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भारत के लिए परमानेंट सिरदर्द बना मालदीव, चीन के जासूसी जहाज ने हिंद महासागर में डाला डेरा, कितना खतरा?

Chinese Spy Ship Maldives: मालदीव में पिछले हफ्ते हुए संसदीय चुनाव में भारत समर्थक मालदीवियन नेशनल पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है और इसके साथ ही, मोहम्मद मुइज्जू अब पूरी ताकत के साथ देश का राष्ट्रपति पद संभालेंगे।

पूरी ताकत इसलिए, क्योंकि अभी तक मालदीव की संसद में भारत समर्थक पार्टियों के साथ बहुमत था, जिसके बाद मोहम्मद मुइज्जू के कई फैसलों को रोकने का अधिकार था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है और इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है।

Chinese spy ship maldives

आपको बता दें, कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, जिन्हें चीन का गुलाम माना जाता है, उनकी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस को 93 सदस्यीय संसद में से 66 सीटें हासिल हुई हैं।

मालदीव पहुंचा चीन का जासूसी जहाज

4,500 टन वजनी एक उच्च तकनीक वाला चीनी 'जासूस' जहाज मालदीव के जल क्षेत्र में वापस लौट आया है। दो महीने पहले भी इसने मालदीव के विभिन्न बंदरगाहों पर एक हफ्ते का समय बिताया था। समाचार पोर्टल Adhadhu.com ने शुक्रवार को बताया है, कि जियांग यांग होंग 03, जो चीन का जासूसी जहाज है, उसे गुरुवार सुबह थिलाफुशी औद्योगिक द्वीप के बंदरगाह पर खड़ा किया गया है।

हालांकि, मालदीव की "सरकार ने जासूसी जहाज की वापसी के कारण का खुलासा नहीं किया है। लेकिन सरकार ने जहाज को उसकी पहली यात्रा से पहले डॉक करने की अनुमति की पुष्टि कर दी है।"

राष्ट्रपति मुइज्जू पिछले साल 'इंडिया आउट' के वादे पर सत्ता में आए थे और 21 अप्रैल को संसदीय चुनावों में भारी बहुमत से जीत के साथ उन्होंने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। Adhadhu.com ने कहा है, कि "जहाज अब विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) को पार करने के बाद वापस आ गया है। जियांग यांग होंग 03 जनवरी से मालदीव क्षेत्र के अंदर या उसके पास सक्रिय है।"

चीन का ये जासूसी जहाज इससे पहले 23 फरवरी को माले के पश्चिम में लगभग 7.5 किमी दूर उसी थिलाफुशी बंदरगाह पर रुका था। मालदीव के EEZ की सीमा के पास लगभग एक महीना बिताने के बाद हाई-टेक जहाज 22 फरवरी को मालदीव के जलक्षेत्र में पहुंचा था। लगभग छह दिन बाद, जहाज ईईजेड सीमा पर वापस चला गया।

भारत के लिए परमानेंट सिरदर्द?

फरवरी महीने में मालदीव के विदेश मंत्रालय ने कहा था, कि चीन सरकार द्वारा मालदीव सरकार से किए गए राजनयिक अनुरोध के बाद जियांग यांग होंग 3 "अपने कर्मियों के रोटेशन और जरूरी सामान लेने के लिए एक पोर्ट कॉल करने" के लिए यहां पहुंचा था।

मालदीव विदेश मंत्रालय ने 23 जनवरी को कहा, कि "जहाज मालदीव के जलक्षेत्र में रहते हुए कोई शोध नहीं करेगा।" लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि मालदीव सरासर झूठ बोल रहा है।

मालदीव की भारत के लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप से महज 70 समुद्री मील की दूरी है, जबकि भारत की मुख्य भूमि से मालदीव करीब 300 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है। लिहाजा, हिंद महासागर में इसका महत्व काफी बढ़ जाता है। हिंद महासागर में चलने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए केन्द्र में होने की वजह से मालदीव पर चीन का प्रभुत्व, भारत के लिए सिरदर्द जैसा ही है।

चीन का जासूसी जहाज कैसा है?

इस बीच, फरवरी में स्थानीय मीडिया रिपोर्टों ने चीन के जासूसी जहाज जियांग यांग होंग 03 के प्रकार के बारे में कुछ जानकारियां दी हैं, जिसके मुताबिक, ये जहाज करीब 100 मीटर लंबा है और इसे साल 2016 में चीन के राज्य महासागरीय प्रशासन (एसओए) के बेड़े में जोड़ा गया था।

यह एकमात्र 4,500 टन का जहाज है और 2019 से चीन इस जहाज का उपयोग चीन की पायलट महासागर प्रयोगशाला में 'दूरस्थ जल' और 'गहरे समुद्र' सर्वेक्षण करने के लिए कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज का उपयोग लवणता, सूक्ष्मजीव आनुवंशिक अध्ययन, पानी के नीचे खनिज अन्वेषण और पानी के नीचे जीवन और पर्यावरण का अध्ययन करने के लिए किया जा सकता है। इसमें डेटा प्लव्स हैं, जो समुद्री धाराओं, लहरों और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जानकारी को माप सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये प्लव्स चीनी सरकार को वास्तविक समय की सैटेलाइट जानकारी प्रदान करेंगे।

लेकिन, ऐसा करने के साथ चीन को हिंद महासागर में अलग अलग जगहों का पूरा मैप मिल जाएगा। हिंद महासागर में अलग अलग मौसम की परिस्थितियों, अलग अलग समय पर पानी की गहराई के साथ साथ, पानी के अंदर की गतिविधियों की भी पूरी मैपिंग हो जाएगी, जिसका इस्तेमाल वो युद्ध के समय भारत के खिलाफ कर सकता है।

शुक्रवार को Adhadhu.com ने जियांग यांग होंग 03 का प्रबंधन करने वाले चीन के स्टेट ओशनिक एडमिनिस्ट्रेशन (SOA) के हवाले से कहा, कि यह जहाज समुद्री अनुसंधान के लिए देश में निर्मित सबसे आधुनिक जहाज है। चीन का कहना है, कि यह एक व्यापक अनुसंधान पोत है, जिसका अर्थ है कि यह एक से ज्यादा कार्यों को अंजाम देने के लिए बनाया गया है।

चीन के अनुसार, इस जहाज की सहनशक्ति 15,000 समुद्री मील है, जिसका मतलब है, कि यह बिना किसी सहायता के अपने काम के लिए 15,000 समुद्री मील की यात्रा बिना रुके कर सकती है। संयोग से, यही चीनी जासूसी जहाज 22 से 25 फरवरी के बीच माले के पास समुद्र में हुए भारत-मालदीव-श्रीलंका त्रिपक्षीय दोस्ती-16 अभ्यास के दौरान भी मौजूद था।

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