अमेरिका-ब्रिटेन में कोरोना बरपा रहा कम, अस्पतालों में वेंटिलेटर्स की भारी किल्लत, सेना को किया तैनात
अमेरिका में कोरोना से स्थिति बेकाबू हो रही है और अस्पतालों में वेंटिलेटर्स की भारी किल्लत हो गई है। वहीं, यूरोप और ब्रिटेन में भी स्थिति बिगड़ रही है।
वॉशिंगटन, दिसंबर 12: अमेरिका और यूरोपीय देशों में एक बार फिर से कोरोना वायरस ने लोगों की जान लेना शुरू कर दिया है और अमेरिका के अस्पतालों की स्थिति ये है, कि वेंटिलेटर्स की कमी से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, कोरोना वायरस के नये वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से अमेरिका में हालात बिगड़े हैं। (तस्वीर फाइल)

अमेरिका में बिगड़ रहे हालात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रांत मिशिगन में अस्पतालों के ऊपर कोरोना मरीजों का बोझ काफी बढ़ गया है और वेंटिलेटर्स की कमी से मरीजों को काफी ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 24 घंटे में मिशिगन प्रांत में कोरोना वायरस के 11 हजार 783 नये मरीज सामने आए हैं, वहीं, बीते 24 घंटे में मिशिगन प्रांत में कोरोना संक्रमण से 235 लोगों की मौत हो गई। वहीं, इंडियाना क्षेत्र में बीते दो दिनों से कोरोना वायरस के नये मामलों में करीब 49 प्रतिशत का इजाफा हो गया है। जिसके बाद अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए नेशनल गार्ड्स को तैनात किया गया है।

ओमिक्रॉन की वजह से बढ़े मामले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में कोरोना वायरस के नये मामलों में इजाफे के पीछे की वजह कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट बताया जा रहा है। अमेरिका में अब तक ओमिक्रॉन के कुल 43 मरीजों की पुष्टि हुई है, लेकिन आशंका है कि अमेरिका में आने वाले दिनों में ओमिक्रॉन के मरीजों का आंकड़ा तेजी के साथ आगे बढ़ेगा। वहीं, कई विश्लेषकों ने कहा है कि, सर्दी बढ़ने की वजह से कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ना शुरू हुआ है। वहीं, क्रिसमस की वजह से इन दिनों अमेरिकी बाजारों में काफी भीड़ देखी जा रही है और जानकारों का कहना है कि, बाजारों में लापरवाही बरती जा रही है, लिहाजा कोरोना वायरस फिर से तेजी से फैलना शुरू हो गया है।

19 प्रतिशत मामलों में वृद्धि
सबसे हैरानी की बात ये है, कि जिस अमेरिका में कोरोना वायरस से मौत का आंकड़ा 5 लाख को पार कर चुका है, वहां के लोग अभी भी वैक्सीन लेने ले कतराते हैं, लिहाजा देश में वैक्सीनेशन काफी धीमी रफ्तार से चल रही है। विश्लेषकों का कहना है कि, दुर्भाग्य से ओहियो और बाकी अमेरिका में भी बहुत सारे लोग हैं जिन्होंने अभी तक वह सबक नहीं सीखा है, यहां तक कि संभवतः अत्यधिक संक्रामक नए ओमिक्रॉन वेरिएंट के डर के बीच राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण दर फिर से बढ़ने लगती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ओहियो उन राज्यों में से एक है, जिसने हाल ही में कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने में सबसे बड़ी वृद्धि देखी है क्योंकि देश भर में मामलों की संख्या बढ़ रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में पिछले दो हफ्तों में अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में 19% की वृद्धि हुई है।

टीकाकरण से भागते लोग
अमेरिका में टीकाकरण की रफ्तार काफी कम है। वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ विलियम शेफ़नर ने कहा कि, "येलो वॉर्निंग को लेकर हल्के से ले रहे हैं और मुझे लगता है कि टीकाकरण की रफ्तार काफी कम है।" वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की चालीस प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से टीका नहीं लगाया गया है, और दिनों दिन वैक्सीन लेने वालों की तादाद कम ही होती जा रही है, जबकि वायरस का ग्राफ बढ़ रहा है।

यूरोप में भी बिगड़ते हालात
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देशों में भी कोरोना वायरस की वजह से हालात बिगड़ने शुरू हो गये गैं। स्विटजरलैंड में एक बार फिर से लॉकडाउन जैसे हालात बन गये हैं। वहीं, ब्रिटेन में भी कोरोना का ग्राफ तेजी से आगे बढ़ा है। वहीं, जर्मनी के डॉक्टर्स ने देश की सरकार से देश के लोगों को कोरोना वैक्सीन की चौथी डोज देने की अपील की है। आपको बता दें कि, जर्मनी में अभी तक करीब 11 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज दी जा चुकी है।

ब्रिटेन में वैज्ञानिकों की चेतावनी
वहीं ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि, अगर देश में जल्द से जल्द कोरोना गाइडलाइंस को सख्त करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग को अत्यावश्यक नहीं किया गया, तो अगले साल जनवरी तक देश की स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ सकती है और पूरे देश में लॉकडाउन लगाने के हालात बन सकते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा है कि, देश में कोरोना वायरस का अगला लहर काफी खतरनाक अंदाज में सामने आ सकता है। ब्रिटेन में वैज्ञानिकों का विश्लेषण ऐसे वक्त में आया है, जब देश में ओमिक्रॉन वेरिएंट भी तेजी से फैल रहा है और अभी तक ब्रिटेन में ओमिक्रॉन वायरस से जुड़े 448 नये मरीज सामने आए हैं।












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