ट्रंप की फटकार के बाद पाक ने की बड़ी कार्रवाई, हाफिज की फंडिंग पर लगाया बैन
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आंख तरेरने के बाद पाकिस्तान डर गया है। आनन-फानन में उसने आतंकी संगठनों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंड और मोस्टवांटेड आतंकवादी हाफिज सईद के संगठन जमात उद दावा पर पाकिस्तान ने विदेशी फंड लेने पर बैन लगा दिया है। इसके अलावा तीन अन्य संगठनों पर कार्रवाई की गई है। दरअसल सोमवार देर शाम डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक पाकिस्तान को कह दिया कि अब उसे आतंकवाद से लड़ने के लिए कोई अमेरिकी आर्थिक मदद नहीं मिलेगी। क्योंकि उनसे अब तक आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यही नहीं, ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिकी नेताओं को मूर्ख समझता है।

ट्रंप ने दी धमकी तो डरा पाकिस्तान
ट्रंप की इस सख्ती से पाकिस्तान परेशान हो गया, देर शाम पाक पीएम शाहिद खाकाना अब्बासी की अगुवाई में आपात बैठक हुई, जिसके बाद जमात-उद-दावा की विदेशी फंडिंग पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया गया. इस वक्त पाकिस्तान बुरी तरह से घबराया हुआ है और अमेरिका को दिखाने आनन-फानन में हाफिज सईद के खिलाफ ये कार्रवाई कर दी है।

पाकिस्तान सरकार ने किया कब्जे का ऐलान
इससे पहले सोमवार को दिन में अमेरिकी दबाव के बाद पाकिस्तान सरकार ने कहा कि वो हाफिज के संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को अपने नियंत्रण में लेने वाली है। पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय ने कानून मंत्रालय और सभी पांच प्रांतों की सरकारों को इस बारे में विस्तृत योजना बनाने को कहा है।

FATF संस्था में हाफिज की चैरिटी का नाम
मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के खिलाफ काम करने वाली संस्था 'फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स इशूज' ने 19 दिसंबर को डॉक्यूमेंट में जारी कर हाफिज सईद के दो चैरिटी संगठनों के नाम शामिल हैं। इस मामले को पाकिस्तान के गृह मंत्री ने कहा है कि अधिकारियों को देश में फंड इकट्ठा करने वाली चैरिटी पर नजर रखने और उन पर दबाव बनाकर उचित कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

हाफिज की चैरिटी को US पहले ही बता चुका है टेरर फंडिंग
अमेरिका बहुत पहले से ही फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए फंड एकत्रित करने वाला चैरिटी बता चुका है। हाफिज सईद ने 1987 में लश्कर-ए-तैयबा का गठन किया था। भारत और अमेरिका हाफिज सईद को 2008 मुंबई हमलों को दोषी माना है, जिसने 166 लोगों की जान ले ली थी।












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