन आयोजनों में किस तरह से आगे बढ़ता है, यह इस बात का संकेत होगा, कि वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को किस हद तक परखने के लिए तैयार है।

इन कूटनीतिक चुनौतियों के बावजूद, विश्लेषकों का मानना ​​है, कि रूस और अमेरिका दोनों के साथ भारत के संबंधों का रणनीतिक आधार ठोस बना हुआ है। रूस के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने और पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करने के बीच संतुलन बनाना, भारत की विदेश नीति के निर्णयों को आकार देना जारी रखेगा।

इसके अलावा, बाइडेन प्रशासन ने जिस तरह से मानवाधिकार, फ्रीडम ऑफ स्पीच को लेकर बार बार सवाल पूछे हैं, उसने भी मोदी सरकार को असहज किया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ऐसे सवालों से दूर रहता है। इसलिए, नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक खास नजदीकी देखी गई थी। ऐसे में समझना आसान है, कि मोदी सरकार जो बाइडेन या फिर डोनाल्ड ट्रंप, किसे अमेरिका का अगला राष्ट्रपति देखना पसंद करेगी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+