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तापमान बढ़ने से पक्षियों पर संकट, प्रजनन में आ रही दिक्कत से चिंता में वैज्ञानिक

वैश्विक स्तर पर तापमान में बढ़ोतरी होने के परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं, वह एक नए शोध से पता चला है। इसके मुताबिक तापमान बढ़ते जाने की वजह से स्थिति ऐसी हो चुकी है कि पक्षियों के सामने प्रजनन का संकट खड़ा हो रहा है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से तापमान में हो रही बढ़ोतरी के चलते पक्षियों के लिए यह तय कर पाना चुनौतिपूर्ण हो चुका है कि कब वसंत है, ताकि वह प्रजनन कर सकें।

global warming and problems in birds breeding

घटती जा सकती है पक्षियों की आबादी-शोध
पक्षियों में पैदा हो रहे इस अजीब संकट को लेकर हुआ यह शोध 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकैडमी ऑफ साइंस' जर्नल में प्रकाशित हुआ है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी और यूसीएलए के वैज्ञानिकों की अगुवाई में हुई रिसर्च में पता चला है कि अगर पक्षियां सीजन से काफी पहले या काफी बाद में प्रजनन शुरू करें तो उनकी बच्चों की संख्या कम होती जाएगी।

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तापमान बढ़ने से प्रजनन की बढ़ेगी परेशानी-शोध
एक्सपर्ट के मुताबिक पक्षियां जलवायु परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने में नाकाम हो रही हैं, जिसकी वजह से वसंत वाली स्थिति समय से पहले पैदा होने लगी है। इस शोध पत्र के लेखकों ने चिंता जताई है कि यदि वसंद और पक्षियों के प्रजनन की प्रक्रिया के शुरू होने में अंतर होगा तो जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगा, उनकी पैदा करने की क्षमता प्रभावित होती जाएगी। इसका पक्षियों की कई प्रजातियों पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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समय से पहले शुरू हो रहा है वसंत
पतझर के बाद जब पेड़ों में नई पत्तियां आती हैं और फूल खिल उठते हैं, तभी पक्षियों के प्रजनन का मौसम भी शुरू होता है। लेकिन, तापमान में बढ़ोतरी होते जाने से यह मौसमी परिस्थितियां समय से पहले ही होने लगी हैं। इस शोध पत्र के पहले लेखक केसी यंगफ्लेश के मुताबिक, '21वीं सदी के अंत तक संभावना है कि वसंत 24 दिन पहले आ जाएगा, जबकि पक्षियां इससे करीब 6.75 दिन पहले प्रजनन करते हैं।'

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सॉन्गबर्ड में 12% घट सकती है ब्रीडिंग प्रोडक्टिविटी -शोधकर्ता
उन्होंने कहा है 'हमारे नतीजे बताते हैं कि सॉन्गबर्ड की प्रजातियों में ब्रीडिंग प्रोडक्टिविटी करीब 12% घट सकती है।' इस शोध पत्र के वरिष्ठ लेखकर और यूसीएलए में इकोलॉजी और इवॉल्यूशनरी बायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर मॉर्गन टिंगले ने कहा कि इस आशंका की परिकल्पना वैज्ञानिक करीब तीन दशकों से कर रहे थे।

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पक्षियों के बच्चों के लिए टाइमिंग महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा, 'वैसे इस घटना को लेकर कुछ ही अच्छे अध्य्यन हैं,यह एक बड़ा रहस्य बना हुआ है कि क्या आगे वसंत के पहले आने से अधिकांश प्रजातियों के लिए एक सामान्य समस्या पैदा होगी।' मुश्किल ये है कि बच्चों को पालने के लिए पक्षियों के लिए टाइमिंग बहुत मायने रखती है। अगर वह समय से काफी पहले या देर से प्रजनन करेंगे तो उनके अंडे और नवजात कठोर मौसम की चपेट में आ सकते हैं।

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यही नहीं अपने बच्चों के लिए दाना जुटाने में भी पक्षियों के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है। अगर पक्षियों के बच्चों के लिए दाने की जरूरत उसकी प्राकृतिक उपलब्धता से पहले या देर से होगी तो उसकी मां कहां से जुटा पाएगी। इसका बहुत ही दूरगामी असर पड़ सकता है।

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इस रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने उत्तर अमेरिका के करीब 179 जगहों पर 41 प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के 2001 से लेकर 2018 तक जुटाए गए डेटा का विश्लेषण किया है। टिंगले के मुताबिक, '1970 से उत्तर अमेरिका अपने करीब एक-तिहाई पक्षियों की आबादी को खो चुका है।' उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पक्षियों की आबादी और भी गंभीर संकट में पड़ जाए, उससे पहले इनकी जनसंख्या बढ़ाने के लिए कुछ ठोस रणनीति पर फोकस करने की आवश्यकता है।

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