Defence News: भारत का 'Suryaastra' करेगा पाकिस्तान की Fateh-2 को ध्वस्त, रेंज का अंदाजा लगाने में 'शरीफ' पस्त!
Defence News: भारत ने डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग में इतिहास रचने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। देश ने अपना पहला स्वदेशी और यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर लॉन्ग-रेंज रॉकेट लॉन्चर 'सूर्यास्त्र' बना लिया है। यह भारत की डिफेंस कैपेसिटी को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला सिस्टम माना जा रहा है।
भारतीय सेना ने की बड़ी डील
एक अहम घटनाक्रम में भारतीय सेना ने इस अत्याधुनिक रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम को अपनी ताकत में शामिल करने के लिए एनआईबीई लिमिटेड के साथ ₹293 करोड़ का करार किया है। यह सौदा Emergency Procurement Powers के तहत किया गया है, जो बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सेना की डीप-स्ट्राइक क्षमता बढ़ाने की जरूरत को दिखाता है।

क्या है 'सूर्यास्त्र' रॉकेट सिस्टम?
'सूर्यास्त्र' एक सतह से सतह (Surface to Surface) पर मार करने वाला हाई-प्रिसिजन रॉकेट लॉन्चर है। इसे दुश्मन के इलाकों में गहराई तक सटीक हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया एक बेहद एडवांस सिस्टम है। इसे पाकिस्तान की Fateh-II मिसाइल का जबरदस्त काउंटर माना जा रहा है।
सबसे बड़ी खासियत
'सूर्यास्त्र' की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह एक यूनिवर्सल लॉन्चर है। यानी एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग कैलिबर के कई तरह के रॉकेट दागे जा सकते हैं। इससे सेना को रणनीतिक स्तर पर बड़ा ऑपरेशनल फायदा मिलता है और मिशन के हिसाब से हथियार चुनना आसान हो जाता है।
300 किमी तक की मारक क्षमता
इस रॉकेट सिस्टम की मारक क्षमता 150 किमी से 300 किमी तक है। इसकी सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) पांच मीटर से भी कम है, जो इसे दुनिया के सबसे सटीक रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम्स में शामिल करता है। 300 किमी तक की रेंज के साथ 'सूर्यास्त्र' दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला कर सकता है, वो भी भारत की सीमाओं के भीतर रहते हुए। इससे भारत की डिटरेंस क्षमता काफी मजबूत होती है। इसकी कॉलेट्रल डैमेज करने की दर भी काफी कम है।
एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने की ताकत
'सूर्यास्त्र' एक ही समय में कई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। यह अलग-अलग तरह के रॉकेट को सपोर्ट करता है, जिससे मिशन के अनुसार पेलोड चुना जा सकता है। यह कमांड सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब और एयरबेस जैसे हाई-वैल्यू सैन्य ठिकानों को नष्ट करने में बेहद प्रभावी है।
पुणे में होगा स्वदेशी निर्माण
'सूर्यास्त्र' का निर्माण एनआईबीई लिमिटेड अपनी अत्याधुनिक पुणे स्थित फैक्ट्री में करेगा। यह पूरी तरह भारत में बनने वाली प्रणाली होगी, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। नई और आधुनिक तकनीक को शामिल करने के लिए एनआईबीई लिमिटेड ने दुनिया की अग्रणी आर्टिलरी और रॉकेट सिस्टम कंपनी एल्बिट सिस्टम्स (Elbit Systems) के साथ प्रौद्योगिकी सहयोग समझौता (TCA) किया है।
'मेक इन इंडिया + स्मार्ट टेक्नोलॉजी' मॉडल
इस सहयोग के तहत जरूरी तकनीकें साझेदारी से हासिल की जाएंगी, लेकिन उत्पादन, असेंबली और भविष्य के अपग्रेड भारत में ही होंगे। यह भारत की उस रक्षा रणनीति को दिखाता है, जिसमें सीमित विदेशी तकनीक के साथ मजबूत स्वदेशी उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है।
क्या हैं आपातकालीन खरीद शक्तियां?
आपातकालीन खरीद शक्तियां भारतीय सशस्त्र बलों को ₹300 करोड़ तक की खरीद लंबी मंजूरी प्रक्रिया के बिना तेजी से करने की अनुमति देती हैं। इनका इस्तेमाल तब होता है, जब सेना की ऑपरेशनल तैयारी तुरंत बढ़ानी जरूरी हो।
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