श्रीलंका में डेल्टा वेरिएंट का नया उपवंश मिला, जानिए भारत की क्यों और कब तक बढ़ सकती है टेंशन?

श्रीलंका में रिसर्चर्स ने शुक्रवार को कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट के एक नए उप-वंश का पता लगाया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनवायरस का तीसरा म्यूटेशन है जो श्रीलंका में उत्पन्न हुआ है।

कोलंबो, नवंबर 20: इस साल अप्रैल और मई महीने में कोरोना वायरस ने भारत को किस हद तक परेशान किया था, उसे लोग जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। अस्पतालों के बाहर बेबस और ऑक्सीजन के लिए परेशान चेहरों को ये देश कभी भूल नहीं पाएगा और भारत में उस तबाही के पीछे कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट जिम्मेदार था और श्रीलंका में डेल्टा वेरिएंट का भी एक उप-वंश मिला है, जिसने लोगों के हाथ-पांव फुला दिए हैं।

डेल्टा वेरिएंट का उपवंश मिला

डेल्टा वेरिएंट का उपवंश मिला

श्रीलंका में रिसर्चर्स ने शुक्रवार को कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट के एक नए उप-वंश का पता लगाया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनवायरस का तीसरा म्यूटेशन है जो श्रीलंका में उत्पन्न हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने वेरिएंट का नाम बी.1.617.2.एवाई.104 रखा है। हालांकि, श्रीलंका के स्वास्थ्यकर्मी ये पता लगाने में नाकाम रहे हैं कि, डेल्टा वेरिएंट का ये उपवंश देश के कितने हिस्से में फैला है और कितने लोग इस नये संस्करण से संक्रमित हुए हैं। हालांकि, रिसर्चर्स ने डेल्टा वेरिएंट के इस नये संस्करण को आगे की जांच के लिए हांगकांग की प्रयोगशाला में भेज दिया है।

श्रीलंकन यूनिवर्सिटी ने लगाया पता

श्रीलंकन यूनिवर्सिटी ने लगाया पता

आपको बता दें कि, श्रीलंका के श्री जयवर्धनेपुरा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने उप-वंश AY-104 का पता लगाया है। यूनिवर्सिटी के मॉल्यूक्यूलर एंड सेल बायोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डा. चंडीमा जीवदरा ने कहा कि, कोरोना वायरस का ये तीसरा उपवंश है, जिसका पता लगाया गया है और ये श्रीलंका में उत्पन्न हुआ है। आपको बता दें कि, जब तक वैज्ञानिक किसी नये वेरिएंट का पता लगाते हैं, तब तक कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ज्यादातर हिस्से में फैल चुका होता है और उसे रोकना काफी मुश्किल हो जाता है।

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    डेल्टा वेरिएंट का नया उप-वंश

    डेल्टा वेरिएंट का नया उप-वंश

    आपको बता दें कि, सार्स सीओवी-2 वायरस का पहला उपवंश बी.411 है, वहीं इसका दूसरा उपवंश वी.1.617.2.एवाई 28 है औऱ इसका तीसरा वेरिएंट, जो अभी श्रीलका में मिला है, उसका नाम वैज्ञानिकों ने बी.1.617.2.एवाई104 है। डेल्टा वेरिएंट काफी ज्यादा संक्रामक संस्करण है और इसका मृत्युदर भी काफी ज्यादा है, जिसकी झलक हम इसी साल भारत में अप्रैल और मई के महीने में देख चुके हैं। सबसे खतरनाक बात ये है कि, टीकाकरण के बाद भी इस वेरिएंट को रोक पाना मुश्किल है। हां, वैज्ञानिक इस बात को लेकर दिलासा जरूर दे रहे हैं कि, वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वाले लोग अगर डेल्टा वेरिएंट के शिकार होते हैं, तो उनके अस्पताल जाने की नौबत नहीं आएगी, लेकिन श्रीलंका में मिले नये उपवंश के और भी ज्यादा खतरनाक होने की आशंका जताई गई है।

    कितने राज्यों में फैला उपवंश

    कितने राज्यों में फैला उपवंश

    श्रीलंका के रिसर्चर्स ने कहा कि, देश के उत्तरी हिस्से में, उत्तर-मध्य में और दक्षिणी प्रांतों में नए संस्करण का पता चला है, जबकि पश्चिमी प्रांत और राजधानी कोलंबो में दूसरे स्ट्रेन का पता चला है। उन्होंने आगे कहा कि एवाई104 से संक्रमित 288 नमूनों की पुष्टि की गई, जबकि 479 मरीजों में एवाई28 वेरिएंट पाए गये हैं। सबसे चिंता की बात ये है कि, रेंडम सैंपलिंग के दौरान एवाई 104 वेरिएंट के मरीज मिले हैं, लिहाजा ये वेरिएंट देश के ज्यादातर हिस्सों में फैल चुका होगा और ये कितना खतरनाक है, इसका पता अगले एक से दो हफ्तों में पता चलने लगेगा। वहीं, श्रीलंका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस वेरिएंट के फैलने के पीछे लोगों के कोविड-19 नियमों के धज्जियां उड़ाने को जिम्मेदार ठहराया है।

    श्रीलंका में वैक्सीनेशन

    श्रीलंका में वैक्सीनेशन

    श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री केहेलिया रामबुक्वेला ने कहा कि, देश में 16 साल से अधिक उम्र के 75 प्रतिशत से ज्यादा को वैक्सीन की एक खुराक और कुल आबादी के 61.8% लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की दोनों खुराकें दी जा चुकी हैं। वहीं, 60 साल से ज्यादा उम्र के एक लाख 60 हजार से ज्यादा लोग शुक्रवार तक फाइजर-बायोएनटेक जैब को तीसरी या बूस्टर खुराक प्राप्त कर चुके हैं। सबसे ज्यादा भारत के लिए चिंता की बात है, क्योंकि भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका है और श्रीलंका के लोगों के लिए भारत की सीमा पूरी तरह से खुली हुई हैं और लोगों का आना-जाना लगातार जारी है। लिहाजा इस बात की आशंका है कि, हो सकता है श्रीलंका में वायरस का जो उपवंश मिला है, वो अभी तक भारत पहुंच चुका है, लिहाजा भारत के लिए सतर्क रहने की बात है।

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