ज्वालामुखी ने कांगों को किया बेहाल, हजारों बेघरों ने रवांडा में ली शरण, 15 लोगों ने अब तक गंवाई जान

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने अभी तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है। वहीं, हजारों लोग देश छोड़कर पड़ोसी देश पहुंचे हैं।

किंशासा/कांगो, मई 24: कांगों गणराज्य में 22 मई की देर रात फूटे ज्वालामुखी ने पूरे देश को बेहाल कर दिया है। ज्वालामुखी की वजह अब तक 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ये ज्वालामुखी कांगो गणराज्य के उत्तरी हिस्से में स्थिति माउंट न्यारागोंगो की पहाड़ी पर फूटा है, जिससे हजारों लोग बेघर और पूरी तरह से बेसहारा हो चुके हैं। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने अभी तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है। हालांकि, इन लोगों की मौत ज्वालामुखी की चपेट में आने से नहीं हुई है, बल्कि ज्वालामुखी फूटने के बाद भागते वक्त इन लोगों की मौत हुई है।

ज्वालामुखी से 15 की मौत

ज्वालामुखी से 15 की मौत

पैट्रिक मुयाया के मुताबिक ज्वालामुखी से बचने के लिए भागते वक्त एक ट्रक हादसे में 9 लोगों की मौत हुई है, वहीं चार कैदियों की मौत गोमा में सेन्ट्रल जेल तोड़कर भागने के दौरान हुई है। वहीं, 2 लोगों की मौत ज्वालामुखी की चपेट में आने से जलने की वजह से हुई है। हालांकि, कांगो सरकार की तरफ से अभी तक नहीं बताया गया है कि ज्वालामुखी फूटने की वजह से देश को कितना नुकसान हुआ है या कितने लोग पीड़ित हैं। वहीं, सरकार की तरफ से अभी जनता से कोई भी अनावश्यक कार्य करने से बचने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा है कि ज्वालामुखी के कई किलोमीटर वाले क्षेत्र में स्थिति नाजुक है और कई तरह के और खतरे मंडरा रहे हैं।

माउंट न्यारागोंगो में फूटा ज्वालामुखी

22 मई-23 मई की दरम्यांनी रात करीब 4 बजे सुबह में माउंट न्यारागोंगो में ज्वालामुखी के फूटने के बाद आसपास रहने वाले हजारों हजार स्थानीय लोग दहशत में आ गये और जिसे जो मिला, वही लेकर अपने शहर से दूर जाने की कोशिश करने लगा। माउंट न्यारागोंगो गोमा नाम के शहर में है, जिसकी आबादी करीब 20 लाख है और रिपोर्ट के मुताबिक गोमा शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर फूटा है, लेकिन गोमा शहर में पूरा आकाश लाल नजर आ रहा था। लोगों में डर इस बात को लेकर भी है कि ये ज्वालामुखी 2002 में फूटा था और उस वक्त सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 250 लोगों की मौत हुई थी जबकि 1 लाख 20 हजार लोग बेघर हो गये थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वालामुखी विस्फोट के बाद हजारों हजार लोग अपना सामान बांधकर शहर से बाहर जा रहे हैं। लोगों के हाथ में चटाई और कुछ जरूरी सामान ही दिख रहे हैं। रवांडा के पूर्वी हिस्से में हजारों लोग शरण लेने के लिए जा रहे हैं। शहर के लोग सरकार की घोषणा से पहले ही शहर को छोड़ने की कवायद कर रहे हैं, जबकि ज्वालामुखी विस्फोट के कई घंटे बाद सरकार की तरफ से शहर खाली कराने का ऑर्डर आया है।

सबसे एक्टिव है ज्वालामुखी

आपको बता दें कि माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी दुनिया के सबसे ज्यादा एक्टिव ज्लालामुखियों में से एक है लेकिन सबसे चिंता की बात ये है कि इस ज्वालामुखी पर सरकार की तरफ से ध्यान नहीं दिया जाता है और इसकी मॉनिटरिंग सावधानी से नहीं की जाती है। वहीं, इस ज्वालामुखी को लेकर विश्वबैंक की तरफ से जो फंडिंग दी जा रही थी, वो भी रोक दिया गया है, क्योंकि ज्वालामुखी से जुड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं, बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 10 मई को इस ज्वालामुखी में विस्फोट होने की चेतावनी जारी की गई थी। आपको बता दें कि इस ज्वालामुखी ने सबसे ज्यादा खौफ 1977 में बरपाया था जब 600 से ज्यादा लोग मारे गये थे।

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