बलूचों के हमले से दहशत में आया चीन, पाकिस्‍तान में पढ़ा रहे सभी शिक्षकों को वापस बुलाया

इस्लामाबाद, 16 मईः चीन ने पाकिस्तान में कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट में पढ़ा रहे शिक्षकों को वापस अपने देश बुला लिया है। बीते महीने 26 अप्रैल को कराची शहर में 3 चीनी शिक्षकों की बलूच विद्रोहियों के आत्‍मघाती हमले में जान चली गयी थी। इसके बाद चीन ने शिक्षकों को वापस बुलाने का फैसला किया है।

पूरे पाकिस्तान से बुलाए शिक्षक

पूरे पाकिस्तान से बुलाए शिक्षक

चीन के ये शिक्षक पाकिस्‍तान के कई शहरों में खुले कन्फ्यूशियस इंस्‍टीट्यूट में पढ़ा रहे थे। जानकारों के मुताबिक चीन ने दुनियाभर में जासूसी और सांस्‍कृतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए कन्फ्यूशियस इंस्‍टीट्यूट खोल रखे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कराची में कन्फ्यूशियस इंस्‍टीट्यूट के निदेशक नसीरउद्दीन ने बताया कि आत्मघाती हमले के बाद कराची ही नहीं, बल्कि पूरे पाकिस्‍तान के कन्फ्यूशियस इंस्‍टीट्यूट से चीनी शिक्षक वापस बुला लिए गए हैं।

पाकिस्तानी शिक्षकों से मांगी गयी मदद

पाकिस्तानी शिक्षकों से मांगी गयी मदद

हालांकि चीनी अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि ये शिक्षक भले ही बुलाए जा रहे हैं लेकिन संस्थान को बंद नहीं किया जाएगा। इसके लिए मंदारिन भाषा पढ़ाने के लिए पाकिस्‍तानी शिक्षकों से मदद मांगी गई है। साल 2013 में कराची इंस्‍टीट्यूट और चीन के सिचुआन नार्मल यूनिवर्सिटी के संयुक्‍त प्रयास से कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट की स्‍थापना की गयी थी। वर्तमान में यहां 500 छात्र चीनी भाषा की शिक्षा लेते हैं। संस्थान का उद्देश्य मंदारिन भाषा सीखाना और चीन-पाकिस्तान के बीच लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना है।

भाषा के जरिए सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ा रहा चीन

भाषा के जरिए सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ा रहा चीन


विशेषज्ञों के मुताबिक चीन कन्फ्यूशियस इंस्‍टीट्यूट के जरिए दुनियाभर में सांस्‍कृतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही इसके जरिए चीन उस देश के चर्चित विश्‍वविद्यालय में हो रहे शोध और अन्‍य तकनीकों के विकास पर नजर रखता है। इससे जासूसी को भी बढ़ावा देने की भी खबरें आई हैं और यही वजह है कि भारत ने चीनी इंस्‍टीट्यूट को लेकर बहुत सख्‍त न‍ियम बना दिए हैं।

चीन का पाकिस्तानी सरकार से भरोसा उठा

चीन का पाकिस्तानी सरकार से भरोसा उठा


इससे पहले गत 26 अप्रैल को बुर्का पहनी बलूच आत्‍मघाती महिला ने खुद को उड़ा दिया था जिसमें 3 चीनी शिक्षक मारे गए थे और 4 अन्‍य घायल हो गए थे। सीनेट रक्षा समिति के अध्यक्ष मुशाहिद हसन ने अखबार डॉन को बताया कि इस घटना के बाद पाकिस्तान में चीनी लोगों की रक्षा करने की सरकार की क्षमता पर चीन का विश्वास गंभीर रूप से हिल गया। इस घटना के बाद चीनी सरकार ने पाकिस्तान में काम कर रहे अपने नागरिकों पर हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

पहले भी हो चुके हैं चीनी नागरिकों पर हमले

पहले भी हो चुके हैं चीनी नागरिकों पर हमले


यह पहली बार नहीं है जब चीनी नागरिकों की पाकिस्तान में हत्या की गई है। पिछले साल जुलाई में, कराची में दो चीनी नागरिकों को ले जा रहे एक वाहन पर मोटरसाइकिल पर सवार नकाबपोश हथियारबंद लोगों ने गोलियां चलाईं, जिसमें उनमें से एक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसी महीने, उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में निर्माण श्रमिकों को ले जा रही एक बस पर हमला किया गया था, जिसमें लगभग एक दर्जन चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी। नवंबर 2018 में, बलूच आतंकवादियों ने कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला किया था।

चीनी निवेश का कर रहे हैं विरोध

चीनी निवेश का कर रहे हैं विरोध


इन हमलों की जिम्मेदारी लेने वाला बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान में चीनी निवेश का विरोध करता है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का कहना है कि चीनी निवेश से बलूचिस्तान के लोगों को कोई लाभ नहीं हो रहा है। ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा बलूचिस्तान लंबे समय से चल रहे हिंसक विद्रोह का घर है। बलूच विद्रोही समूहों ने पहले 60 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) परियोजनाओं को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं।

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