वुहान से पहले अमेरिका और फ्रांस में कोविड-19 फैलने का दावा, अब चीन के वैज्ञानिकों ने की ये मांग

बीजिंग, 17 जून: चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 पर अमेरिकी वैज्ञानिकों की शुरुआती रिपोर्ट ही इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस बीमारी के शुरुआती मामले वहां आधिकारिक तौर पर इंफेक्शन की पुष्टि से पहले ही दर्ज किए जा चुके थे। इस तरह का आरोप लगाकर चीन के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब कोरोना वायरस के पैदा होने वाले स्थान का पता लगाने के लिए अगला फोकस विशेष रूप से अमेरिका पर होना चाहिए। चीन का दावा है कि अमेरिका के पास दुनियाभर में जीव वैज्ञानिक प्रयोगशाला हैं और जैविक हथियार बनने की आशंकाओं के मद्देनजर इस पड़ताल पर फोकस करना पहली प्राथमिकता बन गई है। इसके साथ ही चीन का दावा है कि जब वुहान में कोरोना का पहला मामला दिसंबर 2019 में सामने आया था, उससे पहले उसी साल मार्च में ही यूरोप में यह वायरस पहुंच चुका था।

वुहान से पहले अमेरिका और फ्रांस में संक्रमण- चीन

वुहान से पहले अमेरिका और फ्रांस में संक्रमण- चीन

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक बहुत ही विवादास्पद और सनसनीखेज रिपोर्ट छापी है, जिसमें चीनी वैज्ञानिकों के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में कोविड-19 का संक्रमण आधिकारिक तौर पर दर्ज होने से पहले ही फैल चुका था। इस रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार की एक कथित स्टडी के आधार पर दावा किया गया है कि जब अमेरिका में आधिकारिक तौर पर कोरोना वायरस की पुष्टि की गई उससे एक महीने पहले से ही वहां के लोगों में वह फैलने लगा था। यही नहीं इसमें फ्रांस के वैज्ञानिकों लेकर भी दावा किया गया है कि उन्होंने माना है कि वहां 2020 से पहले ही एक देसी वायरस स्ट्रेन फैल चुका था और लोग इंफेक्टेड होने लगे थे। इस आधार पर चीनी वैज्ञानिकों ने कहा है कि ये सारे ऐसे सबूत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और खासकर अगर कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाया जा रहा है तो अगला फोस अमेरिका पर होना चाहिए।

अमेरिका में दिसंबर, 2019 में ही फैला कोविड-चीन

अमेरिका में दिसंबर, 2019 में ही फैला कोविड-चीन

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक अमेरिका के पांच राज्यों से 2 जनवरी और 18 मार्च, 2020 के बीच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के एक रिसर्च प्रोग्राम के लिए 24,000 से ज्यादा सैंपल लिए गए थे। ये सैंपल इलिनोइस, मैसाचुसेट्स, मिसिसिप्पी, पेंसिल्वेनिया और विस्कोसिन से जुटाए गए थे, जिसके मुताबिक अमेरिका में 7 लोग आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि से पहले ही संक्रिमित हो चुके थे, जबकि आधिकारिक तौर पर पहले केस की पुष्टि 21 जनवरी, 2020 को की गई थी। इसका दावा है कि अगर इलिनोइस का ही उदाहरण लें तो वहां 24 दिसंबर, 2019 को ही एक शख्स कोविड पॉजिटिव हो चुका था। चीन की स्टडी में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका के ये सारे राज्य वहां के शुरुआती हॉटस्पॉट से काफी दूर हैं, जिसे कि वहां देश में इस वायरस का एंट्री प्वाइंट माना जाता है।

अमेरिका के जैव हथियार कार्यक्रमों की जांच की मांग

अमेरिका के जैव हथियार कार्यक्रमों की जांच की मांग

अब चीन के चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के चीफ एपिडेमोलॉजिस्ट जेंग गुआंग ने कहा है कि अगले चरण की जांच में अमेरिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि शुरू में वह लोगों की जांच करने में बहुत ही धीमा था और उसके पास दुनियाभर में कई जीव वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं हैं। उन्होंने कहा है कि 'जैव-हथियारों से संबंधित सभी विषय जो उसके पास हैं, उनकी जांच होनी चाहिए।' चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार ने फ्रांस के एक वैज्ञानिक जु लिया के हवाले से भी यह दावा कि है कि पिछले हफ्ते उन्होंने दावा किया था कि वहां के शुरुआती मरीजों के सैंपल की जेनेटिक सिक्वेंस से पता चलता है कि फ्रांस में स्थानीय वायरस के चलते संक्रमण फैला था, जो कि उस देश में 2020 से पहले से ही मौजूद था। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक फ्रेंच वैज्ञानिक ने यह भी कहा है कि उन्हें चीन के वुहान शहर में मिले वायरस से कोई लिंक नहीं मिला है और फ्रांस के मरीजों में बहुत अलग स्ट्रेन पाया गया।

कोविड-19 महामारी की शुरुआत कहां हुई ?

कोविड-19 महामारी की शुरुआत कहां हुई ?

ग्लोबल टाइम्स ने एक इंफोग्राफिक्स दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि शोधकर्ताओं को 2019 के मार्च में ही स्पेन में नाले के पानी में कोरोना वायरस मिल चुका था। जबकि इटली के लोगों में कोविड-19 के एंटीबॉडीज से पता चलता है कि वहां उस साल सितंबर में ही कोरोना वायरस मौजूद था। इसी दावे को आगे बढ़ाते हुए चीन दावा करता है कि फ्रांस में 16 नवंबर को ही 2,500 लोगों की चेस्ट स्कैन से इस वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हो जाती है। इसी तरह ब्राजील में 27 नवंबर को और अमेरिका के एक मेयर को लगता है कि वह उस साल नबंवर में ही इससे इंफेक्टेड हो चुके थे। इसके बाद अमेरिकी शोधकर्ताओं को 13 दिसंबर,2020 को ही सैंपल में इसके एंटीबॉडी मिल चुके थे। जबकि, चीन के वुहान में पहला मामला उसी साल दिसंबर में आया था। मजे की बात है कि इस ग्राफिक्स में चीन ने कोई तारीख नहीं बताई है।

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