Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

रेगिस्तानी चींटियों ने दिखाया वैज्ञानिकों को रास्ता, बदल जाएगी रोबोट की दुनिया

वैज्ञानिकों ने रेगिस्तानी चींटियों पर लंबे समय तक रिसर्च के बाद कुछ ऐसी जानकारियां जुटाई हैं, जो रोबोटिक्स के लिए बहुत ही कारगर साबित हो सकता है। यह चींटियां कभी रास्ता नहीं भटकतीं।

desert-ants-showed-the-way-to-scientists-will-change-the-world-of-robots

रेगिस्तानी चींटियों ने वैज्ञानिकों को ऐसा रास्ता दिखाया है, जो भविष्य में स्मार्ट और काफी बेहतर रोबोट विकसित करने में मदद कर सकता है। इसके लिए यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड ने एक नई ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी विकसित की और उसी के माध्यम से रिसर्च करने पर पता चला कि रेगिस्तान में चींटियां अपने ठिकानों तक कैसे वापस लौटती हैं।

कंप्यूटर विजन का किया गया इस्तेमाल
नई ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर विजन का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से किसी रेगिस्तानी चींटी के भोजन ढूंढ़ने के दौरान की यात्रा की तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण किया जाता है। इस टूल से यह पता चलता है कि कैसे एक चींटी अपने स्थान से खाने की तलाश में निकलती है और वापस अपनी कॉलोनी में लौट जाती है और कभी रास्ता नहीं भटकती।

रेगिस्तानी चींटियां कभी रास्ता नहीं भटकतीं
इस शोध में यह खुलासा हुआ है कि रेगिस्तानी चींटी एक ही यात्रा में अपने रास्ते को याद कर लेती है, जो कि अविश्वसनीय है। जबकि, जब वह बाहर निकलती हैं तो उनकी रणनीति अलग होती है। इस शोध से कुछ ऐसे डेटा उपलब्ध हुए हैं, जो अबतक मानवीय समझ के बाहर रहे हैं।

बायोइंस्पायर्ड रोबोट की प्रेरणा
इस शोध से यह पता चला है कि एक रेगिस्तानी चींटी मौजूदा हालात में कैसे जटिल खोज पैटर्न को अपनाती है, जो संबंधित माहौल में उनके लिए सबसे उपयुक्त होता है। रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों को यकीन है कि रेगिस्तानी चींटियों का यह जटिल डेटा नेक्स्ट जेनरेशन बायोइंस्पायर्ड रोबोट की प्रेरणा बन सकता है।

साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
यह शोध साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह शोध बताता है कि कैसे कंबाइंड एनिमल ट्रैकिंग एंड एनवॉयरनमेंट रिकंस्ट्रक्शन (CATER)में ऑफ-द-शेल्फ कैमरों का इस्तेमाल करके वीडियो में एक कीड़े की स्थिति को ट्रैक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर विजन का उपयोग किया जाता है।

बहुत ही कारगर है नया सिस्टम
यह ऐसा सक्षम सिस्टम है, जो बहुत ही सूक्ष्म चीजों का भी पता लगा लेता है, जिसे आंखों से नहीं देखा जा सकता। यह उनके प्राकृतिक आवास में हर स्थिति में कारगर है, जहां बाकी अत्याधुनिक सिस्टम फेल हो जाते हैं।

वैज्ञानिक के लिए रेगिस्तानी चींटी कैसे बनी प्रेरणा?
इस उपलब्धि के बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स के सीनियर लेक्चरर डॉक्टर माइकल मैंगन ने कहा, 'मैं हमेशा से यह सोचकर रोमांचित होता रहा हूं कि कैसे ये कीड़े लंबी दूरी तय कर लेते हैं - एक किलोमीटर तक - ऐसे भयावह परिदृश्य में जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है।'

बदल सकता है अगली पीढ़ी के रोबोट का भविष्य
डॉक्टर मैंगन का कहना है, 'नेक्स्ट जेनरेशन के रोबोट के लिए रेगिस्तानी चींटियां आदर्श प्रेरणा की तरह हैं....वे लंबी दूरी तक नैविगेट करती हैं, मुश्किल वातावरण से गुजरती हैं और अन्य चींटियों, या जीपीएस और 5जी जैसे मौजूदा रोबोटों की तरह फेरोमोन ट्रेल्स पर भरोसा न करें।'

इस खोज से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी की दुनिया बदलने की संभावना पैदा हुई है। क्योंकि, अगर रोबोट के सॉफ्टवेयर में चींटियों की तकनीक फीड कर दिया गया तो यह कमाल कर सकता है। (स्रोत-University of Sheffield )

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+