UAE में मिला इस्लाम के उदय से पहले का मठ, धर्म परिवर्तन के लिए बनाए गये थे कमरे, भारत से था कनेक्शन
जिस क्षेत्र में ईसाई मठ की खोज की गई है, बहुत पहले इसके रेगिस्तान के विस्तार ने संयुक्त अरब अमीरात में एक संपन्न तेल उद्योग को जन्म दिया था
Christian monastery found in UAE: संयुक्त अरब अमीरात में इस्लाम के उदय से पहले बने विशालकाय मठ की खोज की गई है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यूएई सरकार के मुताबिक, ये मठ काफी प्राचीन है, जो इस्लाम के आने से पहले बनाया गया था। ये मठ एक ईसाई मठ है और डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, आज से करीब 1400 साल पहले इस मठ का निर्माण करवाया गया था और उस वक्त तक पैगंबर मोहम्मद का जन्म नहीं हुई था।

कहां हुई है मठ की खोज
यूएई के अधिकारियों ने गुरुवार को घोषणा की है, कि अरब प्रायद्वीप में फैले एक बेहद प्राचीन ईसाई मठ की खोज की गई है, जो इस्लाम के आने से पहले ही बनाया गया था। इस ईसाई मठ को संयुक्त अरब अमीरात के तट पर एक द्वीप पर खोजा गया है। यूएई सरकार के मुताबिक, ईसाई मठ की खोज फारस की खाड़ी के पास स्थिति उम्म अल-क्वैन में की गई है, जो रेत टिब्बा शेखडोम का हिस्सा है। इस मठ का नाम सिनियाह द्वीप मठ रखा गया है और फारस की खाड़ी के तट के साथ प्रारंभिक ईसाई धर्म के इतिहास पर नया प्रकाश डालता है। ये ईसाई मठ संयुक्त अरब अमीरात में खोजा गया दूसरा मठ है, जो करीब 1400 साल पुराना है।

रेगिस्तान में हुई थी तेल की खोज
जिस क्षेत्र में ईसाई मठ की खोज की गई है, बहुत पहले इसके रेगिस्तान के विस्तार ने संयुक्त अरब अमीरात में एक संपन्न तेल उद्योग को जन्म दिया था, जिसकी वजह से संयुक्त अरब अमीरात विश्व के अमीर देशों में अपना स्थान बना पाया और आज दुबई में बनी गगनचुंबी इमारतें इस बात की गवाही देती हैं। वहीं, इस मठ के मिलने के बाद ये पता चलता है, कि इस्लाम के इन क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार से पहले इन इलाकों में ईसाई धर्म के लोग निवास करते होंगे। इससे पहले वाला मठ 1990 में खोजा गया था। इतिहासकारों का मानना है कि, इस्लाम के उदय के बाद इन क्षेत्रों में रहने वाले ईसाइयों का धर्म परिवर्तन कर दिया गया और फिर धीरे धीरे यहां स्थिति मठ तो भुलाया जाने लगा और फिर एक दिन इन मठों के बारे में सभी लोग भुल गये।

धर्मपरिवर्तन के लिए कमरे
जो ईसाई मठ खोजा गया है, उसके अवशेषों में गलियारेनुमा चर्च की आकृति मिली है, वहीं बैप्टिज्म की प्रक्रिया के लिए अलग अलग कमरे बनाए गये थे। आपको बता दें कि, बैप्टिज्म का मतलब दूसरे धर्म के लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तत करने की प्रक्रिया है। वहीं, इस मठ में कई ऐसे मठ मिले हैं, शायद जिनका इस्तेमाल चर्च में होने वाले कार्यक्रमों और ब्रेड बनाने के लिए किया जाता रहा होगा। वहीं, मठ के अंदर कई छोटे कमरें भी मिले हैं, जिनको लेकर पुरातत्वविदों का मानना है, कि हो सकता है उन कमरों में ईसाई धर्म के पादरी ईश्वर की अराधना के लिए और आराम के लिए करते होंगे। वहीं, धीरे धीरे ईसाइयों की संख्या इस क्षेत्र में कम होने लगी और फिर आज इन क्षेत्रों में ईसाई अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

खोजकर्ताओं ने क्या कहा?
संयुक्त अरब अमीरात विश्वविद्यालय में पुरातत्व के एक सहयोगी प्रोफेसर टिमोथी पावर, जिन्होंने इस ईसाई मठ की खोज करने में मदद की है, उन्होंने कहा कि, संयुक्त अरब अमीरात आज "राष्ट्रों का पिघलने वाला बर्तन" है। उन्होंने कहा कि, 'वास्तव में ये बताई जाने वाली कहानी है, क्योंकि आज से हजार से ज्यादा साल पहले यहां ऐसा कुछ हो रहा होगा।' ये मठ सिनियाह द्वीप पर स्थिति है, जो फ़ारस की खाड़ी के तट के साथ दुबई के उत्तर-पूर्व में लगभग 50 किलोमीटर (30 मील) की दूरी पर स्थित उम्म अल-क्वैन में खोर अल-बीदा दलदली इलाके के पास स्थिति है। यूएई में इस द्वीप को फ्लैशिंग लाइट भी कहा जाता है, जो संभवतः सफेद-गर्म सूरज के ऊपर के प्रभाव के कारण होता है।

534 से 656 के बीच था मठ
रिपोर्ट के मुताबिकत, कार्बन डेटिंग से पाया गया है कि, ये मठ 534 और 656 के बीच स्थित था और इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का जन्म 570 के आसपास हुआ था और वर्तमान में सऊदी अरब में मक्का पर विजय प्राप्त करने के बाद 632 में उनकी मृत्यु हो गई थी। इस मठ के बगल में चार कमरों का एक दूसरा इमारत भी पाया गया है, जिसके बारे में पुरातत्वविदों का अनुमान है, कि ये इमारत मठ के बिशप की रही होगी। इसके साथ ही इमारत में खाना बनाने के लिए भी एक कमरा मिला है। वहीं, इतिहासकारों का मानना है कि, इस तरह के प्राचीन मठ फारस की खाड़ी और ओमान के साथ साथ भारत में भी फैले हुए थे।

मठों के जरिए होता था व्यापार
वहीं, खोजकर्ताओं का मानना है कि, मध्यपूर्वी देशों में इस तरह के कई मठों की खोज हो चुकी है, जो आज के युग में मुस्लिम राष्ट्र हैं। इस तरह के मठ इराक, बहरीन, कुवैत, ईरान और सऊदी अरब में भी खोजे जा चुके हैं। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात में जिस मठ की खोज की गई थी, वो सर बानी यस ट्वीप पर की गई थी। उस दौरान जो खोज की गई थी, उसमें उस मठ के आसपास के क्षेत्र में पुरातत्वविदों को आठ अलग अलग घरों के अवशेष मिले थे, जिनको लेकर इतिहासकारों का मानना है, कि उनमें हो सकता है लोग रहा करते होंगे। वहीं, कई इतिहासकारों का मानना है, कि इन मठों के जरिए भारत के साथ व्यापार होते रहे होंगे।












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