पीएम मोदी ने ऐसे सुलझाई थी डोकलाम विवाद की गुत्थी
नई दिल्ली। 'सिक्योरिंग इंडिया द मोदी' नाम की एक किताब लॉन्च हुई है, जिसे जर्नलिस्ट नितिन गोखले ने लिखी है। इस किताब में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोकलाम विवाद को खत्म करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। भुटान के डोकलाम में चले भारत और चीन के बीच अब तक के सबसे लंबे गतिरोध को खत्म करने में प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी पृष्ठभूमि जर्मनी के हैम्बर्ग में तैयार कर ली थी।

हैंबर्ग में उठा था डोकलाम विवाद
किताब ने दावा किया है कि जी-20 सम्मेलन में जर्मनी के हैंबर्ग में पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। उस दौरान मोदी ने डोकलाम विवाद को सुलझाने की बात कही थी। हालांकि, पहले चीनी ऑफिशियल्स ने दोनों देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता से इनकार किया था, लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच अचानक मुलाकात हुई थी। मोदी और जिनपिंग के बीच यह मुलाकात 7 जुलाई को हुई थी।

सामरिक संबंध डोकलाम से कई गुना से ज्यादा- मोदी
इस बुक में कहा गया है कि हैंबर्ग में हुई मोदी ने ही जिंनपिग से डोकलाम विवाद को लेकर मुलाकात की थी। इस स्पेशल वार्ता में मोदी ने जिनपिंग को कहा था कि हम दोनों देशों के सामरिक संबंध डोकलाम से कई गुना से ज्यादा है। मोदी ने यह भी कहा था कि दोनों देश के रिप्रजेंटेटिव आपस में मिलकर आसानी से इस समस्या का हल निकाल सकते हैं। इस मुलाकात के बाद चीन में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया था।

डोकलाम बना सबसे लंबा विवाद
डोकलाम विवाद भारत और चीन का सबसे लंबा विवाद साबित हुआ है, जहां दोनों देश की सेनाएं पहली बार किसी तीसरे देश की जमीन पर 72 दिनों तक डटी रही। इस विवाद में इंडियन आर्मी मजबूती के साथ चीनी सेना के विरोध में खड़ी रही। कई युद्ध की धमकियों के बाद भी आखिरकार चीनी सेना को डोकलाम से पीछे हटना पड़ा था।












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