अबू धाबी में अयोध्या जितना ही भव्य मंदिर बनाने का दावा, कम से कम 1000 साल होगी उम्र, देखिए वीडियो

मंदिर निर्माण कार्य में यूएई का राज परिवार काफी दिलचस्पी ले रहा है और नियमित तौर पर मंदिर निर्माण से जुड़ा जानकारियां लेता रहता है। माना जा रहा है कि अबू धाबी में बनने वाला मंदिर दुनिया के भव्य मंदिरों में से एक होगा।

अबू धाबी, सितंबर 27: आपको पता होगा कि संयुक्त अरब अमीरात में एक भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन अब मंदिर को लेकर दावा किया जा रहा है ये मंदिर इतना ज्यादा मजबूत होगा, कि उसकी उम्र कम से कम एक हजार साल से ज्यादा होगी। सैकड़ों इंजीनियरों की टीम इस भव्य मंदिर के निर्माण कार्य में लगी हुई है और अब एक वीडियो जारी कर इस मंदिर के निर्माण कार्य के बारे में जानकारियां दी गई हैं।

भव्य मंदिर का निर्माण

भव्य मंदिर का निर्माण

बीएपीएस हिंदू मंदिर अबू धाबी परियोजना के कोर टीम के सदस्यों ने कहा कि राजधानी में बनाया जा रहा संयुक्त अरब अमीरात का पहले हिंदू मंदिर की उम्र कम से कम एक हजार से होगी। मंदिर बनाने वाली टीम ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें मंदिर के निर्माण कार्य का काम दिखाया गया है। मंदिर के एक प्रतिनिधि ने खलीज टाइम्स को बताया कि मंदिर के आधार नींव का काम पूरा हो गया है और गुलाबी बलुआ पत्थर लगाने का काम तब शुरू होगा जब कारीगर भारत से आएंगे। YouTube पर पोस्ट किए गए एक वीडियो अपडेट में, परियोजना से जुड़े सदस्यों ने कहा कि, मंदिर का निर्माण ऐतिहासिल पत्थरों से किया जाएगा।

बलुआ पत्थर की मोटी परत

बलुआ पत्थर की मोटी परत

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, धार्मिक नेता और बीएपीएस हिंदू मंदिर के प्रवक्ता पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी ने खुलासा किया कि, अबू मुरीखाह स्थित मंदिर की भूमि में बलुआ पत्थर की मोटी परत बिछाई गई है। मंदिर के विकास की देखरेख करने वाले स्वामी ने कहा कि, "यह काफी ज्यादा मजबूत और काफी ज्यादा कठोर है, और सबसे खास बात ये है कि यह सतह से सिर्फ एक मीटर नीचे था।"

भारत से आएंगे कारीगर

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में लगाने के लिए सफेद संगमरमर पत्थरों पर खास डिजाइन बनाए जाएंगे, जिसके लिए भारत से कारीगरों को बुलाया जाएगा। वहीं, मंदिर बनाने के प्रोजेक्ट से जुड़े स्ट्रक्चरल इंजीनियर डॉ. कॉंग साइ ओंग ने कहा कि वो इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहे है। उन्होंने कहा कि, उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि वो एक ऐसे प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं, जिसकी उम्र कम से कम एक हजार साल होगी। मंदिर निर्माण कराने वाली कमेटी बीएपीएस ने कहा है कि मंदिर बनाने में करीब 888 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

कैसा होगा मंदिर?

कैसा होगा मंदिर?

एयर प्रोडक्ट्स के प्रिंसिपल सिविल इंजीनियर संदीप व्यास ने कहा कि, प्रारंभिक भू-तकनीकी सर्वेक्षण से पता चला है कि जिस भूखंड पर मंदिर बनाई जानी थी, उसके केंद्र में 20 मीटर मोटा पत्थर मिला है। जिसने सभी लोगों को आश्चर्यकित तक दिया। वहीं, आरएसपी के प्रमुख स्ट्रक्चरल इंजीनियर वसियामेद बहलिम ने कहा कि, "हमें मौजूदा जमीनी स्तर के बहुत करीब सक्षम आधार मिला है।" शापूरजी पल्लोनजी के प्रोजेक्ट मैनेजर टीनू साइमन ने कहा कि, "जब हमने इस परियोजना को शुरू किया, तो मैं वास्तव में आश्चर्यचकित था क्योंकि खुदाई के स्तर तक पहुंचने से पहले, हम उच्च चट्टान पर पहुंच गए थे। 15 से अधिक वर्षों से मैं जीसीसी में काम कर रहा हूं और पहली बार मुझे इतनी अच्छी नींव इतनी सीमा के भीतर मिली है।"

कैसा होगा मंदिर की डिजाइन?

कैसा होगा मंदिर की डिजाइन?

एक हजार साल तक अडिग रहने वाले इस मंदिर के नींव के डिजाइन के बारे में बात करते हुए बीएपीएस के प्लानिंग सेल के संजय पारिख ने बताया कि, "मंदिर का निर्माण पूरी तरह से पत्थरों से हो रहा है और हमारे प्राचीन शास्त्रों के मुताबिक मंदिर निर्माण में लौह धातु का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा"। उन्होंने कहा कि, मंदिर की नींव को काफी ज्यादा मजबूत करने के लिए फ्लाइ एश का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 55 प्रतिशत सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है, जिसने इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम कर दिया है। बीएपीएस के परियोजना निदेशक जसबीर सिंह साहनी ने कहा कि, कंक्रीट को मजबूती देने के लिए बांस की छड़ें और कांच जैसी बुनियादी सामग्री का उपयोग करने की अनूठी भारतीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

300 सेंसर्स का इस्तेमाल

300 सेंसर्स का इस्तेमाल

बीएपीएस ने बताया कि, मंदिर के निर्माण कार्य में 10 देशों के 30 प्रोफेशनल इंजीनियरों ने 5 हजार घंटे काम करने के बाद मंदिर का 3डी मॉडल तैयार किया है। मंदिर का मॉडल तैयार करने के लिए कई तरह के अलग अलग सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल कियागया है। बीएपीएस ने कहा कि, हिंदू इतिहास में पहली बार एक ऐसे मंदिर का निर्माण हो रहा है, जिसका डिजाइन पूरी तरह से डिजिटल तरीके से किया गया है और इसमें मंदिर निर्माण स्थान के भूगर्भविज्ञान का पूरा ध्यान रखा गया है। इसके अलावा अलग अलग लेवल पर 300 से ज्यादा सेंसर्स लगाए गये हैं, जो मंदिर निर्माण के दौरान स्ट्रेस, प्रेशर, टेम्परेचर और सेस्मिक घटनाओं की लाइव जानकारी इंजीनियर्स को देती है। आपको बता दें कि पीएम मोदी ने जब संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था, उस वक्त इस मंदिर की नींव डाली गई थी।

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