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रुक सकती है अटलांटिक महासागर की धारा, शोध में तबाही की ओर इशारा, 'धरती के हर इंसान पर पड़ेगा असर'

अटलांटिक महासागर की धाराओं की एक प्रमुख प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है। यह 2025 से लेकर इस सदी के मध्य तक कभी भी हो सकता है। मंगलवार को जर्नल नेचर में प्रकाशित एक शोध के नतीजे से यह बात उजागर हुई है।

इसके मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से अटलांटिक मेरिडीओनल ओवरटर्निग सर्कुलेशन (एएमओसी) के साथ ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से गर्म पानी को बहाकर उत्तरी अटलांटिक में पहुंचाने वाली महासागरीय धाराओं की एक विशाल प्रणाली है।

atlantic ocean may collapse

धरती के हर क्षेत्र में बदल सकता है मौसम-शोध
अगर यह महासागरीय धाराएं रुक जाती हैं, तो इसकी वजह से अमेरिका, यूरोप और अन्य महादेशों में भी बड़े पैमाने पर मौसमी बदलावों से जुड़े संकटों का सामना करना पड़ सकता है। अगर ऐसी स्थिति पैदा हुई तो यूरोप में हिमयुग आ सकता है और बोस्टन, न्यूयॉर्क जैसे शहरों को समुद्र के स्तर में बढ़ोतरी की वजह से आने वाले संकट का सामना करना पड़ सकता है।

यही नहीं, इसके चलते अमेरिका के पूर्वी तटों पर भयानक तूफान और बवंडर पैदा हो सकते हैं। इस शोधपत्र के लेखकों का कहना है कि इसकी वजह के मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी में भी भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह जलवायु परिवर्तन के भयानक प्रभावों में से एक साबित हो सकता है।

समय से पहले आ सकती है तबाही- वैज्ञानिक
कुछ वैज्ञानिक जो इस शोध के हिस्सा नहीं थे, उन्होंने सीएनएन से कहा है कि इस महत्वपूर्ण प्रणाली का असल टिपिंग प्वाइंट स्पष्ट नहीं है; और धाराओं के अबतक का आकलन बहुत कम रुझान और बदलाव दिखा रहा है। लेकिन, वह इस बात से सहमत हैं कि शोध का नतीजा भयानक है और नए साक्ष्यों से लगता है कि इसका टिपिंग प्वाइंट सोच से कहीं पहले देखने को मिल सकता है।

कन्वेयर बेल्ट की तरह काम करती है एएमओसी
एएमओसी समुद्री जल धाराओं की एक बहुत ही जटिल प्रणाली है, जो बहुत ही विशाल वैश्विक कन्वेयर बेल्ट की तरह काम करती है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्म पानी उत्तरी अटलांटिक तक पहुंचने के बाद वह वहां ठंडा और खारा हो जाता है। फिर दक्षिण की ओर फैलने से पहले यह समुद्र की गहराइयों में चला जाता है।

मानसूनी पैटर्न में उथल-पुथल मचने की आशंका
इस तरह से एएमओसी जलवायु प्रणाली को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। इससे वैश्विक मौसमी पैटर्न निर्धारण में मदद मिलती है। यही वजह है कि इसके ध्वस्त हो जाने का अंजाम भयानक हो सकता है। अमेरिका और यूरोप के लिए जो आशंकाएं ऊपर जाहिर की गई हैं, उसके अलावे इसकी वजह से उष्णकटिबंधीय इलाकों में मानसूनी पैटर्न में भी उथल-पुथल मच सकता है।

12,000 साल पहले पैदा हो चुकी है यह भयानक परिस्थिति
दरअसल, महासागर जैसे-जैसे गर्म होते हैं, बर्फ पिघलने लगती है, जिससे ताजा पानी ज्यादा मात्रा समुद्र में बहता है और पानी का घनत्व कम होने लगता है। जब पानी बहुत ज्यादा ताजा और गर्म दोनों हो जाता है, तो कन्वेयर बेल्ट काम करना बंद कर देती है। अतीत में यह हो भी चुका है। 12,000 साल से भी पहले तेजी से ग्लेशियर पिघलने के चलते एएमओसी ठहर गई थी, जिसके चलते एक दशक के अंदर उत्तरी गोलार्द्ध में तापमान में 10 से 15 डिग्री का उतार-चढ़ाव दर्ज होने लगा था।

धरती के हर इंसान को प्रभावित करेगा-वैज्ञानिक
इस शोध के नतीजों को देखने के बाद वूड्स होल ओशनोग्रैफिक इंस्टीट्यूशन के प्रेसिडेंट पीटर डी मेनोकल ने आशंका जताई है कि एएमओसी का ध्वस्त होना 'धरती के हर इंसान को प्रभावित करेगा- यह इतना बड़ा और महत्वपूर्ण है।'

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