बड़ी टेंशन खत्म: पृथ्वी पर एस्टेरॉयड नहीं मचा सकेंगे तबाही, अंतरिक्ष में इस तरह लगाया जाएगा ठिकाने

नई दिल्ली, 14 जुलाई: पृथ्वी पर हमेशा एस्टेरॉयड के टकराने का खतरा बना रहता है। आए दिन आप टेलीविजन पर इससे जुड़ी न्यूज भी देखते होंगे। फिलहाल इस दशक में अभी तक कोई बड़ा एस्टेरॉयड धरती से नहीं टकराया है, लेकिन भविष्य में ऐसा कभी भी हो सकता है। जिसके लिए वैज्ञानिक पहले से तैयारी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने एस्टेरॉयड से बचने की एक शानदार तरकीब खोज निकाली है।

सैटेलाइट का लिया जाएगा सहारा

सैटेलाइट का लिया जाएगा सहारा

वैसे एक प्लान ये है कि अगर वक्त रहते पता चल जाए तो रॉकेट दागकर एस्टेरॉयड की दिशा बदली जा सकती है, लेकिन कई बार जब एस्टेरॉयड एकदम पास आ जाता है तो इस तरह के कदम नहीं उठाए जा सकते हैं। ऐसे हालात में वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद सैटेलाइट्स का सहारा लेने का प्लान बनाया है। यूरोपियन एयरोस्पेस कंपनी एयरबस ने इस टॉपिक पर एक अध्ययन भी किया। साथ ही उससे जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की।

बदल देंगे एस्टेरॉयड का रास्ता

बदल देंगे एस्टेरॉयड का रास्ता

रिपोर्ट के मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में सैकड़ों सैटेलाइट पहले से मौजूद हैं, जो संचार का काम करते हैं। उसमें कामभर का ईंधन भी मौजूद रहता है। ऐसे में अगर कोई खतरनाक और बड़े आकार का एस्टेरॉयड पृथ्वी को ओर आ रहा है, तो किसी सैटेलाइट की दिशा को बदलकर उन्हें एस्टेरॉयड की ओर भेजना होगा। जिससे दोनों की टक्कर होगी और एस्टेरॉयड अपना रास्ता बदल देगा। यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने इस थ्योरी को मान्यता भी दे दी है। साथ ही उम्मीद जताई कि जब भी भविष्य में ऐसी स्थिति बनेगी तो कम्यूनिकेशन सैटेलाइट की मदद ली जाएगी।

कितना होता है सैटेलाइट का वजह?

कितना होता है सैटेलाइट का वजह?

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि कम्यूनिकेशन सैटेलाइट 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। साथ ही उनका वजन 4-6 टन के आसपास होता है। ऐसे में अगर सही एंगल पर उन्हें एस्टेरॉयड की ओर भेजा जाए, तो वो इतनी ताकत रखते हैं कि उसकी दिशा बदल दें। वहीं अगर बहुत पहले ही एस्टेरॉयड को ट्रैक कर लिया जाए तो फिर रॉकेट लॉन्च करने का विकल्प है।

मार्च में गुजरा था बड़ा एस्टेरॉयड

मार्च में गुजरा था बड़ा एस्टेरॉयड

मार्च में 2001 FO32 नाम का एक एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब से गुजरा था। जिसका व्यास 8 इंच और लंबाई 996 मीटर के करीब था। नासा के मुताबिक ये एस्टेरॉयड एफिल टावर से तीन गुना बड़ा था। जिस वजह से उसे सबसे खतरनाक श्रेणी में रखा गया। हालांकि इस बार वो बिना किसी नुकसान के गुजर गया।

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