WHO के वैज्ञानिक का दावा-कोरोना अभी शुरुआती दौर में, बुरा वक्त आना बाकी

नई दिल्ली। भारत में कोविड-19 के 90,123 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या 50,0000 के आंकड़े को पार कर गई। देश में केवल 11 दिन के अंदर मामले 40 लाख से बढ़कर 50 लाख के पार चले गए हैं। पूरी दुनिया में कोरोना के मामले 3 करोड़ के करीब पहुंचने वाले है। वहीं 9 लाख 38 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी बीच डब्ल्यूएचओ से जुड़े दुनिया के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेविड नाब्ररो ने कोरोना को लेकर दुनिया अभी कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में ही है | इससे भी बुरा वक्त आना बाकी है, यह साइंस फिक्शन से भी भयावह होगा।

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    'कोरोना वायरस को लेकर चिंता मुक्त होने से बड़ा नुकसान हो सकता है'

    'कोरोना वायरस को लेकर चिंता मुक्त होने से बड़ा नुकसान हो सकता है'

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष प्रतिनिधि हैं और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित इंपेरियल कॉलेज लंदन इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन के को-डायरेक्टर डेविड नाब्ररो ने ब्रिटेन की संसद की हाउस ऑफ कॉमन्स फॉरेन अफेयर्स कमेटी को बताया है कि फिलहाल कोरोना वायरस को लेकर चिंता मुक्त होने से बड़ा नुकसान हो सकता है। यह वास्तव में गंभीर है। हम अभी तक इसके बीच में भी नहीं हैं।

     'यह किसी साइंस फिक्शन मूवी से भी खराब स्थित है'

    'यह किसी साइंस फिक्शन मूवी से भी खराब स्थित है'

    उन्होंने संसद को बताया कि, दुनियाभर में वायरस से आने वाली परेशानियों की ये शुरुआत है। मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि यह वास्तव में नकारात्मक प्रभाव डालने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रकोप साइंस फिक्शन की किसी कहानी से भी बदतर है, और यूरोप में मामलों के रूप में और बुरा साबित हो रहा है। डेविड ने खासकर यूरोप को लेकर कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर आने पर यहां हालात बिगड़ सकते हैं।

    कोरोना से दुनिया को होगा बड़ा आर्थिक नुकसान: डेविड

    कोरोना से दुनिया को होगा बड़ा आर्थिक नुकसान: डेविड

    डेविड ने कहा कि ये वक्त राहत की सांस लेने का नहीं बल्कि आने वाली बड़ी तबाही के लिए तैयार रहने का है। डेविड ने ब्रिटेन के सांसदों को बताया कि चूंकि कोरोना वायरस बेकाबू हो गया था, इसलिए अब वैश्विक इकोनॉमी में न सिर्फ मंदी बल्कि इसके सिकुड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। एक बड़ा आर्थिक संकुचन जो शायद गरीब लोगों की संख्या को दोगुना कर देगा। कुपोषितों की संख्या को दोगुना कर देगा। उन्होंने कहा कि कोरोनोवायरस महामारी का दुनिया भर में युवाओं के जीवन और शिक्षा पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इन युवाओं की भविष्य की आजीविका जोखिम में है।

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