Donald Trump Action: ट्रंप प्रशासन ने क्यों इन 10 राज्यों के 17 इमिग्रेशन जज बर्खास्त किए? क्या है पीछे की वजह
Donald Trump Action: अमेरिका में प्रवासियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन को तेज करने की ट्रंप प्रशासन ने अपनी सख्त नीति के तहत 10 राज्यों के 17 इमिग्रेशन न्यायाधीशों को बर्खास्त कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक और तकनीकी इंजीनियरों के संघ (IFPTE), जो इन न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व करता है, ने खुलासा किया कि 15 न्यायाधीशों को शुक्रवार (11 जुलाई) और दो अन्य को सोमवार (14 जुलाई) को 'बिना कारण' नौकरी से निकाला गया।
यूनियन ने इस कार्रवाई को 'जनहित के खिलाफ' और 'अनुचित' बताते हुए तीखी आलोचना की है। लेकिन इन बर्खास्तगी के पीछे की असली वजह क्या है? आइए, इस सनसनीखेज खबर के पीछे की सच्चाई को जानते हैं।

बर्खास्तगी की वजह क्या? ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति
ट्रंप प्रशासन ने सत्ता में आने के बाद से इमिग्रेशन नीतियों को और सख्त कर दिया है। मई 2025 से शुरू हुई बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों ने इमिग्रेशन अदालतों को दबाव में ला दिया है। अमेरिकी इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) अधिकारी अब अदालतों में पेश होने वाले प्रवासियों को तुरंत गिरफ्तार कर त्वरित निर्वासन प्रक्रिया में डाल रहे हैं। यूनियन का दावा है कि जिन न्यायाधीशों ने निर्वासन कार्यवाही को खारिज करने या देरी करने के फैसले लिए, उन्हें निशाना बनाया गया।
IFPTE के अध्यक्ष मैट बिग्स ने कहा, 'यह शर्मनाक है कि जब कांग्रेस ने 800 इमिग्रेशन न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 3.3 अरब डॉलर का फंड मंजूर किया है, तब ट्रंप प्रशासन बिना कारण के अनुभवी न्यायाधीशों को हटा रहा है। इससे 35 लाख लंबित मामलों का बोझ और बढ़ेगा।' यूनियन के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2025 से अब तक 103 से अधिक न्यायाधीशों को या तो बर्खास्त किया या 'Fork in the Road' प्रस्ताव के तहत इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। इस प्रस्ताव में न्यायाधीशों को स्वेच्छा से इस्तीफा देने या बर्खास्तगी का सामना करने का विकल्प दिया गया।
कौन से हैं 10 राज्य?
ये न्यायाधीश कैलिफोर्निया, इलिनॉय, लुइसियाना, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, न्यूयॉर्क, ओहायो, टेक्सास, यूटा, और वर्जीनिया की इमिग्रेशन अदालतों में कार्यरत थे।
न्यायाधीशों को क्यों निशाना बनाया गया?
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन उन न्यायाधीशों को हटाना चाहता है जो उनकी तेजी से निर्वासन की नीति में बाधा बन रहे हैं। कई बर्खास्त न्यायाधीशों ने प्रवासियों के पक्ष में फैसले दिए थे या निर्वासन प्रक्रिया को लंबा खींचा था, जिसे प्रशासन 'अकुशलता' मानता है। न्यूयॉर्क में एक बर्खास्त न्यायाधीश ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'हमें बिना कारण पत्र भेजा गया, जिसमें कहा गया कि अटॉर्नी जनरल ने हमारा कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया। यह स्पष्ट रूप से राजनीतिक दबाव है।'
न्याय विभाग के कार्यकारी इमिग्रेशन समीक्षा कार्यालय (EOIR) ने इन बर्खास्तगी पर टिप्पणी करने से इनकार किया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन नई नियुक्तियों के जरिए उन न्यायाधीशों को लाना चाहता है जो उनकी नीतियों के प्रति वफादार हों।
इमिग्रेशन अदालतों पर बढ़ता दबाव
इमिग्रेशन अदालतें पहले से ही 35 लाख लंबित मामलों के बोझ तले दबी हैं। इन मामलों को अंतिम निर्णय तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं, क्योंकि सुनवाई अक्सर एक साल से अधिक समय के लिए टल जाती है। प्रवासियों को आपराधिक अदालतों की तरह मुफ्त वकील का अधिकार नहीं है, जिसके चलते कई लोग बिना कानूनी सहायता के कोर्ट में पेश होते हैं। ऐसे में अनुभवी न्यायाधीशों की बर्खास्तगी से प्रक्रिया और धीमी हो सकती है।
हाल ही में पारित एक कानून ने इमिग्रेशन प्रवर्तन के लिए 170 अरब डॉलर आवंटित किए, जिसमें से 3.3 अरब डॉलर अदालतों के लिए हैं। इसका लक्ष्य 800 न्यायाधीशों की नियुक्ति और सहायक स्टाफ बढ़ाना था। लेकिन यूनियन का कहना है कि बर्खास्तगी से यह योजना पटरी से उतर सकती है, क्योंकि नए न्यायाधीशों की भर्ती और प्रशिक्षण में एक साल तक लग सकता है। वर्तमान में केवल 600 न्यायाधीश कार्यरत हैं।
क्या कहते हैं सीनेटर?
मैसाचुसेट्स के सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और एड मार्के ने 3 जुलाई 2025 को EOIR के कार्यवाहक निदेशक सर्स ओवेन को पत्र लिखकर बर्खास्तगी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'न्यायाधीशों की बर्खास्तगी उनके प्रदर्शन के बजाय ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों के प्रति उनकी कथित वफादारी पर आधारित है। यह न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला है।'
क्या है असली मकसद?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन प्रणाली को 'साफ' करना चाहता है, ताकि उनकी सख्त नीतियों को लागू करने में कोई रुकावट न आए। बर्खास्तगी का यह कदम उन न्यायाधीशों के लिए चेतावनी है जो प्रशासन की नीतियों का पालन नहीं करते। हालांकि, इससे अदालतों में बैकलॉग बढ़ सकता है, जिसका खामियाजा प्रवासियों को भुगतना पड़ेगा। क्या यह बर्खास्तगी ट्रंप की निर्वासन नीति को और तेज करेगी, या यह प्रणाली को और अराजक बनाएगी? यह सवाल सभी के मन में है।
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