बांग्लादेश में अलप्संख्यक हिन्दू पर अत्याचार, फेसबुक पोस्ट पर भड़के कट्टरपंथी, घर में लगाई आग
ढ़ाका, 17जुलाई: बांग्लादेश के कई हिस्सों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रूकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला नरैल जिले की है, जहां भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के कई घरों पर भी हमला किया और तोड़फोड़ की। इसके पीछे की वजह पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ फेसबुक पर कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करना बताया जा रहा है। घटना शनिवार की है।

फेसबुक पर की आपत्तिजनक टिप्पणी
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। बांग्लादेश पुलिस ने इस घटना के संबंध में आकाश साहा और उनके पिता अशोक साहा को गिरफ्तार कर लिया है। आकाश साहा पर पैगंबर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप है। पुलिस के मुताबिक आकाश साहा ने फेसबुक पर पैंगबर मोहम्मद के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को आकाश साहा के घर के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू किया।

प्रदर्शन के दौरान लगाई आग
प्रदर्शन के दौरान ही किसी ने आकाश के घर में आग लगा दी। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद कई पुलिस यूनिट और वरिष्ठ अधिकारियों को नरैल जिले में लोहागोरा उपजिला में स्थित गांव में भेजा गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस ने आकाश साहा और उनके पिता को गिरफ्तार कर लिया।

जिम्मेदार लोगों पर लिया जाएगा एक्शन
नरेल के पुलिस अधीक्षक प्रबीर कुमार रॉय ने कहा कि कानून लागू करने वाले स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम घटना की जांच कर रहे हैं। हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल स्थिति सामान्य है।" पुलिस ने कहा है कि आकाश साहा और उनके पिता के साथ पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दिघालिया यूनियन परिषद के चेयरमैन सैयद बोरहान उद्दीन ने कहा, 'किसी अप्रिय घटना पर रोक लगाई जा सके इसके लिए हम लगातार प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'

बांग्लादेश में 8.5 फीसदी हिन्दू
बांग्लादेश में पिछले कई महीनों से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हमले हो रहे हैं। हालांकि साल 1971 में बांग्लादेश के जन्म होने के साथ ही हिंदू समुदाय के साथ अत्याचारों का सिलसिला शुरू हो गया था। बांग्लादेश के निर्माण के बाद 1974 में जनगणना हुई थी। इसके मुताबिक देश में 1974 में 13.50 फीसदी हिंदू थे, लेकिन वर्ष 2011 में देश में महज 8.20 प्रतिशत हिंदू ही रह गए थे।

लगातार बढ़ रहे हिन्दुओं पर हमले
पाकिस्तान से अलग देश बनने के बाद से हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ने लगे थे। इसके बाद से ऐसा कोई साल नहीं जब अल्पसंख्यक समुदाय को हमले का सामना न करना पड़ा हो। पिछले नौ साल में हिंदुओं पर 3600 से ज्यादा हमले हुए हैं। ये मानवाधिकार संगठनों का आंकड़ा है। बांग्लादेश में 1990, 1995, 1999, 2002 में बड़े दंगे हुए थे। इनमें हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया था। अब तो बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करना, हिंदुओं के घर जलाना, बच्चों और लड़कियों का अपहरण, दुष्कर्म जैसी वारदात यहां आम हो गई हैं।
सुनियोजित तरीके से होती है हिंसा
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की के पीछे का मुख्य उद्देश्य उनकी जमीनों को हड़पना है। कई रिपोर्ट में इस तथ्य की ओर इशारा किया गया है कि यह सब सुनियोजित तरीके से होता है। दरअसल, बांग्लादेश में हिंसा के पैटर्न में यह देखा गया है कि बहुसंख्यक आबादी गरीब हिंदुओं के घर जला देती है। घर जलने से ये हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर होते हैं और जब वे पलायन कर जाते हैं तो उनकी जमीन पर ये लोग कब्जा कर लेते हैं।

2050 तक हिन्दू हो जाएंगे खत्म
वर्ष 2016 में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर एक किताब आई थी। उस किताब में दावा किया गया था कि अगले करीब तीन दशक में बांग्लादेश से हिंदुओं का नामोनिशान मिट जाएगा।
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