डेनमार्क ने बुर्का और नकाब किया बैन, बाकी यूरोपियन देशों से भी की बैन की अपील
डेनमार्क, यूरोप का नया देश बन गया है जिसने बुर्का और नकाब को बैन कर दिया है। डेनमार्क ने इसके साथ ही बाकी यूरोपियन देशों से भी अपील की है कि वे भी इस इस्लामिक वस्त्र को बैन कर दें। हालांकि डेनमार्क के इस फैसले का मानवाधिकारों के लिए अभियान चला रहे लोगों ने खासा विरोध किया है।
कोपेनहेगेन। डेनमार्क, यूरोप का नया देश बन गया है जिसने बुर्का और नकाब को बैन कर दिया है। डेनमार्क ने इसके साथ ही बाकी यूरोपियन देशों से भी अपील की है कि वे भी इस इस्लामिक वस्त्र को बैन कर दें। हालांकि डेनमार्क के इस फैसले का मानवाधिकारों के लिए अभियान चला रहे लोगों ने खासा विरोध किया है। उनका मानना है कि यह फैसला न तो जरूरी था और न ही उचित है। गुरुवार को डेनमार्क की संसद ने कानून पास किया है और अब इस डेनिश देश में बुर्का और नकाब बैन हो चुका है।

क्या कहा सरकार ने
डेनमार्क की संसद ने 75-30 वोटों के जरिए कानून पास किया और डेनमार्क के सांसदों ने सरकार की ओर से पेश किए बिल को अपनी मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि उसका मकसद किसी भी धर्म को निशाना बनाना नहीं है और न ही यह हेडस्कार्फ, पगड़ी और पारंपरिक यहूदी टोपी को बैन करने का कोई मकसद है। सरकार के कितने भी तर्क हो लेकिन माना जा रहा है कि सरकार की ओर से सीधे तौर पर बुर्का और नकाब को निशाना बनाया गया है जो मुसलमान महिलाओं के लिए जरूरी है। सरकार के इस बैन को 'बुर्का बैन' कहा गया है। डेनमार्क में कुछ मुसलमान महिलाएं पूरे चेहरे को कवर करने वाले नकाब भी पहनती हैं।

छह माह तक की कैद
डेनमार्क के जस्टिस मिनिस्टर सोरेन पैप पोल्सन ने कहा है कि अब यह पुलिस अधिकारियों पर है कि कैसे वे कॉमन सेंस के जरिए कानून तोड़ने वाले लोगों पर एक्शन लेते हैं। यह नया नियम डेनमार्क में एक अगस्त से प्रभावी होगा। नए कानून में लोगों को छूट दी गई है कि किसी खास मकसद जैसे सर्दी या फिर दूसरी कानूनी जरूरतों जैसे मोटरसाइकिल हेलमेट पहनने के लिए अपना चेहरा कवर कर सकते हैं। अगर कोई भी यह नियम तोड़ता हुआ पकड़ा गया तो फिर उसे 118 पौंड या 156 डॉलर जुर्माना देना होगा। बार-बार नियम तोड़ने पर जुर्माना डबल हो सकता है या फिर छह माह की कैद भी हो सकती है।

फ्रांस, ऑस्ट्रिया और बेल्जियम में भी बैन
डेनमार्क से अलग ऑस्ट्रिया, फ्रांस और बेल्जियम में भी इसी तरह के कानून हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल की यूरोप की डायरेक्टर गौरी वैन गुलिक ने डेनमार्क की सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि सभी महिलाओं को उस तरह से कपड़े पहनने का अधिकार होना चाहिए जिसमें उन्हें खुशी मिल सके। साथ ही उन्हें उनके विश्वास और उनकी पहचान को बताने वाले कपड़ों को भी पहनने की आजादी देनी चाहिए। उनका कहना है कि जनता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से चेहरे को ढंकने पर कुछ खास पंबदियां समझ में आती हैं लेकिन पूरी तरह से बुर्का या नकाब को बैन करना न तो जरूरी था और न ही यह उचित है। उन्होंने कहा कि यह नियम धर्म और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है।
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