Comet-like Tail: एस्टेरॉयड की 'पूंछ', सूर्य के करीब बनी तस्वीर, 14 साल बाद खुला रहस्य
नासा की सोलर ऑब्जर्वेटरी से वर्ष 2009 मे देखी गई एक खगोलीय घटना देखी गई। तस्वीरें हैरान करने वाली थीं, जब सूर्य के निकट पहुंचे ही एस्टेरॉयड से पूंछ जैसी आकृति उभरते देखी गई। साइंटिस्ट्स इस रहस्य का पता लगा लिया है।

Asteroid Phaethon comet-like tail: खगोलीय घटनाओं का रहस्य खोजने में वर्षों से साइंटिस्ट्स जुटे हैं। 21वीं सदी में इस दिशा में कई डेवलमेंट देखने को मिले। नासा के अत्याधुनिक तकनीकी से लैस जेम्म वेब टेलीस्कोप ने जो तस्वीरें भेजे वो वाकई अद्भुत और वास्तवितक थी। ऐसे तस्वीरें स्पेस की कभी नहीं देखी गई।
सोलर एंड हेलिओस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी से देखी गई विचित्र तस्वीरों को लेकर हाल ही में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्च स्कॉलर्स की टीम ने विश्लेषण किया। नए अध्ययन में साइंटिस्ट्स को कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं।
नासा की सोलर एंड हेलिओस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी की जिन तस्वीरों पर कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रिसर्च हुआ वो वर्ष 2009 की हैं। ये तस्वीरें एस्टेरॉयड फेथॉन 3200 की थीं। इससे पहले वर्षों तक साइंटिस्ट्स इन तस्वीरों को लेकर एक अलग अवधारणा रखते थे। पुरानी रिसर्च के मुताबिक ये माना जाता था कि क्षुद्रग्रह से निकलने वाली धूल ही एस्टेरॉयड की धूमकेतु जैसी दिखने वाली पूंछ के लिए जिम्मेदार था। लेकिन ताजा रिसर्च ने पुरानी रिसर्च पर साइंटिस्ट्स को विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।
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फेथॉन के अध्ययन के लिए कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पीएचडी छात्र किचेंग झांग के नेतृत्व में ये रिसर्च की गई। इसमें नासा की दो सोलर ऑब्जर्वेटरी के डेटा का उपयोग किया गया। नए अध्ययन से पता चला है कि फेथॉन की पूंछ मुख्य रूप से धूल के बजाय सोडियम गैस से बनी है। इससे पता चलता है कि क्षुद्रग्रह के भीतर सोडियम गैस की मौजूदगी है। जिसके कारण एस्टेरॉयड जैसी से सूर्य के निकट पहुंचता है, वाष्पीकरण के कारण उसके आसपास धूमकेतु जैसी आकृति दिखाई देती है।
नासा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पीएचडी छात्र किचेंग झांग ने कहा कि एस्टेरॉयड की पूंछ जैसी आकृति धूल नहीं है। शोध में कहा गया कि सोलर एंड हेलिओस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी (SOHO) अंतरिक्ष यान जरिए सोडियम और धूल का पता लगाया जा सकता है।
अपने अध्ययन में झांग ने पाया कि फेथॉन की पूंछ सोडियम फिल्टर में चमकीली दिखाई देती है, लेकिन धूल फिल्टर में नहीं। इसके अलावा अगर फेथॉन की पूंछ सोडियम से बनी होती, तो इसका आकार और चमक ठीक वैसी ही होती जैसा कि यह सूर्य के पास से गुजरती है, लेकिन अगर यह धूल से बनी होती तो नहीं।
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