चीन की सेना का पालतू है कर्नल पर हमला करने वाला मणिपुर का आतंकी संगठन पीएलए, जानिए मंसूबे

आतंकवाद पर नजर रखने वालों का कहना है कि चीनी पीएलए ने पीएलए-मणिपुर को प्रशिक्षण दिया है, जिस पर इस हफ्ते सैनिकों पर हमले का संदेह है। 2009 में, एक विद्रोही ने अपने कबूलनामे में चीनी पीएलए पर प्रशिक्षण देने का खुलासा किया

नई दिल्ली, नवंबर 14: भारत के खिलाफ सिर्फ पाकिस्तान और चीन सिर्फ सीमा रेखा की तरफ से ही घात नहीं लगाए बैठा है, बल्कि इन दोनों देशों ने भारत के खिलाफ कई मोर्चों पर लड़ाई छेड़ रखी है। मणिपुर में शनिवार को आतंकियों ने सेना के काफिले पर हमला किया था, जिसमें कर्नल समेत 5 जवान शहीद हो गए। इस घटना में कर्नल की पत्नी और बेटे की मौत हो गई। घटना की जिम्मेदारी मणिपुर नागा पीपुल्स फ्रंट एमएनपीएफ ली है और और एक नोट भी जारी किया है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि, इस आतंकी संगठन को चीन की सेना पीएलए ने पाल पोषकर बड़ा किया है। आईये जानते हैं क्या है इस संगठन के मंसूबे?

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    चीन का पालतू है मणिपुर का पीएलए

    चीन का पालतू है मणिपुर का पीएलए

    चीन की सेना का नाम तो पीएलए यानि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी है ही, मणिपुर के इस आतंकवादी संगठन का नाम भी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी है और इस संगठन को पाल पोषकर चीन की सेना पीएलए ने ही बड़ा किया है और मणिपुर का ये आतंकी संगठन चीनी सेना का पालतू कुत्ता है और उसी के इशारे पर भौंकता है। आतंकवादियों ने मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के सिंघट में इस घटना को अंजाम दिया है और ये पूरा इलाका म्यांमार सीमा से सटा हुआ है। लिहाजा, आतंकियों के लिए हमला कर म्यांमार में भागने की पूरी गुंजाइश रहती है। शनिवार को कर्नल अपने परिवार के साथ फॉरवर्ड कैंप से वापस बटालियन मुख्यालय लौट रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने आईईडी ब्लास्ट किया था, जिसमें कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनकी पत्नी और बेटे का निधन हो गया। इसके अलावा 5 जवान भी शहीद हुए हैं। घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने दुख व्यक्त किया है।

    चीन की सेना से मिलती है ट्रेनिंग

    चीन की सेना से मिलती है ट्रेनिंग

    खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मणिपुर में दहशत फैलाने वाला ये आतंकवादी संगठन चीन की सेना पीएलए के इशारे पर ही भारत में आतंकी घटनाओं को अंदाम देता रहता है, ताकि भारत में अशांति का माहौल बनाकर रखा जा सके। इसके लिए मणिपुर के इस आतंकवादी संगठन के लिए चीन की पीएलए बकायदा ट्रेनिंग कैंप का भी आयोजन करती है और उन्हें ट्रेनिंग देती है। चीन के इशारे पर ही म्यांमार में सेना ने चुनी हुई सरकार का तख्तापलट किया था, लिहाजा म्यांमार की सीमा के अंदर इस आतंकवादी संगठन के आतंकियों को ट्रेनिंग देना चीन के लिए काफी ज्यादा आसान हो गया है।

    क्या है आतंकी संगठन का मिशन?

    क्या है आतंकी संगठन का मिशन?

    भारतीय सेना की वेबसाइट के अनुसार मणिपुर में सक्रिय आतंकवादी संगठन पीएलए का गठन विद्रोही नेता एन बिशेश्वर ने "भारत के पूर्वी क्षेत्र को भारत से छीनने और फिर छीने गये क्षेत्र को बेस कैंप बनाकर बाकी भारत पर कब्जा करने'' के उद्येश्य से की थी। वेबसाइट का कहना है कि विद्रोही समूह चीनी समर्थन के साथ "स्वतंत्रता के युद्ध" का आह्वान करता है, जो मार्क्सवाद-लेनिनवाद और माओत्से तुंग के विचारों और सिद्धांतों के आधार पर चीनी पीएलए के समान राजनीतिक विचारधारा का निर्माण करता है। ये आतंकवादी संगठन अकसर भारतीय जवानों पर घात लगाकर हमला करता रहता है। 2015 में भी इस आतंकी संगठन ने जवानों पर हमला किया था, जिसमें 20 जवानों की मौत हो गई थी।

    खामोशी से देखता रहता है चीन

    खामोशी से देखता रहता है चीन

    टेररिज्म रिसर्च एंड एनालिसिस कंसोर्टियम यानि टीआरएसी, जो आतंकवादी घटनाओं पर नजर रखता है, उसका कहना है कि, मणिपुर के इस आतंकी संगठन को चीन की सेना पीएलए से समर्थन और ट्रेनिंग दोनों मिली हुई है। हालांकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर चुप्पी बनाए रखी है, लेकिन 2015 के आतंकी हमले के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चीनी पीएलए और पीएलए-मणिपुर के बीच संबंधों से इनकार किया था। चीनी सेना द्वारा मणिपुर के इस संगठन को प्रशिक्षण प्रदान करने के बारे में पीएलए विद्रोही द्वारा स्वीकारोक्ति के बावजूद चीन अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है।

    2009 में हुआ था चीनी सांठगांठ का खुलासा

    2009 में हुआ था चीनी सांठगांठ का खुलासा

    2009 में सार्जेंट रॉनी के रूप में पहचाने गए एक पीएलए आतंकवादी ने पूछताछ के दौरान कबूल किया था कि, "चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी मणिपुर की पीएलए के संपर्क में है। 16 प्लाटून उग्रवादियों को चीन में ट्रेनिंग देने के बाद अशांति फैलाने के लिए भारत भेजा गया था।" रॉनी को अगस्त 2009 में मणिपुर पुलिस और भारतीय सेना के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था। मणिपुर में जन्मे रोनी ने उत्तर प्रदेश में अपनी शिक्षा पूरी की और पंतनगर (अब उत्तराखंड में) में कृषि महाविद्यालय से डिग्री हासिल की। वह 1980 के दशक में मणिपुर लौट आया था और पीएलए के प्रभाव में आ गया था। चीनी पीएलए और पीएलए-मणिपुर के बीच संबंधों के बारे में अपने स्वीकारोक्ति को और अधिक विश्वसनीयता देने के लिए उसने कई सबूत भी पेश किए थे।

    रॉनी ने किया था खतरनाक खुलासे

    रॉनी ने किया था खतरनाक खुलासे

    पूछताछ के दौरान रॉनी ने कई खतरनाक खुलासे किए थे। उसने खुलासा किया था कि चीनी सेना मणिपुर-पीएलए के युवा रंगरूटों को प्रशिक्षण दे रही है। उग्रवादियों को बड़े हथियारों का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया गया और प्रशिक्षण के बाद भारत वापस भेज दिया गया। रॉनी ने अपने स्वीकारोक्ति में कहा था कि, म्यांमार में पीएलए आतंकवादियों का प्रशिक्षण भी लगातार जारी है। मणिपुर में भी कई अस्थायी शिविर हैं, जैसे सोइबोलकुकी और सिंघत में अस्थाई शिविर लगते हैं और इन शिविरों में आतंकियों को बकायदा तोप चलाने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, पिछले साल यानि 24 जुलाई 2020 को यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) थिंक-टैंक ने खुलासा किया था का मणिपुर के विद्रोहियों को चीन की सेना ने हथियार मुहैया करवाए हैं और उससे भारत को खतरा है।

    कैसा है इस संगठन का स्ट्रक्चर?

    कैसा है इस संगठन का स्ट्रक्चर?

    दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर के इस आतंकवादी संगठन को चीन की सेना पीएलए के अलावा म्यांमार में नागा विद्रोही समूह एनएससीएन द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। एनएससीएन विद्रोहियों और चीनी पीएलए के बीच घनिष्ठ संबंध लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहे हैं। आपको बता दें कि, मणिपुर में एनएससीएन हैं, एक खापलांग समूह और इस्साक-मुवा गुट। एनएससीएन-आईएम केंद्र के साथ शांति वार्ता कर रहा है जबकि एनएससीएन-के कट्टर बना हुआ है। सरकारी एजेंसियों को 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के आसपास फोन कॉल रिकॉर्डिंग मिली थी। कथित टेलीफोनिक बातचीत में, एक चीनी पीएलए अधिकारी ने एनएससीएन-के नेता के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की और उसे मंदारिन सीखने के लिए कहा था।

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