कोरोना वायरसः क्या अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव टालना होगा? विकल्प क्या हैं?

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एक तरफ़ कोरोना वायरस महामारी ने अमरीकी अर्थव्यवस्था की धार कुंद कर दी है तो दूसरी तरफ़ ये डर भी अब लोगों को सताने लगा है कि चुनावी साल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का क्या होगा.

अमरीका में प्राइमरी चुनाव में देरी हो रही है या रोक दी गई हैं. पोलिंग स्टेशन बंद हैं और किसी की ग़ैरहाज़िरी में होने वाली मतदान प्रक्रिया को संदेहास्पद बना दिया गया है.

राजनेता विधायिका और अदालतों में चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर एक कलहप्रिय लड़ाई में उलझ कर रह गए हैं.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस नवंबर में नए राष्ट्रपति, कांग्रेस की ज़्यादातर सीटों और प्रांतीय सरकारों की हज़ारों सीटों के लिए चुनाव होने हैं.

चुनाव का दिन कैसा होगा? और चुनाव वक़्त पर होंगे भी या नहीं? इन सवालों पर अमरीकी लोगों के बीच लगातार बहस जारी है.

बीबीसी ने ऐसे ही कुछ प्रमुख सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की है.

क्या राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव टाल भी सकते हैं?

अभी तक 15 राज्यों ने अपने यहां राष्ट्रपति चुनाव से पहले होने वाले प्राइमरी चुनाव टाल दिए हैं. इनमें से ज़्यादातर ने इन चुनावों को जून तक के लिए टाला है.

लेकिन इससे जुड़ा सबसे अहम सवाल ये है कि क्या नवंबर में निर्धारित राष्ट्रपति चुनाव भी टाले जा सकते हैं?

साल 1845 के क़ानून के तहत अमरीका में हर चार साल पर नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होता है.

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इस साल ये तारीख़ तीन नवंबर को पड़ रही है. इसमें किसी बदलाव के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी.

कांग्रेस की मंजूरी का मतलब हुआ कि डेमोक्रेटिक पार्टी के वर्चस्व वाले हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स और रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाले सीनेट से ये प्रस्ताव पारित कराना होगा.

क्या कहता है अमरीकी संविधान

राष्ट्रपति चुनाव टालने के मुद्दे पर दोनों ही पार्टियों के बीच सहमति की संभावना बहुत कम है.

अगर चुनाव की तारीख़ बदल भी दी जाती है तो एक दूसरी मुश्किल से निपटना होगा. वो ये है कि अमरीकी संविधान किसी राष्ट्रपति के लिए केवल चार साल का कार्यकाल तय करती है.

दूसरे शब्दों में कहें तो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का पहला कार्यकाल 21 जनवरी, 2021 की दोपहर ख़त्म हो जाएगा.

अगर वे दोबारा से निर्वाचित होते हैं तो उन्हें चार साल का एक और कार्यकाल मिलेगा. अगर ट्रंप चुनाव हारते हैं तो डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता जोए बाइडेन उनकी जगह लेंगे.

लेकिन समय तेज़ी से निकल रहा है और चुनाव टालने का फ़ैसला भी आने वाली राजनीतिक परिस्थिति को नहीं बदल सकता है.

अगर चुनाव की तारीख़ बढ़ गई तो...

नए प्रशासन की शुरुआत से पहले अगर अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव नहीं हुए तो उत्तराधिकार की दूसरी क़तार पर सबकी नज़रें चली जाएंगी.

इस क़तार में सबसे पहला नाम आता है उपराष्ट्रपति माइक पेंस का. लेकिन माइक पेंस के साथ भी समस्या ये है कि उनका कार्यकाल राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ही ख़त्म हो रहा है.

उत्तराधिकार की इस क़तार में तीसरा नाम है हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी का लेकिन उनका दो साल का कार्यकाल इस दिसंबर में ख़त्म हो रहा है.

ऐसे 'कयामत' के हालात में राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता रखने वाले सबसे सीनियर शख़्स हैं 86 वर्षीय रिपब्लिकन चक ग्रासली. वे आयोवा राज्य से हैं और इस समय सीनेट के प्रोटेम प्रेजिडेंट हैं.

रिपब्लिकन पार्टी को उम्मीद है कि सीनेट के 100 सीटों में से एक तिहाई के ख़ाली हो जाने के बाद यहां उनका नियंत्रण बना रहेगा.

क्या कोरोना वायरस चुनाव में बाधा पहुंचा सकता है?

भले ही राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की निर्धारित तारीख़ में किसी सीधे बदलाव की संभावना न के बराबर हो लेकन इसका मतलब ये भी नहीं है कि चुनावी प्रक्रिया पर कोई अहम ख़तरा नहीं है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया इरवाइन के प्रोफ़ेसर रिचर्ड एल हैसन चुनावी क़ानूनों के जानकार भी हैं.

प्रोफ़ेसर रिचर्ड की राय में ट्रंप प्रशासन और प्रांतीय सरकारों को ये आपातकालीन अधिकार हैं कि वे मतदान केंद्रों की जगहों में आमूलचूल बदलाव कर सकते हैं और इसके इस्तेमाल के बारे में विचार कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए हाल ही में संपन्न गुए विस्कॉन्सिन प्राइमरी चुनाव में कोरोना वायरस से संक्रमण की चिंताएं थीं. चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने वाले वॉलंटियर्स कम पड़ गए थे, इलेक्शन की ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति नहीं हो पाई थी. इसका नतीज़ा ये हुआ कि विस्कॉन्सिन के सबसे बड़े शहर मिल्वाकी के 180 में से 175 मतदान केंद्र बंद कर दिए गए.

अगर ऐसे क़दम राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर उठाए गए तो विरोधियों के वर्चस्व वाले इलाक़ों को निशाना बनाया जा सकता है और इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है.

क्या अमरीकी राज्य चुनाव परिणाम को चुनौती दे सकते हैं?

प्रोफ़ेसर रिचर्ड कहते हैं कि ये एक असाधारण स्थिति होगी, हालांकि इसकी संभावना कम ही है. राज्यों की विधायिका कोरोना वायरस से संक्रमण का हवाला देकर ये तय करने का अधिकार अपने पास ले सकती हैं कि कौन सा उम्मीदवार उनके राज्य से विजयी घोषित किया जाएगा.

राज्यों पर ऐसी कोई संविधानिक बाध्यता नहीं है कि वो उनके प्रांत में बहुमत का समर्थन पाने वाले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ही समर्थन करें या राष्ट्रपति पद के लिए किसी भी सूरत में चुनाव कराए हीं.

सब कुछ अमरीकी चुनावों की महत्वपूर्ण और ज़माने से चली आ रही इलेक्टोरल कॉलेज (निर्वाचक मंडल) की व्यवस्था पर निर्भर करेगा. इस इलेक्टोरल कॉलेज में राज्यों के निर्वाचक होते हैं जो राष्ट्रपति पद के लिए अपना वोट देते हैं. सामान्य परिस्थितियों में ये निर्वाचक (तकरीबन हमेशा ही) उनके राज्यों में लोकप्रिय वोटों का बहुमत पाने वाले उम्मीदवार को अपना समर्थन देते हैं.

लेकिन ये ज़रूरी नहीं है कि चीज़ें हमेशा इसी तरीक़े से हों. उदाहरण के लिए साल 1800 के चुनाव में कई राज्य विधानमंडलों ने अपने निर्वाचकों से वोट देने को लेकर निर्देश दिए थे. अगर ऐसा हुआ तो लोकप्रिय उम्मीदवार के किए-कराए पर पानी फिर जाएगा.

अगर कोई राज्य इतना कड़ा क़दम उठाता है तो प्रोफ़ेसर रिचर्ड की राय में लोग सड़कों पर विरोध का झंडा लिए उतर जाएंगे.

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क्या कोई क़ानूनी चुनौती भी है?

आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया में किस तरह की रुकावट आने वाली है, इसका अंदाजा विस्कॉन्सिन प्राइमरी के हालिया अनुभव से लगाया जा सकता है. विस्कॉन्सिन प्राइमरी में लोगों ने गिने-चुने मतदान केंद्रों पर वोटिंग के लिए लंबी कतारें देखीं जहां पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट्स पहने नेशनल गार्ड्स के जवान और चुनावी वॉलंटियर्स तैनात थे.

प्राइमरी इलेक्शन के पहले तक विस्कॉन्सिन में डेमोक्रेटिक गवर्नर टोनी एवर्स और रिपब्लिकन पार्टी के वर्चस्व वाली राज्य विधायिका के बीच लंबी क़ानूनी लड़ाई चली जिस पर आख़िरकार अमरीका के सुप्रीम कोर्ट को फ़ैसला सुनाना पड़ा.

इस क़ानूनी जंग का मुद्दा यही था कि क्या गवर्नर के पास चुनाव जून तक टालने और ग़ैरहाज़िर रहने वाले मतदाता के लिए मतदान की तारीख़ बढ़ाने का अधिकार है या नहीं.

मार्च के महीने में ओहियो प्रांत के रिपब्लिकन गवर्नर माइक डेवाइन को भी अपने राज्य में प्राइमरी चुनाव टालने के लिए अदालती लड़ाई का सामना करना पड़ा.

टेक्सास के एक फेडरल जज ने बीते बुधवार को जारी आदेश में कहा कि ग़ैरहाज़िर रहने वाले मतदाता के लिए कोरोना वायरस से संक्रमण मतदान की तारीख़ नवंबर तक बढ़ाने की एक वाजिब वजह है. टेक्सास में पोस्टल बैलट के लिए कड़ी शर्तों का पालन करना होता है.

जोखिम कैसे कम होगा?

हाल ही में पिउ रिसर्च सेंटर की तरफ़ कराये गए एक सर्वेक्षण में 66 फ़ीसदी अमरीकियों ने ये कहा कि कोरोना वायरस से फैली महामारी की वजह से वे पोलिंग स्टेशन जाकर वोट देने में वे सहज महसूस नहीं कर रहे हैं,

ऐसी चिंताओं से अमरीकी राज्यों पर ये दबाव बढ़ा है कि वे पोस्टल बैलट की उपलब्धता को बढ़ाएं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा मतदाता संक्रमण के ख़तरे से खुद को बचाकर वोट दे सकें.

अमरीका में सभी राज्यों में मतदान केंद्रों पर हाज़िर हुए बिना भी वोट देने का किसी न किसी तरह से प्रावधान है लेकिन इसके लिए कड़ी शर्तों का पालन करना होता है.

प्रोफ़ेसर रिचर्ड कहते हैं, "हमारे यहां एक विकेंद्रीकृत व्यवस्था है. राज्यों के पास इस बात की पूरी गुंजाइश रहती है कि वो किसी चीज़ को अपने किस तरह से लागू करें."

वाशिंगटन, ओरेगन, कोलोराडो समेत पांच राज्यों ने अपने यहां चुनाव पूरी तरह से पोस्टल बैलट के जरिए संपन्न कराए हैं.

कैलिफोर्निया में ये प्रावधान है कि जो भी पोस्टल बैलट के लिए रिक्वेस्ट करेगा, उसे इसका मौका दिया जाएगा.

कुछ राज्य पोस्टल बैलट क्यों पसंद नहीं करते हैं?

लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी अमरीकी राज्यों में पोस्टल बैलट का विकल्प सहज और सुगम है. 17 राज्यों में ये प्रावधान है कि पोस्टल बैलट के लिए आवेदन करने वाले लोगों को पोलिंग स्टेशन पर अपने ग़ैरहाज़िर रहने की वाजिब वजह बतानी होगी.

इन राज्यों में पोस्टल बैलट के लिए मौजूदा नियम क़ानूनों में ढील दिए जाने की अपील की जा रही है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इसकी मंजूरी मिल सके हालांकि कुछ राजनेता इसका विरोध भी कर रहे हैं.

मिसूरी में रिपब्लिकन पार्टी के गवर्नर माइक पार्सन ने बीते मंगलवार को कहा कि पोस्टल बैलट के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इजाजत देना एक राजनीतिक मुद्दा है.

उनकी बातों से ऐसा लग रहा था कि कोरोना वायरस से संक्रमण का डर अपने आप में पोस्टल बैलट से वोटिंग की इजाजत देने की वजह नहीं हो सकती है.

नॉर्थ कैरोलिना और जॉर्जिया समेत दूसरे राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी के गवर्नरों ने भी ऐसी राय रखी है.

इन हालात में कांग्रेस चाहे तो दखल दे सकती है. वो चाहे तो राज्यों को राष्ट्रीय चुनावों के लिए पोस्टल बैलट पर कुछ न्यूनतम शर्तें रखने पर निर्देश दे सकती है. लेकिन कांग्रेस में जिस तरह की राजनीतिक असहमति का माहौल है, उसे देखते हुए इसकी संभावना कम ही लगती है.

क्या चुनाव को बचाने पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बन पाएगी?

नहीं, इसकी संभावना न के बराबर ही है. अमरीका में जिस तरह से राजनीतिक ध्रुवीकरण का माहौल उसे देखते हुए इस पर हैरत नहीं होनी चाहिए कि कोविड-19 की महामारी के बीच चुनाव कराने के वैकल्पिक तौर-तरीकों पर चल रही बहसें अक्सर तल्ख हो जाया करती हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद भी बैलट वोटिंग के विस्तार के ख़िलाफ़ अपने विचार रखे हैं. उनका कहना है कि इसमें धोखाधड़ी की गुंजाइश रहती है.

उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगर पोस्टल वोटिंग के लिए नियमों में छूट दी गई तो मतदान प्रतिशत बढ़ेगा और इससे रिपब्लिकन उम्मीदवारों को नुक़सान हो सकता है.

हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ से एक इंटरव्यू में कहा, "मतदान के स्तर होते हैं. अगर आप इसके लिए सहमत हो गए तो इस देश में फिर कभी रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाएगा."

लेकिन अतीत के अनुभव ये बताते हैं कि पोस्टल वोटिंग की सूरत में डेमोक्रेट समर्थकों की तुलना में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों ने हमेशा ही बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है.

क्या अमरीकी लोकतंत्र ख़तरे में है?

कोरोना वायरस से फैली महामारी अमरीकी जनजीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रही है. एक तरफ़ जहां राष्ट्रपति ट्रंप और दूसरे राजनेता आम अमरीकियों की ज़िंदगी को पटरी पर लाने की हर कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जून तक हालात सामान्य हो जाएंगे.

कई राज्यों ने प्राइमरी चुनावों को जून तक के लिए टाल रखा है. अगस्त में पार्टियों के कन्वेंशन होने हैं. अक्टूबर में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच बहस होगी और नवंबर में चुनाव होने हैं.

अगर हालात साामन्य होते तो लोग राजनीतिक गतिविधियों के शोर-शराबे के बीच जी रहे होते पर इस वक़्त तो हर चीज़ संदेह के दायरे में हैं.

यहां तक कि कुछ लोग अमरीकी लोकतंत्र की बुनियाद पर भी शक कर रहे हैं.

प्रोफ़ेसर रिचर्ड कहते हैं, "वायरस के हमले से काफी पहले मुझे इस बात को लेकर संदेह रहा है कि साल 2020 के चुनाव के नतीजे को लोग आसानी से स्वीकार कर पाएंगे या नहीं. कोरोना वायरस ने ये चिंता और बढ़ा दी है."

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