चीन के 23 शहरों में कोविड लॉकडाउन, 19 करोड़ से ज्यादा आबादी प्रभावित, इलाज के तलाशे जा रहे हैं विकल्प
शंघाई, 5 अप्रैल: चीन की बहु-प्रचारित जीरो कोविड पॉलिसी फेल होती दिख रही है। शंघाई जैसे बड़े शहर में 2.5 करोड़ से ज्यादा आबादी सख्त पाबंदियों की गिरफ्त में है। कुल मिलाकर चीन की 19 करोड़ से अधिक आबादी कम या ज्यादा लॉकडाउन की वजह से घरों में रहने को मजबूर है। चीन खुद मान रहा है कि 2019 के आखिर और 2020 की शुरुआत में जो हालात वुहान में नहीं देखे थे, वह आज देखना पड़ रहा है। हालांकि, दो साल का अनुभव जरूर काम आ रहा है, जिससे संक्रमण तो फैल रहा है, लेकिन बीमारी की गंभीरता फिर भी नियंत्रिण में होने का दावा किया जा रहा है।

चीन के 23 शहरों में लॉकडाउन
चीन के लगभग 23 शहरों में कोविड-19 महामारी की वजह से पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लगा दिया गया है। कोरोना वायरस को नियंत्रित करने किए लगाए गए लॉकडाउन के चलते 19.3 करोड़ की आबादी प्रभावित हो रही है। रॉयटर ने नोमुरा ब्रोकेज के हवाले से बताया है कि चीन का जितना बड़ा इलाका इस समय कोविड की चपेट में है, वह देश की जीडीपी में 13.6% का भागीदार है। सरकारी मीडिया के मुताबिक अकेले शंघाई में हजारों स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है। शिन्हुआ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 50,000 कर्मियों को सिर्फ स्वैब सैंपल लेने के लिए पूरे शहर में उतार दिया गया था और उन्होंने मंगलवार सुबह तक न्यूकलिक एसिड टेस्टिंग का काम पूरा किया है।

शंघाई में लॉकडाउन जारी रहना तय
शंघाई में लगाया गया दो चरणों वाला लॉकडाउन मंगलवार को ही खत्म किया जाना था, लेकिन शहर में 13,354 नए संक्रमण आने के बाद इसका जारी रहना तय है। यह रिकॉर्ड संक्रमण है, जो कि महामारी की शुरुआत के बाद से सबसे ज्यादा है। फिलहाल यह तय लग रहा है कि करीब 2.5 करोड़ की आबादी वाले चीन के महत्वपूर्ण शहर शंघाई में पाबंदियां अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेंगी। पहले यहां शहर को पूर्वी और पश्चिमी भाग में बांट कर उपाय अपनाए गए थे। 2019 के अंत में वुहान में कोविड-19 महामारी की पैदाइश होने के बाद से शंघाई सबसे बड़ा शहर है, जो लॉकडाउन की चपेट में है।
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चीन की कोविड रणनीति पर सवाल
अगर चीन के पूरे मेनलैंड की बात करें तो कुल 16,412 नए इंफेक्शन के मामले सामने आए हैं और यह भी 2020 की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक हैं। कोविड के ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमण की वजह से अकेले शंघाई में 15 प्रांतों से 38,000 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी उतर चुके हैं। चीन का यह वित्तीय केंद्र 2019 के आखिर में सेंट्रल चीन के वुहान में इस वायरस के पहले प्रकोप के सामने के बाद सबसे मुश्किल संकट से जूझ रहा है। यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत ज्यादा दबाव झेल रही है और चीन के बहु-प्रचारित कोरोना कंट्रोल पॉलिसी पर सवाल उठने लगे हैं।

चीन की परंपरागत दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं लोग
मंगलवार को शंघाई के बड़े सरकारी अधिकारी गु होंघुऊई ने कहा, 'महामारी (शंघाई में) अभी भी अपने पीक दौर में है और हालात बहुत ही ज्यादा गंभीर हैं।' हेल्थ सिस्टम पर बढ़े हुए दबाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आवासीय इलाकों में स्थानीय स्तर पर परंपरागत चीनी दवाइयों के पैकेट का वितरण शुरू कर दिया गया है, ताकि कम से कम बुखार जैसे लक्षणों से छुटकारा मिल सके। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आने वाले दिनों में ज्यादा मरीजों के इलाज की व्यवस्था दुरुस्त करने में भी जुट गए हैं। पहले से जो कोविड के उपचार के लिए 47,700 बेड के इंतजाम हैं, इनके अलावा 30,000 अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जा रही है।

वुहान से ज्यादा बड़ा संकट
संदिग्ध संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए होटलों, स्टेडियम और कॉन्फ्रेंस हॉल में ही टेस्ट की व्यवस्था की गई है। होंघुऊई के मुताबिक, 'पहली बार 10,000 से ज्यादा मामले (शंघाई में) सामने आए हैं, जो कि कुल 13,354 है। मार्च से शुरू हुई महामारी की इस लहर में 73,000 से ज्यादा पॉजिटिव केस दर्ज किए गए हैं।' चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक शंघाई में महामारी का ताजा प्रकोप वुहान से ज्यादा बड़ा है। हालांकि, दावे के मुताबिक यह वुहान जितना गंभीर नहीं है, क्योंकि वायरस के प्रति अनुभव में इजाफा हुआ है।












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