डेनमार्क की पीएम की ऐतिहासिक भारत यात्रा समाप्त, जानिए क्या हुए समझौते और कितने करीब आए दोनों देश
डेनमार्क की प्रधानमंत्री का तीन दिवसीय भारत दौरा खत्म हो गया है। जानिए इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच क्या क्या समझौते हुए हैं
नई दिल्ली, अक्टूबर 12: डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन की 9 से 11 अक्टूबर 2021 तक भारत की राजकीय यात्रा खत्म हो गई है। कोविड-19 महामारी के बाद भारत की यात्रा करने वाली पहली नेता डेनमार्क की प्रधानमंत्री हैं और भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देश काफी करीब आए हैं और दोनों ही देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिसमें कृषि सेक्टर और छात्रों के लिए रिसर्च काफी महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय नेताओं से मुलाकात
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन के साथ एक उच्च स्तरीय अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी था। भारत और डेनमार्क के बीच द्विपक्षीय आदान-प्रदान में, प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन ने भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात और बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन से मुलाकात की और इस दौरान भारत और डेनमार्क की दोस्ती और प्रगाढ़ करने पर बातचीत की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि, दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच द्विपक्षीय वार्ता गर्मजोशी और मैत्रीपूर्ण माहौल में हुई, जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ साझेदारी को प्रदर्शित करता है। दोनों पक्षों ने सितंबर 2020 में आयोजित वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' में प्रगति की समीक्षा की।

भारत डेनमार्क में समझौते
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, डेनमार्क की प्रधानमंत्री की भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा, कोल्ड चेन, खाद्य प्रोसेसिंग, उर्वरक, मत्स्य पालन, जलीय कृषि जैसे क्षेत्रों सहित कृषि टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने का फैसला लिया है। इसके साथ ही स्मार्ट वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट, वेस्ट टू बेस्ट- वेस्ट से बेस्ट रिसोर्सेज का निर्माण, और कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन जैसे सहयोग के नए क्षेत्रों की भी पहचान की गई। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग का स्वागत किया है। इसके अलावा दोनों देश के नेताओं ने पवन और सौर, जल, शिपिंग और बंदरगाहों, बुनियादी ढांचे और सर्कुलर इकोनॉमी सहित अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में ग्नीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल सॉल्यूशन में चल रही साझेदारी की सराहना की।

भारत में डेनमार्क की 200 कंपनियां
भारत में मौजूद 200 से अधिक डेनिश कंपनियां भारत के प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों जैसे मेक इन इंडिया, जल जीवन मिशन, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, नाममि गंगे योजना को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। डेनिश पीएम ने डेनमार्क में निवेश करने के लिए और अधिक भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक विकास, महामारी के बाद वैश्विक आर्थिक सुधार, भारत-प्रशांत और अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ एफटीए वार्ता को फिर से शुरू करने के फैसले का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि उनपर जल्द से जल्द फैसला हो जाएगा। यात्रा के दौरान ट्रेडिशनल नॉलेज, कौशल विकास, भूजल संसाधनों की मैपिंग और कूलेन्ट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों सरकारों के बीच चार समझौतों पर एमओयू किया गया है। इनके अलावा यात्रा के दौरान 3 वाणिज्यिक समझौते भी किए गये हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री को न्योता
भारत की यात्रा के दौरान डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन ने 2022 में दूसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए कोपेनहेगन आने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निमंत्रण दिया है। वहीं राष्ट्रपति कोविंद ने डेनमार्क की महामहिम रानी मार्गरेट द्वितीय को अगले साल भारत आने का निमंत्रण दिया है।












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