चीन के फाइटर जेट ने रोका अमेरिकी एयरक्राफ्ट का रास्ता, अमेरिका ने बताया गुस्ताखी
अमेरिका और चीन के बीच फिर बढ़ा विवाद। अमेरिका का दावा चीन के फाइटर जेट सुखोई ने ईस्ट चाइना सी के ऊपर से उड़ते समय रास्ते में रोका उसके एयरक्राफ्ट्स का रास्ता।
वॉशिंगटन। चीन और अमेरिका के बीच एक नया विवाद शुरू हो गया है। अमेरिका ने दावा किया है कि चीन के सुखोई एयरक्राफ्ट ने बुधवार को उसके एयरक्राफ्ट का रास्ता उस समय रोका जब वह ईस्ट चाइना सी पर से उड़ान भर रहा था।

चीन का रवैया गलत
यूएस पैसेफिक एयरफोर्स की ओर से गुरुवार को इस बाबत एक बयान जारी किया गया है। एयरफोर्स का कहना है कि चीन के फाइटर जेट्स ने रेडिएशन डिटेक्शन प्लेन को ईस्ट चाइना सी के ऊपर रोका। एक अमेरिकी अधिकारी की ओर से कहा गया है कि चीनी जेट, यूएस एयरफोर्स के डब्लूयसी-135 प्लेन के 150 फीट तक आ गए थे। इसमें से एक सुखोई-50 था और यह बिल्कुल अमेरिकी एयरक्राफ्ट के ठीक ऊपर था। डब्लूयसी-135 के क्रू ने चीन के इस रवैये को एकदम अनप्रोफेशनल करार दिया है। एयरफोर्स के लेफ्टिनेंट कर्नल हॉज की ओर से घटना के बाद एक बयान भी जारी किया गया है। हॉज ने कहा है कि इस मामले की जांच जारी है और इस बीच शुरुआती रिपोर्ट्स में इस बात की पुष्टि हुई है कि यह रवैया बड़ा ही अव्यवहारिक था। इस मुद्दे पर चीन से कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों के जरिए बात की जा रही है।
परमाणु परीक्षण पता लगाने वाला एयरक्राफ्ट
डब्लूयसी-135 को 'कॉन्स्टेंट फिनिक्स' भी कहते हैं और इसके चार इंजन दुनिया के किसी भी हिस्से में हुए परमाणु परीक्षण के एक खास तत्व की तलाश हवा में करते हैं। जो भी सैंपल इकट्ठा होते हैं उनसे इस बात का पता लगाने की कोशिश की जाती है कि हकीकत में क्या हुआ होगा। डब्लूयसी-135 को अमेरिका ने एक रूटीन मिशन के तहत नार्थ ईस्ट एशिया में तैनात किया गया है। इन एयरक्राफ्ट्स को नॉर्थ कोरिया की ओर से संभावित परमाणु परीक्षण का पता लगाने और सुबूत इकट्ठा करने के लिए पहले प्रयोग किया जा चुका है। इस वर्ष अमेरिका और चीन के बीच इस तरह की यह दूसरी घटना है। इसी वर्ष फरवरी में अमेरिका ने दावा किया था कि यूएस नेवी के पी-3 ओरायन बीएसई एयरक्राफ्ट और चीन का एक सर्विलांस एयरक्राफ्ट साउथ चाइना सी में एकदम करीब आ गए थे।
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