चीन के चंद्रमा मिशन को तगड़ा झटका, अंतरिक्ष में ही गायब हो गए 2 सैटेलाइट, भारत से रेस में मिली पटखनी
China Moon Mission Fail: भारत के साथ 'मिशन मून' को लेकर मुकाबले में उतरे चीन को बहुत बड़ा झटका लगा है और उसका चंद्रमा मिशन फेल हो गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उसके दो सैटेलाइट अंतरिक्ष में गायब हो गये हैं।
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के दो रॉकेट, जो चंद्रमा मिशन पर थे, वो टेक्निकल वजहों से अपने रास्ते से भटक गया और अंतरिक्ष में गायब होने के बाद अपनी नियोजित कक्षा में पहुंचने से नाकाम हो गया है। चीनी चंद्र मिशन के हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को ये बहुत बड़ा झटका है।

चीन के मिशन मून को तगड़ा झटका
चीनी सैटेलाइट लॉन्च सेंटर ने गुरुवार को एक प्रेस रिलीज में कहा है, कि डीआरओ-ए और डीआरओ-बी के नाम वाले इन दोनों उपग्रहों को बुधवार शाम (13 मार्च) को सिचुआन प्रांत के जिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया था। इन दोनों सैटेलाइट्स को युआनझेंग-1एस अपर स्टेज एयरक्राफ्ट से अंतरिक्ष में ले जाया गया था, जिसमें लॉन्ग मार्च-2सी कैरियर रॉकेट जुड़ा हुआ था।
प्रेस रिलीज में कहा गया है, कि रॉकेट का पहला और दूसरा चरण सामान्य रूप से संचालित हुआ, जबकि ऊपरी चरण में उड़ान के दौरान एक असामान्यता का सामना करना पड़ा, जिससे उपग्रह, पूर्व निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से प्रवेश करने में नाकाम हो गए।
चीनी सरकार के शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने लॉन्च सेंटर का हवाला देते हुए बताया है, कि फिलहाल पता लगाया जा रहा है, कि आखिर ये दोनों सैटेलाइट अचानक अंतरिक्ष से कैसे गायब हो गये। एजेंसी ने कहा है, कि इन दोनो सैटेलाइट्स को चंद्रमा की ओर ले जाने और डिस्टेंट रेट्रोग्रेड ऑर्बिट (DRO) में प्रवेश कराने की थी।
DRO ऑर्बिट चंद्रमा की सतह से हजारों किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है, जो एक स्थिर जगह है और इस स्थान से कोई एयरक्राफ्ट बिना ईंधन का इस्तेमाल किए लंबे समय तक ट्रैक पर रह सकता है।
इस जगह पर पहुंचने के बाद इन दोनों सैटेलाइट्स को आगे उड़ते हुए DRO-L नाम के तीसरे सैटेलाइट से कम्युनिकेशन स्थापित करना था, जिसे पिछले महीने Jielong 3 रॉकेट से कामयाबी के साथ पृथ्वी के लोअर ऑर्बिट में स्थापित किया गया था। इस दोनों इन सैटेलाइट्स को लेजर आधारित पृथ्वी से चंद्रमा तक नेविगेशन टेक्नोलॉजी का टेस्ट करना था। लेकिन, चीन का ये प्रोजेक्ट फेल हो गया है।
साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में बीजिंग स्थिति कुछ इंजीनियरों के हवाले से कहा गया है, कि संभवत: रॉकेट का इंजन खराब होने की वजह से ये मिशन फेल हो गया है। हालांकि, चीनी इंजीनियर अभी भी कोशिश कर रहे हैं, प्रोपैलैंड का इस्तेमाल करते हुए दोनों सैटेलाइट्स को आगे भेजा जाए, लेकिन ऐसे होने पर इन दोनों सैटेलाइट्स की लाइफलाइन काफी कम हो जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications