Cryopreserved क्या है ? 199 लोगों के लिए मौत 'ठहर' गयी है, 1400 इंसान हैं कतार में
Cryopreserved:अमेरिका के एरिजोना क्रायोनिक्स फैसिलिटी में 199 लोगों के शरीर और ब्रेन को लिक्विड नाइट्रोजन से भरे टैंक में प्रिजर्व करके रखा गया है। ऐसा कब तक रहेगा, यह कोई नहीं कह सकता। जिन लोगों के भी शरीर या ब्रेन को प्रिजर्व किया गया है, उन सबकी मौत किसी ना किसी लाइलाज बीमारियों की वजह से हुई थी। उनके शरीरों को इसलिए संरक्षित करके रखा गया है, क्योंकि वह खुद ही या उनके परिवार वालों ने यह विकल्प चुना है। ऐसा करने का मकसद ये है कि जब भविष्य में अभी की लाइलाज बीमारी का उपचार संभव होगा तो उन शरीरों में जान 'फूंकने' की कोशिश होगी! यह सब अभी बहुत ही असंभव लग रहा है, लेकिन इस मिशन में लगे लोग भविष्य को लेकर बहुत ही आशांवित लग रहे हैं। इसलिए, 1,400 और लोग भी हैं, जिन्होंने क्रायोप्रिजर्वेशन के लिए अपना नाम दर्ज करवा रखा है।

199 लोगों के लिए मौत 'ठहर' गयी है
क्रायोप्रिजर्वेशन के लिए अमेरिका के एरिजोना में जिन 199 लोगों ने अपने शरीर और ब्रेन को लिक्विड नाइट्रोजन में सुरक्षित रखकर मौत और वक्त को 'रोके' रखने का विकल्प चुना है। उनका मकसद ये है कि भविष्य में विज्ञान जब और ज्यादा तरक्की करेगा तो उस शरीर और ब्रेन को फिर से जिंदा किया जा सकता है। विदेशी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों के लिए भी यह प्रक्रिया अपनाई गई है, वे किसी ना किसी गंभीर रोग से पीड़ित थे, जो मौजूदा समय में लाइलाज रोग हैं। एल्कोर लाइफ एक्टेंशन फाउंडेशन के मुताबिक इन मरीजों में से बहुत सारे कैंसर, एएलएस (amyotrophic lateral sclerosis) या अन्य ऐसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जिनका इलाज अभी उपलब्ध नहीं हो सका है।

2 साल की मासूम का शरीर सबसे पहले प्रिजर्व किया गया
थाईलैंड की मासूम बच्ची मैथेरिन नाओवारात्पोंग क्रायोप्रिजर्व की जाने वाली सबसे कम उम्र की मरीज थी। उसे ब्रेन कैंसर था और दो साल की उम्र में ही 2015 में उसके शरीर को संरक्षित किया गया था। एल्कोर के चीफ एग्जिक्यूटिव मैक्स मोरे ने कहा, 'उसके माता-पिता दोनों डॉक्टर थे और उसकी कई सारी ब्रेन सर्जरी की गई, लेकिन, दुर्भाग्य से कुछ भी काम नहीं किया। इसलिए उन्होंने हमसे संपर्क किया था।' यह संगठन खुद को नॉन-प्रॉफिट संगठन होने का दावा करने के साथ ही क्रायोनिक्स में खुद को वर्ल्ड लीडर मानता है। बिटकॉइन के अगुवा हैल फिन्नी एल्कोर एक और ऐसे ही मरीज हैं। 2014 में एएलएस से उनकी मौत हो गई थी और तबसे उनके शरीर को क्रायोप्रिजर्व करके रखा गया है।

क्या है क्रायोप्रिजर्वेशन की प्रक्रिया ?
क्रायोप्रिजर्वेशन की प्रक्रिया तब शुरू होती है, जब कानूनी तौर पर किसी व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया जाता है। पहले मरीज के शरीर से खून और बाकी द्रव निकाल लिया जाता है और फिर उसे ऐसे केमिकल से भर दिया जाता है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले बर्फ के क्रिस्टल का निर्माण न होने दे। तब बहुत ही सर्द तापमान में विट्रिफाई किए हुए मरीजों को एरिजोना के एल्कोर फैसिलिटी में लिक्विड नाइट्रोजन से भरे टैंक में रखा जाता है। मोरे के मुताबिक, 'यह तबतक के लिए है, जबतक नई तकनीक विकसित हो।'

1,400 जिंदा सदस्य भी क्रायोप्रिजर्वेशन की कतार में हैं
लेकिन, शरीर और ब्रेन को इस तरह अनिश्चितकाल के लिए सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर लागत आती है। मसलन, मानव शरीर को सुरक्षित रखने पर न्यूनतम 2,00,000 डॉलर या 1.64 करोड़ रुपए और सिर्फ ब्रेन को प्रिजर्व करके रखने की न्यूनतम लागत 80,000 डॉलर या 65.86 लाख रुपए है। मोरे ने यह भी जानकारी दी है कि एल्कोर के लगभग 1,400 जिंदा सदस्य भी है, जिससे कंपनी को जीवन बीमा पॉलिसी का फायदा मिल रहा है, जो कि लागत के बराबर है।

भविष्य में फिर से जिंदा हो सकते हैं इंसान ?
मोरे की पत्नी नताशा वीटा मोरे इस मौत को 'रोके' रखने वाली प्रक्रिया की तुलना भविष्य की यात्रा से करती हैं। उनका कहना है, 'बीमारी या जख्म ठीक हो सकता है या उसका हल निकल सकता है और व्यक्ति के शरीर का क्लोन बन सकता है, एक तरह से पूरा शरीर रीऐनिमेटेड किया जा सकता है, जिससे वे अपने दोस्तों से फिर मिल सकते हैं।'
'यह खयाल सुंदर साइंस फिक्शन है'
लेकिन, कई सारे मेडिकल प्रोफेशनल इस प्रक्रिया से सहमत नहीं हैं। यह बात न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के मेडिकल एथिक्स डिविजन के प्रमुख अर्थर कैप्लान ने कही है। उन्होंने कहा, 'अपने आपको भविष्य के लिए फ्रीज करने का यह खयाल सुंदर साइंस फिक्शन और अनुभवहीन है।' उनका कहना है कि 'सिर्फ वही ग्रुप....इस संभावना से उत्साहित हो रहा है, जो बहुत दूर के भविष्य का विशेष अध्ययन कर रहा है या जो लोग आपसे चाहते हैं कि इसके लिए आप पैसे खर्च करें।' (तस्वीरें सौजन्य: रॉयटर्स ट्विटर वीडियो)
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